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खाद-बीज के लाले, सहकारी समितियों पर पड़े ताले
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2016 10:29 PM IST
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बढ़ीं किसानों की मुश्किलें
- फोटो : अमर उजाला ब्यूराो
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अन्नदाताओं की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन चुकीं सहकारी समितियां आरबीआई के प्रतिबंध के बाद नासूर बन गई हैं। आलम यह है कि जिनके पास कोआपरेटिव की केसीसी है उन्हें खाद और बीज मिल रहे हैं, लेकिन जिन किसानों के सहकारी बैंकों में खाते हैं और नहीं हैं। उन किसानों को खाद-बीज के लिए बाजार में धक्के खाने पड़ रहे हैं। आरबीआई के आदेश के बाद सहकारी समितियों में सन्नाटा है। जबकि बैंकों के पास कैश उपलब्धता नहीं होने से किसानों को दो हजार रुपये से ज्यादा जमा पूंजी नहीं मिल रही। ऐसे में इस बार रबी की फसल को ग्रहण लगता दिखाई दे नहा है। शुक्रवार को ‘अमर उजाला’ टीम ने सहकारी समितियों की हकीकत जानने की कोशिश की तो हालात चौकाने वाले दिखाई दिए। किसानों ने कोआपरेटिव बैंक से जमा पूंजी नहीं मिलने और नोट नहीं बदले जाने का रोना रोया।
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पीड़ित किसानों की सुनिए
अंतरापुरा निवासी निवासी किसान अमीर सिंह (65) 40 बीघा खेत में गेहूं बोना चाहता है, लेकिन सहकारी बैंक में पुराने नोट नहीं बदल रहे और बैक सिर्फ दो हजार रुपये मिलने से अमीर सिंह ने सिर्फ 25 बीघा गेहूूं बोने का फैसला किया है। अमीर सिंह केंद्रीय थोक उपभोक्ता सहकारी भंडार पर खाद और बीज खरीदने पहुंचे थे। किसान ने बताया यहां पुराने नोट तो चल रहे हैं, लेकिन छोटे नोट नहीं होने के कारण केंद्र से नहाने धोने के साबुन और कीटनाशक बचे रुपये के एवज में जबरन दिए जा रहे हैं।
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गोशाला शीतलपुर निवासी किसान रामचंद्र ने कहा कि रुपये नहीं होने से खाद और बीज खरीदने से पहले सोचना पड़ रहा है। जेवर गहने रखने से भी खाद बीज के लिए रुपये बाजार में नहीं मिल रहे। ऐसे में किसान को गेहूूं की फसल बोने के लिए लाले पड़ रहे हैं। सरकार को कोआपरेटिव से प्रतिबंध हटाकर किसानों को सुविधा देनी चाहिए। किसानों के लिए सबसे सुविधाजनक समितियां और कोआपरेटिव बैंक है।
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अपराह्न 11:30 बजे
क्षेत्रीय सहकारी समिति एटा परिसर में अमर उजाला टीम पहुंची तो सन्नाटा था। समिति सचिव रिप दमन सिंह ने कहा केसीसी धारक किसान खाद और बीज उठा रहे हैं। पुराने नोट लेकर आने वाले किसानों को लौटाया जा रहा है। समिति में कैश बिक्री खत्म हो चुकी है। किसानों के पास खाद और बीज खरीदने के पैसे नहीं हैं।
दोपहर 12:00 बजे
किसान क्रय-विक्रय समिति शीतलपुर में सिर्फ अकाउंटेंट अजय पाल सिंह बैठे थे। पूछने पर पता चला कि समिति में खाद का स्टॉक है, लेकिन किसान कैश नहीं होने के कारण खाद-बीज नहीं खरीद रहे। समिति से करीब 4000 किसान जुड़े हैं। केसीसी धारक एक दो किसान खाद और बीज खरीदने आ रहे हैं।
दोपहर 12:45 बजे
खाद बीज बिक्री संघ अवागढ़ के संचालक शंकर पाल खाद, बीज के साथ अकेले बैठे मिले और किसान नदारद थे। पूछने पर पता चला किसानों के पास खाद बीज खरीदने के लिए रुपये नहीं है। वर्ना आजकल के दिनों में किसान धक्कमुक्की कर खाद खरीदते दिखाई देते थे। बोले कोआपरेटिव से प्रतिबंध नहीं हटा तो रबी फसल का उत्पादन गिरेगा।
दोपहर 1:00 बजे
साधन सहकारी समिति जैथरा में 14 समितियां हैं, लेकिन प्रतिबंध लगने के बाद किसी भी समिति ने खाद का स्टॉक नहीं उठाया। सचिव रामबिलास पाल ने कहा पुराने नोट पर जमा और बदलने पर प्रतिबंध लगने के बाद किसानों को खाद-बीज नहीं मिल रहा।
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पीड़ित किसानों की सुनिए
अंतरापुरा निवासी निवासी किसान अमीर सिंह (65) 40 बीघा खेत में गेहूं बोना चाहता है, लेकिन सहकारी बैंक में पुराने नोट नहीं बदल रहे और बैक सिर्फ दो हजार रुपये मिलने से अमीर सिंह ने सिर्फ 25 बीघा गेहूूं बोने का फैसला किया है। अमीर सिंह केंद्रीय थोक उपभोक्ता सहकारी भंडार पर खाद और बीज खरीदने पहुंचे थे। किसान ने बताया यहां पुराने नोट तो चल रहे हैं, लेकिन छोटे नोट नहीं होने के कारण केंद्र से नहाने धोने के साबुन और कीटनाशक बचे रुपये के एवज में जबरन दिए जा रहे हैं।
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गोशाला शीतलपुर निवासी किसान रामचंद्र ने कहा कि रुपये नहीं होने से खाद और बीज खरीदने से पहले सोचना पड़ रहा है। जेवर गहने रखने से भी खाद बीज के लिए रुपये बाजार में नहीं मिल रहे। ऐसे में किसान को गेहूूं की फसल बोने के लिए लाले पड़ रहे हैं। सरकार को कोआपरेटिव से प्रतिबंध हटाकर किसानों को सुविधा देनी चाहिए। किसानों के लिए सबसे सुविधाजनक समितियां और कोआपरेटिव बैंक है।
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अपराह्न 11:30 बजे
क्षेत्रीय सहकारी समिति एटा परिसर में अमर उजाला टीम पहुंची तो सन्नाटा था। समिति सचिव रिप दमन सिंह ने कहा केसीसी धारक किसान खाद और बीज उठा रहे हैं। पुराने नोट लेकर आने वाले किसानों को लौटाया जा रहा है। समिति में कैश बिक्री खत्म हो चुकी है। किसानों के पास खाद और बीज खरीदने के पैसे नहीं हैं।
दोपहर 12:00 बजे
किसान क्रय-विक्रय समिति शीतलपुर में सिर्फ अकाउंटेंट अजय पाल सिंह बैठे थे। पूछने पर पता चला कि समिति में खाद का स्टॉक है, लेकिन किसान कैश नहीं होने के कारण खाद-बीज नहीं खरीद रहे। समिति से करीब 4000 किसान जुड़े हैं। केसीसी धारक एक दो किसान खाद और बीज खरीदने आ रहे हैं।
दोपहर 12:45 बजे
खाद बीज बिक्री संघ अवागढ़ के संचालक शंकर पाल खाद, बीज के साथ अकेले बैठे मिले और किसान नदारद थे। पूछने पर पता चला किसानों के पास खाद बीज खरीदने के लिए रुपये नहीं है। वर्ना आजकल के दिनों में किसान धक्कमुक्की कर खाद खरीदते दिखाई देते थे। बोले कोआपरेटिव से प्रतिबंध नहीं हटा तो रबी फसल का उत्पादन गिरेगा।
दोपहर 1:00 बजे
साधन सहकारी समिति जैथरा में 14 समितियां हैं, लेकिन प्रतिबंध लगने के बाद किसी भी समिति ने खाद का स्टॉक नहीं उठाया। सचिव रामबिलास पाल ने कहा पुराने नोट पर जमा और बदलने पर प्रतिबंध लगने के बाद किसानों को खाद-बीज नहीं मिल रहा।