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जिले में बेअसर मेक इन इंडिया
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Sat, 23 May 2015 11:40 PM IST
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उद्योग धंधों की कमी से जूझ रहे जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेक इन इंडिया अभियान भी असर नहीं दिखा पा रहा। बिजली, सड़क, यातायात असुविधाओं और आपराधिक गतिविधियों के चलते नए उद्योग धंधे तो दूर पहले से संचालित कारोबार भी नहीं चल पा रहे हैं। कई तो यहां से दूसरी जगह जाकर बस चुके हैं।
भाजपा सरकार के एक साल के शासन में मेक इन इंडिया का असर नहीं दिख रहा है। इस दौरान यहां नए उद्योग लगना तो दूर किसी का प्रस्ताव तक विचाराधीन नहीं है। इतना ही नहीं स्थानीय अव्यवस्थाएं पूर्व संचालित कारोबारों पर भारी पड़ रही हैं। सड़क, बिजली, यातायात अव्यवस्थाओं के चलते संचालित कारोबार भी दम तोड़ रहे हैं। इस दौरान कई उद्योग धंधे या तो बंद हो गए या फिर अन्यत्र शिफ्ट हो गए हैं। रोजगार की आस लगाए युवा बेरोजगार मायूस हैं।
व्यापारिक बदहाली के लिए बिजली, सड़क और यातायात जैसी स्थानीय अव्यवस्थाएं जिम्मेदार हैं। जेनरेटर, सड़क ट्रांसपोर्टेशन के चलते उत्पाद की लागत बढ़ जाती है और लाभ घट जाता है।
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- प्रसून वार्ष्णेय, युवा कारोबारी
मेक इन इंडिया का असर बड़ी कंपनियों पर दिख रहा है। इसके लिए उन्हें प्रचार प्रसार के साथ ही केंद्र सरकार से प्रोत्साहन और प्रशासनिक सहयोग भी मिल रहा है। छोटे व्यापार प्रदेश सरकार से संचालित हैं। यहां सहयोग तो दूर प्रचार प्रसार तक का अभाव है।
- आलोक जैन, उद्योगपति
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भाजपा सरकार के एक साल के शासन में मेक इन इंडिया का असर नहीं दिख रहा है। इस दौरान यहां नए उद्योग लगना तो दूर किसी का प्रस्ताव तक विचाराधीन नहीं है। इतना ही नहीं स्थानीय अव्यवस्थाएं पूर्व संचालित कारोबारों पर भारी पड़ रही हैं। सड़क, बिजली, यातायात अव्यवस्थाओं के चलते संचालित कारोबार भी दम तोड़ रहे हैं। इस दौरान कई उद्योग धंधे या तो बंद हो गए या फिर अन्यत्र शिफ्ट हो गए हैं। रोजगार की आस लगाए युवा बेरोजगार मायूस हैं।
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व्यापारिक बदहाली के लिए बिजली, सड़क और यातायात जैसी स्थानीय अव्यवस्थाएं जिम्मेदार हैं। जेनरेटर, सड़क ट्रांसपोर्टेशन के चलते उत्पाद की लागत बढ़ जाती है और लाभ घट जाता है।
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- प्रसून वार्ष्णेय, युवा कारोबारी
मेक इन इंडिया का असर बड़ी कंपनियों पर दिख रहा है। इसके लिए उन्हें प्रचार प्रसार के साथ ही केंद्र सरकार से प्रोत्साहन और प्रशासनिक सहयोग भी मिल रहा है। छोटे व्यापार प्रदेश सरकार से संचालित हैं। यहां सहयोग तो दूर प्रचार प्रसार तक का अभाव है।
- आलोक जैन, उद्योगपति