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जागरूकता का अभाव या शिक्षक उदासीन
अमर उजाला ब्यूरो एटा
Updated Thu, 13 Oct 2016 11:33 PM IST
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जागरूकता का अभाव या शिक्षक उदासीन
- फोटो : अमर उजाला
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स्कूलों में हैंडवाश अभियान फरमानों तक सिमट रहा है। चंद संस्थाओं को छोड़कर अधिकांश में साबुन तौलिया रखना तो दूर,बच्चों को नियमित सफाई को लेकर जागरूक भी नहीं किया जा रहा।
सफाई स्वच्छता को लेकर चलाए जा रहे अभियान कुछ संस्थाओं तक ही सिमटे हुए हैं। नि:शुल्क शिक्षा दे रहे परिषदीय विद्यालय तो दूर, फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलने वाले कान्वेंट स्कूलों भी इसकी अनदेखी की जाती है। कई शिक्षक-शिक्षिकाएं जहां नल के पास तौलिया साबुन नियमित रखने का दावा कर रही हैं, वहीं बच्चे अभिभावक इसे नकार रहे हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ शिक्षकों का कहना है कि सीमित संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों में एक साबुन तौलिया औचक निरीक्षण एवं अधिकारियों के आने पर दिखाने के लिए रखा जाता है। एनपीआरसी शैलेश शर्मा ने बताया कि तौलिया साबुन का कोई अलग फंड नहीं है, फिर भी विद्यालय में इसे रखने और बच्चों को स्वस्छता के प्रति प्रेरित करने का काम किया जा रहा है।
माध्यमिक विद्यालयों स्थिति और खराब
सैकड़ों की छात्र संख्या वाले माध्यमिक विद्यालयों में हैंडवॉश अभियान का असर नहीं दिखता। सज संवर के आने वाले लड़के लड़कियां हाथ धोने में जागरूकता नहीं दिखाते। इतना ही नहीं कुछ बच्चे एमडीएम से पहले भी हाथ नहीं धोते हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर कई प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने बताया कि एक हजार छात्र-छात्राओं को कितने तौलिया एवं साबुन रखे जाएं।
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हैंडवाश के लिए अधीनस्थों अधिकारियों एवं प्रधानाध्यापक शिक्षकों को अनुपालन के निर्देश हैं। औचक निरीक्षण के दौरान साबुन तौलिया की उपलब्धता का सत्यापन एवं बच्चों से जानकारी की जाती है। अनुपालन नहीं होने पर नोटिस जारी कर जबाव तलब किए जाते हैं।
एसएस यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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सफाई स्वच्छता को लेकर चलाए जा रहे अभियान कुछ संस्थाओं तक ही सिमटे हुए हैं। नि:शुल्क शिक्षा दे रहे परिषदीय विद्यालय तो दूर, फीस के नाम पर मोटी रकम वसूलने वाले कान्वेंट स्कूलों भी इसकी अनदेखी की जाती है। कई शिक्षक-शिक्षिकाएं जहां नल के पास तौलिया साबुन नियमित रखने का दावा कर रही हैं, वहीं बच्चे अभिभावक इसे नकार रहे हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर कुछ शिक्षकों का कहना है कि सीमित संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों में एक साबुन तौलिया औचक निरीक्षण एवं अधिकारियों के आने पर दिखाने के लिए रखा जाता है। एनपीआरसी शैलेश शर्मा ने बताया कि तौलिया साबुन का कोई अलग फंड नहीं है, फिर भी विद्यालय में इसे रखने और बच्चों को स्वस्छता के प्रति प्रेरित करने का काम किया जा रहा है।
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माध्यमिक विद्यालयों स्थिति और खराब
सैकड़ों की छात्र संख्या वाले माध्यमिक विद्यालयों में हैंडवॉश अभियान का असर नहीं दिखता। सज संवर के आने वाले लड़के लड़कियां हाथ धोने में जागरूकता नहीं दिखाते। इतना ही नहीं कुछ बच्चे एमडीएम से पहले भी हाथ नहीं धोते हैं। नाम नहीं छापने की शर्त पर कई प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने बताया कि एक हजार छात्र-छात्राओं को कितने तौलिया एवं साबुन रखे जाएं।
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हैंडवाश के लिए अधीनस्थों अधिकारियों एवं प्रधानाध्यापक शिक्षकों को अनुपालन के निर्देश हैं। औचक निरीक्षण के दौरान साबुन तौलिया की उपलब्धता का सत्यापन एवं बच्चों से जानकारी की जाती है। अनुपालन नहीं होने पर नोटिस जारी कर जबाव तलब किए जाते हैं।
एसएस यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी