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Etah News: बालक के दो हत्यारों को आजीवन कारावास
Tue, 11 Feb 2025 11:19 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 11 Feb 2025 11:19 PM IST
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एटा। करीब 14 साल पहले एक बालक की क्रूरता पूर्वक हत्या की गई थी। गड़ासे से उसको काटा गया। बालक का एक हाथ व पैर व आंख नहीं मिली थी। मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश नरेंद्र पाल राणा ने फैसला सुनाया। राशिद निवासी मोहल्ला सजावल और अशरफ निवासी मोहल्ला खेरू कस्बा व थाना गंजडुंडवारा जिला कासगंज को आजीवन कारावास से दंडित करने का आदेश दिया है।
दरियागंज रेलवे स्टेशन के नजदीक रेल लाइन के पास 8 अगस्त 2011 को करीब 10 वर्षीय एक बच्चे की लाश मिली। इसका एक हाथ, पैर और आंख नहीं थी। सिर बुरी तरह कुचला हुआ था। रेल कर्मचारियों ने थाना राजा का रामपुर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने इसे एटा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा दिया। वहां पहुंची एक रोशन बानो ने उसकी पहचान अपने पुत्र मोहम्मद सैफ उर्फ मुन्ना के रूप में की।
उसने पुलिस को बताया कि 7 अगस्त 2011 की दोपहर मैं नमाज पढ़ने जा रही थी, उसी समय पुत्र खाने की चीज दिलाने की जिद कर रहा था। तभी वहां राशिद और अशरफ आए और कहा कि हम लोग बच्चे को चीज दिला लाते हैं ये लोग बाइक पर बैठाकर पुत्र को ले गए। काफी देर बाद भी नहीं आए और फोन स्विच ऑफ कर लिया।
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रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपियों के घर पर दबिश दी, लेकिन दोनों ही फरार हो गए थे। इसके बाद न्यायालय के माध्यम से कुर्की कार्रवाई भी की गई। 13 जुलाई 2012 को ये लोग पुलिस के हत्थे चढ़े। पुलिस विवेचना के अनुसार पूछताछ के दौरान इन्होंने बताया कि मुन्ना के पिता की मृत्यु के बाद हम लोगों का उसके घर आना-जाना हो गया था।
इस बीच मुन्ना की बुआ से संबंध बन गए थे। एक दिन मुन्ना ने हम लोगों को देख लिया था। किसी को यह बात बताए जाने के डर से हम लोग उसे 7 अगस्त 2011 को ले गए और रात में गड़ासे से काटकर हत्या कर दी। लाश को रेल लाइन के किनारे झाड़ियों में फेंक दिया।
दोनों पक्षाें की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने दोनों को दोषी पाया। आजीवन कारावास सहित 80-80 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया। इसमें से एक लाख रुपये प्रतिकर के रूप में मुन्ना की मां को देने का आदेश दिया।
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दरियागंज रेलवे स्टेशन के नजदीक रेल लाइन के पास 8 अगस्त 2011 को करीब 10 वर्षीय एक बच्चे की लाश मिली। इसका एक हाथ, पैर और आंख नहीं थी। सिर बुरी तरह कुचला हुआ था। रेल कर्मचारियों ने थाना राजा का रामपुर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने इसे एटा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा दिया। वहां पहुंची एक रोशन बानो ने उसकी पहचान अपने पुत्र मोहम्मद सैफ उर्फ मुन्ना के रूप में की।
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उसने पुलिस को बताया कि 7 अगस्त 2011 की दोपहर मैं नमाज पढ़ने जा रही थी, उसी समय पुत्र खाने की चीज दिलाने की जिद कर रहा था। तभी वहां राशिद और अशरफ आए और कहा कि हम लोग बच्चे को चीज दिला लाते हैं ये लोग बाइक पर बैठाकर पुत्र को ले गए। काफी देर बाद भी नहीं आए और फोन स्विच ऑफ कर लिया।
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रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने आरोपियों के घर पर दबिश दी, लेकिन दोनों ही फरार हो गए थे। इसके बाद न्यायालय के माध्यम से कुर्की कार्रवाई भी की गई। 13 जुलाई 2012 को ये लोग पुलिस के हत्थे चढ़े। पुलिस विवेचना के अनुसार पूछताछ के दौरान इन्होंने बताया कि मुन्ना के पिता की मृत्यु के बाद हम लोगों का उसके घर आना-जाना हो गया था।
इस बीच मुन्ना की बुआ से संबंध बन गए थे। एक दिन मुन्ना ने हम लोगों को देख लिया था। किसी को यह बात बताए जाने के डर से हम लोग उसे 7 अगस्त 2011 को ले गए और रात में गड़ासे से काटकर हत्या कर दी। लाश को रेल लाइन के किनारे झाड़ियों में फेंक दिया।
दोनों पक्षाें की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने दोनों को दोषी पाया। आजीवन कारावास सहित 80-80 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित करने का आदेश दिया। इसमें से एक लाख रुपये प्रतिकर के रूप में मुन्ना की मां को देने का आदेश दिया।