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कराहते मरीजों को चिकित्सकों का इंतजार
Amar ujala
Updated Sat, 25 Mar 2017 12:59 AM IST
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जिला अस्पताल में डॉक्टर के इंतजार में बैठा मरीज
- फोटो : amar ujala
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जिला अस्पताल में शुक्रवार की सुबह नौ बजे हाथ में पर्चा, दर्द के कराहते बीमारों की भीड़ लगी थी। पर, एक भी चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं आए थे। ओपीडी में चिकित्सकों की कुर्सी खाली पड़ी दिखी। जबकि सीएम के निर्देश हैं कि डॉक्टर सुबह आठ बजे अस्पताल पहुंच जाएं, लेकिन जिले के डाक्टरों को न तो निर्देशों की चिंता है और न ही मरीजों की। खास बात यह है कि डाक्टरों के मुखिया भी समय पर अस्पताल से नदारद थे। अमर उजाला टीम ने शुक्रवार सुबह अस्पताल में डाक्टरों के आने की पड़ताल की, तो मनमानी और अनदेखी की कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आई। इन तस्वीरों से आप भी समझ जाएंगे कि जिले में डॉक्टर कैसे निर्देशों को ताक पर रखकर मनमानी का आमादा हैं?
तस्वीर-एक
सुबह 8.05 बजे
जिला अस्पताल की ओपीडी का दरवाजा बंद था। करीब 15 मिनट बाद एक कर्मचारी आया और गेट खोला। इसके बाद पर्चे बनने का काम शुरू हुआ। लाइन में बम मुश्किल से दस-बारह लोग थे। उन्हें लगा कि पर्चा बनते ही इलाज मिल जाएगा। पर, डाक्टर की कुर्सी खाली देख वे मायूस हो गए।
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तस्वीर दो
सुबह 8:15 बजे
ओपीडी विभाग
जिला अस्पताल में फिजीशियन कक्ष में पड़ी कुर्सियां खाली पड़ी थीं। बाहर लिखे बोर्ड पर डाक्टरों का नाम पढ़ने के बाद एक मरीज हाथ मेें पर्चा लेकर मायूसी से वहीं बैठ गया और इंतजार करने लगा।
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तस्वीर तीन
सुबह 8:20 बजे
बाल रोग विभाग, सर्जिकल विभाग
जिला अस्पताल में सुबह-सुबह पर्चा बनवाने वालों की कतार में कुछ महिलाएं अपने बच्चों को लेकर पहुंची थीं। लेकिन बाल रोग विभाग से डाक्टर गायब थे। सर्जिकल विभाग में भी कुर्सी डाक्टर का इंतजार करती नजर आई। इसके साथ ही नाक, कान गला और नेत्र रोग विभाग का हाल भी कुछ ऐसा ही था।
तस्वीर चार
सुबह 8:25 बजे
सीएमएस कक्ष
जिला अस्पताल के ऊपरी तल पर बने सीएमएस कक्ष में भी कुर्सी खाली पड़ी थी। डाक्टर नहीं पहुंचे तो साहब कैसे पहुंचते। थोड़ी देर बाद डाक्टर एनएस तोमर कक्ष में पहुंचे और रजिस्टर उठाकर उपस्थिति दर्ज करते नजर आए।
तस्वीर पांच
सुबह 8:30 बजे
रोगी सहायता केंद्र
जिला अस्पताल के रोगी सहायता केंद्र का हाल भी कुछ ऐसा ही था। परामर्श दाता डाक्टर केंद्र से नदारद थे। तमाम मरीज उनका इंतजार करते दिखे। लोगों ने बताया कि आए दिन चिकित्सकों की यही मनमानी रहती है।
तस्वीर-छह
सुबह 8:35 बजे
पोषण पुनर्वास केंद्र
अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र में छह बेडों में से तीन पर बच्चे एडमिट थे। मगर केंद्र में डाक्टर या कोई भी कर्मचारी नहीं था। बच्चों की माताएं खुद ही अपनी व्यवस्था करती नजर आईं। जानकारी पर पता चला कि यहां तैनात डाक्टर का ट्रांसफर हो गया है और किसी नए डाक्टर की तैनाती नहीं हुई है।
अफसरों की सुनिए
सुबह आठ से दो बजे तक ओपीडी खोलने के निर्देश हैं। चिकित्सकों को निर्देश दिए गए हैं, यदि दोबारा शिकायत आई तो चिकित्सकों पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
डॉ आरसी पांडेय
सीएमओ एटा