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Etah News: ऑक्सीजन के इंतजार में उखड़ गईं सांसें
Tue, 27 Oct 2026 12:04 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 27 Oct 2026 12:04 AM IST
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गोविंद का फाइल फोटो
एटा। सड़क हादसे में घायल सब्जी विक्रेता की शहर के अरुणा नगर स्थित निजी चिकित्सालय में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन ने अस्पताल के चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि यहां मौजूद सिलिंडर खाली थे। लंबे इंतजार के बाद भी ऑक्सीजन न मिलने पर सांसें उखड़ गईं। शिकायत पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
कस्बा व थाना निधौली कलां के मोहल्ला साढ़ूपुरा निवासी यशवंत ने बताया कि 24 अक्तूबर की सुबह भाई गोविंद (29) सब्जी मंडी आया था। करीब साढ़े पांच बजे लौटते समय तहसील सदर के सामने अज्ञात वाहन की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे में सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आई थीं।
सूचना पर पहुंचे परिजन अरुणा नगर के निजी चिकित्सालय ले गए। यहां भर्ती कर लिया गया। यशवंत ने बताया कि बाएं पैर का एक्सरे कराने के बाद चिकित्सकों ने हड्डी टूटने की बात कही। उसी दिन दोपहर करीब तीन बजे ऑपरेशन कर दिया। 25 अक्तूबर की शाम करीब साढ़े सात बजे अचानक तबीयत बिगड़ गई। सांस लेने में परेशानी होने लगी। इसके बाद परिजन ने चिकित्सक और कर्मचारियों से ऑक्सीजन लगाने के लिए फरियाद की।
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आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारी सिलिंडर लेकर आए। इनमें से किसी में ऑक्सीजन नहीं थी। गाेविंद करीब 20 मिनट तक सांस लेने के लिए जूझता रहा। रात 8ः30 बजे के लगभग उसकी मौत हो गई। परिजन के मुताबिक ऑपरेशन से पहले जरूरी चिकित्सकीय जांचें भी नहीं कराई गई थीं। मरीज की मौत के बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने लीवर खराब होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इस मामले में अस्पताल की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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कस्बा व थाना निधौली कलां के मोहल्ला साढ़ूपुरा निवासी यशवंत ने बताया कि 24 अक्तूबर की सुबह भाई गोविंद (29) सब्जी मंडी आया था। करीब साढ़े पांच बजे लौटते समय तहसील सदर के सामने अज्ञात वाहन की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे में सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें आई थीं।
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सूचना पर पहुंचे परिजन अरुणा नगर के निजी चिकित्सालय ले गए। यहां भर्ती कर लिया गया। यशवंत ने बताया कि बाएं पैर का एक्सरे कराने के बाद चिकित्सकों ने हड्डी टूटने की बात कही। उसी दिन दोपहर करीब तीन बजे ऑपरेशन कर दिया। 25 अक्तूबर की शाम करीब साढ़े सात बजे अचानक तबीयत बिगड़ गई। सांस लेने में परेशानी होने लगी। इसके बाद परिजन ने चिकित्सक और कर्मचारियों से ऑक्सीजन लगाने के लिए फरियाद की।
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आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारी सिलिंडर लेकर आए। इनमें से किसी में ऑक्सीजन नहीं थी। गाेविंद करीब 20 मिनट तक सांस लेने के लिए जूझता रहा। रात 8ः30 बजे के लगभग उसकी मौत हो गई। परिजन के मुताबिक ऑपरेशन से पहले जरूरी चिकित्सकीय जांचें भी नहीं कराई गई थीं। मरीज की मौत के बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने लीवर खराब होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पोस्टमार्टम कराया गया। इस मामले में अस्पताल की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।