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कैसे बने खिलाड़ी, न पार्क हैं न खेल के मैदान
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Sun, 28 Aug 2016 11:53 PM IST
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राष्ट्रीय खेल दिवस
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगर में खेल के मैदान नहीं है और न ही विकसित पार्क। आखिर इन परिस्थितियों में बच्चे कहां खेलें और कैसे खिलाड़ी तैयार हों। इसका जबाब किसी के पास नहीं है। पार्क एवं खेल के मैदान के विकास के लिए न ही प्रशासन का ध्यान दे रहा हैं और न ही जन प्रतिनिधियों का ही इस ओर ध्यान है। नगर पालिका प्रशासन का भी उदासीन रवैया है।
नगर की आबादी के बीच केवल एक मात्र ऐतिहासिक प्रभु पार्क है। लेकिन यह पार्क केवल खेल का मैदान नहीं है। यहां धार्मिक स्थल भी हैं। यहां धार्मिक आयोजन भी होते हैं। ऐसे में बच्चों के खेल कूद में व्यवधान होता है। प्रभु पार्क के अतिरिक्त नगर की आवास विकास कालोनी में कुछ पार्क बने हैं, जो विकसित नहीं हैं। जिसके चलते कालोनी के बच्चे भी सड़कों पर खेलने को मजबूर हैं। नगर में तमाम नई कालोनियां जहां तहां बनाई गई हैं, लेकिन उनमें पार्क नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चे कहां खेले और कैसे खिलाड़ी बनें?
नगर में रेलवे के मैदान भी विकसित नहीं है। पहले रेलवे मैदान पर खेल के आयोजन होते थे। लेकिन रेलवे ने अन्य प्रयोग के लिए भूमि को चयनित कर लिया है। रेलवे के मनोरंजन संस्थान में बना पार्क भी खस्ताहाल है। उसकी बदहाली के लिए रेलवे का प्रशासन जिम्मेदार है। कासगंज में बनने वाला मिनी स्टेडियम भी कई वर्ष पूर्व नगर की सीमा से काफी दूर ढोलना मार्ग पर नगला पट्टी पर बनाया गया। जहां केवल सरकारी आयोजन ही होते हैं। प्रतिदिन खेल की गतिविधियां संचालित नहीं होती। जिले में बनने वाले स्टेडियम के लिए भूमि सोरों पालीटेक्निक के पीछे चिह्नित है, लेकिन इसके निर्माण की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई है।
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जिले में न पार्क हैं और न ही खेल के मैदान। जब बच्चों को खेलने की जगह नहीं मिलेगी तो खिलाड़ी कैसे बनेंगे? उन्होंने कहा कि कई अच्छे खिलाड़ी जनपद में तैयार हो सकते हैं, लेकिन संसाधन तो उपलब्ध हों।
प्रवीन जादौन,
खेल शिक्षक, केए कालेज
तीन पार्क हो रहे विकसित: डीएम
कासगंज (ब्यूरो)। जिलाधिकारी के. विजियेंद्र पांडियन का कहना है कि उन्होंने आवास विकास कालोनी के तीन पार्कों को विकसित कराए जाने की परियोजना को स्वीकृति दी है। ये पार्क शीघ्र ही विकसित होंगे। उन्होंने बताया कि स्टेडियम के लिए भी शीघ्र ही धन अवमुक्त हो रहा है।
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नगर की आबादी के बीच केवल एक मात्र ऐतिहासिक प्रभु पार्क है। लेकिन यह पार्क केवल खेल का मैदान नहीं है। यहां धार्मिक स्थल भी हैं। यहां धार्मिक आयोजन भी होते हैं। ऐसे में बच्चों के खेल कूद में व्यवधान होता है। प्रभु पार्क के अतिरिक्त नगर की आवास विकास कालोनी में कुछ पार्क बने हैं, जो विकसित नहीं हैं। जिसके चलते कालोनी के बच्चे भी सड़कों पर खेलने को मजबूर हैं। नगर में तमाम नई कालोनियां जहां तहां बनाई गई हैं, लेकिन उनमें पार्क नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चे कहां खेले और कैसे खिलाड़ी बनें?
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नगर में रेलवे के मैदान भी विकसित नहीं है। पहले रेलवे मैदान पर खेल के आयोजन होते थे। लेकिन रेलवे ने अन्य प्रयोग के लिए भूमि को चयनित कर लिया है। रेलवे के मनोरंजन संस्थान में बना पार्क भी खस्ताहाल है। उसकी बदहाली के लिए रेलवे का प्रशासन जिम्मेदार है। कासगंज में बनने वाला मिनी स्टेडियम भी कई वर्ष पूर्व नगर की सीमा से काफी दूर ढोलना मार्ग पर नगला पट्टी पर बनाया गया। जहां केवल सरकारी आयोजन ही होते हैं। प्रतिदिन खेल की गतिविधियां संचालित नहीं होती। जिले में बनने वाले स्टेडियम के लिए भूमि सोरों पालीटेक्निक के पीछे चिह्नित है, लेकिन इसके निर्माण की प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं हुई है।
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जिले में न पार्क हैं और न ही खेल के मैदान। जब बच्चों को खेलने की जगह नहीं मिलेगी तो खिलाड़ी कैसे बनेंगे? उन्होंने कहा कि कई अच्छे खिलाड़ी जनपद में तैयार हो सकते हैं, लेकिन संसाधन तो उपलब्ध हों।
प्रवीन जादौन,
खेल शिक्षक, केए कालेज
तीन पार्क हो रहे विकसित: डीएम
कासगंज (ब्यूरो)। जिलाधिकारी के. विजियेंद्र पांडियन का कहना है कि उन्होंने आवास विकास कालोनी के तीन पार्कों को विकसित कराए जाने की परियोजना को स्वीकृति दी है। ये पार्क शीघ्र ही विकसित होंगे। उन्होंने बताया कि स्टेडियम के लिए भी शीघ्र ही धन अवमुक्त हो रहा है।