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खाना-पानी दिए बिना 3465 मजदूरों को ट्रेन से भेजा बिहार
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स्पेशल ट्रेन में जाने को रेलवे स्टेशन पर कतार में खड़े मजदूर- संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। जिला प्रशासन ने मंगलवार को दो स्पेशल ट्रेन से कुल 3 हजार 4 सौ 65 प्रवासी श्रमिक व ईंट-भट्ठा मजदूरों को बिहार के लिए रवाना किया। प्रशासन ने इन मजदूरों को खाना, पानी दिए बिना ही एटा रेलवे स्टेशन से विदा दिया। ये मजदूर 35 भट्ठा मालिकों के यहां काम कर रहे थे। प्रशासन ने इन मजदूरों के जाने की व्यवस्था तो कर दी लेकिन उनके खाने पीने का कोई इंतजाम नहीं किया गया।
मंगलवार की सुबह से ही मजदूर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। वहीं भट्ठा मालिक ने भी इनके खाने का कोई भी इंतजाम नहीं किया। स्टेशन पर ट्रेन आने के बाद श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई, जिन लोगों के पास मास्क नहीं था। उन्हें मास्क वितरण किया गया। पहली स्पेशल ट्रेन के माध्यम से कुल 1741 श्रमिकों को गया भेजा गया।
वहीं दूसरी स्पेशल ट्रेन से कुल 1724 श्रमिकों को लखीसराय भेजा गया। दोपहर दो बजे डीएम सुखलाल भारती और एसएसपी सुनील कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। लेकिन ट्रेन निर्धारित समय से 27 मिनट की देरी से दो बजकर 27 मिनट पर गया के लिए प्रस्थान हुई।
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आरएसएस ने वितरण किए बिस्किट और पानी की बोतल
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन पर पानी की 2 सौ बोतलें और बिस्किट के पैकेट श्रमिकों में वितरण किए गए। सुबह से भूखे प्यासे श्रमिकों को पानी की बोतल और बिस्किट मिले तो उनके चेहरे पर मुस्कान देखने को मिली।
पुलिस बल रहा मौजूद
रेलवे स्टेशन पर तीन हजार से अधिक श्रमिकों की देखरेख के लिए पुलिस बल को तैनात किया गया। रेलवे स्टेशन पुलिस बल तैनात किए जाने के बाद छावनी में तब्दील सा नजर आया।
सामाजिक दूरी का नहीं किया गया पालन
तीन हजार से अधिक श्रमिक रेलवे स्टेशन के बाहर मौजूद थे। श्रमिकों को ट्रेन में बैठाने के दौरान सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया गया। वहां पर मौजूद अधिकारियों ने श्रमिकों को सोशल डिस्टेंस मैंटेन करने के लिए भी मुनासिब नहीं समझा। वहीं, नगर पालिका की ओर से रेलवे स्टेशन पर सैनिटाइजेशन की व्यवस्था की गई। इसके लिए एक टैंकर रेलवे स्टेशन के बाहर तैनात किया गया। श्रमिकों को ट्रेन से भेजने के बाद स्टेशन को सैनिटाइज किया गया।
हमारी तरफ से श्रमिकों को भेजने के
लिए रेल टिकट की व्यवस्था की गई है, लेकिन खाने की व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए थी, वो यहां पर नहीं है।
- विनीत, ईंट-भट्ठा मालिक
श्रमिकों को खाने के प्रबंध के लिए प्रशासन की तरफ से कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है। हमारी तरफ से सिर्फ उनके टिकट की व्यवस्था की गई है।
- दिनेश वशिष्ठ, ईंट-भट्ठा मालिक
-श्रमिकों को भोजन की व्यवस्था प्रशासन द्वारा नहीं की जानी थी। इसके लिए भट्ठा स्वामियों को निर्देशित किया गया था, उनके द्वारा मजदूरों को भोजन के लिए राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई। वहीं जब रेलवे स्टेशन पर श्रमिकों से पूछा गया कि वह घर से खाना बनाकर लाए हैं तो उन्होंने बताया कि हां खाना लेकर आए हैं।
-सुखलाल भारती, जिलाधिकारी
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मंगलवार की सुबह से ही मजदूर रेलवे स्टेशन पर पहुंच गए। वहीं भट्ठा मालिक ने भी इनके खाने का कोई भी इंतजाम नहीं किया। स्टेशन पर ट्रेन आने के बाद श्रमिकों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई, जिन लोगों के पास मास्क नहीं था। उन्हें मास्क वितरण किया गया। पहली स्पेशल ट्रेन के माध्यम से कुल 1741 श्रमिकों को गया भेजा गया।
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वहीं दूसरी स्पेशल ट्रेन से कुल 1724 श्रमिकों को लखीसराय भेजा गया। दोपहर दो बजे डीएम सुखलाल भारती और एसएसपी सुनील कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। लेकिन ट्रेन निर्धारित समय से 27 मिनट की देरी से दो बजकर 27 मिनट पर गया के लिए प्रस्थान हुई।
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आरएसएस ने वितरण किए बिस्किट और पानी की बोतल
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने रेलवे स्टेशन पर पानी की 2 सौ बोतलें और बिस्किट के पैकेट श्रमिकों में वितरण किए गए। सुबह से भूखे प्यासे श्रमिकों को पानी की बोतल और बिस्किट मिले तो उनके चेहरे पर मुस्कान देखने को मिली।
पुलिस बल रहा मौजूद
रेलवे स्टेशन पर तीन हजार से अधिक श्रमिकों की देखरेख के लिए पुलिस बल को तैनात किया गया। रेलवे स्टेशन पुलिस बल तैनात किए जाने के बाद छावनी में तब्दील सा नजर आया।
सामाजिक दूरी का नहीं किया गया पालन
तीन हजार से अधिक श्रमिक रेलवे स्टेशन के बाहर मौजूद थे। श्रमिकों को ट्रेन में बैठाने के दौरान सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया गया। वहां पर मौजूद अधिकारियों ने श्रमिकों को सोशल डिस्टेंस मैंटेन करने के लिए भी मुनासिब नहीं समझा। वहीं, नगर पालिका की ओर से रेलवे स्टेशन पर सैनिटाइजेशन की व्यवस्था की गई। इसके लिए एक टैंकर रेलवे स्टेशन के बाहर तैनात किया गया। श्रमिकों को ट्रेन से भेजने के बाद स्टेशन को सैनिटाइज किया गया।
हमारी तरफ से श्रमिकों को भेजने के
लिए रेल टिकट की व्यवस्था की गई है, लेकिन खाने की व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए थी, वो यहां पर नहीं है।
- विनीत, ईंट-भट्ठा मालिक
श्रमिकों को खाने के प्रबंध के लिए प्रशासन की तरफ से कोई बंदोबस्त नहीं किया गया है। हमारी तरफ से सिर्फ उनके टिकट की व्यवस्था की गई है।
- दिनेश वशिष्ठ, ईंट-भट्ठा मालिक
-श्रमिकों को भोजन की व्यवस्था प्रशासन द्वारा नहीं की जानी थी। इसके लिए भट्ठा स्वामियों को निर्देशित किया गया था, उनके द्वारा मजदूरों को भोजन के लिए राशन सामग्री उपलब्ध कराई गई। वहीं जब रेलवे स्टेशन पर श्रमिकों से पूछा गया कि वह घर से खाना बनाकर लाए हैं तो उन्होंने बताया कि हां खाना लेकर आए हैं।
-सुखलाल भारती, जिलाधिकारी