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जेल अधीक्षक और जेलर हटाए
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Mon, 16 Mar 2015 11:03 PM IST
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जेल के अंदर असलाह होने की सूचना पर पुलिस-प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए। रविवार रात लगभग 11 बजे डीएम निधि केसरवानी ने अधिकारियों और पुलिस बल के साथ छापा मारा। दो घंटे तक जेल के अंदर हुई सर्च में बंदी गुड्डू के पास से मोबाइल बरामद हुआ। वहीं एक अन्य मोबाइल बोरी में दबा मिला, जिसमें बैटरी व सिम नहीं थी। पिटाई करने की सूचना पर पहुंचे चिकित्सक ने बंदी गुड्डू का परीक्षण किया, लेकिन चोट के कहीं निशान नहीं मिले। इस मामले में जेल अधीक्षक ओपी कटियार और जेलर एएन त्रिपाठी को हटा दिया गया है। फीरोजाबाद के जेलर शिवकुमार यादव को यहां का चार्ज सौंपा है।
रविवार रात प्रशासन को सूचना मिली कि जेल के अंदर बंदियों के पास असलाह हैं और कोई घटना हो सकती है। इस पर डीएम निधि केसरवानी डीआईजी जेल केदारनाथ, एएसपी विसर्जन सिंह यादव, अपर जिलाधिकारी प्रशासन लालमणि मिश्र, एसडीएम अजीत कुमार सिंह, सीओ सिटी करन सिंह सहित पीएसी व पुलिस बल के साथ जिला जेल पहुंचीं। दो घंटे तक हर बैरक में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन जेल में कोई हथियार बरामद नहीं हुआ।
डीएम ने बताया कि बैरक नंबर 15 में पेट्रोल पंप पर लूट का आरोपी कासगंज के गांव नगला गुलाबी निवासी गुड्डू से एक मोबाइल बरामद हुआ है। दूसरा मोबाइल बैरक के बाहर रखी बोरी में पॉलीथिन में लिपटा मिला, जिसमें बैटरी व सिम नहीं थी। बंदी को मोबाइल एक अन्य बंदी ने दिया है। जेल अधीक्षक ओपी कटियार ने कोतवाली नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई है। कहा है कि रविवार रात सर्च के दौरान बंदी गुड्डू निवासी कासगंज के पास से एक मोबाइल, एक डायरी व एक अधिवक्ता के विजिटिंग कार्ड मिले हैं। वहीं बैरक नंबर 16 से बंदी विवेक निवासी नगला रती थाना सिकंदरपुर वैश्य कासगंज से एक मोबाइल बिना सिम व बैटरी के मिला है।
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जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा इसकी जांच कराई जा रही है। दूसरी ओर रात लगभग 12 बजे जिला अस्पताल से डॉ. अरुण कुमार एंबुलेंस लेकर पहुंचे। बाद में जेल से बाहर आए डॉ. अरुण ने बताया कि बंदी गुड्डू ने आरोप लगाया था कि उसे पीटा गया है। इस पर उन्हें बुलाया गया था, जब उन्होंने जांच की तो उसके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं पाए गए हैं।
जेल अधीक्षक ओपी कटियार और जेलर एनके त्रिपाठी को हटा दिया गया है। फिलहाल फीरोजाबाद के जेलर शिवकुमार यादव को यहां का कार्य देखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जेल में स्थिति सामान्य है। सिर्फ दो मोबाइल बरामद हुए हैं।
-केदारनाथ, डीआईजी जेल, आगरा
12 दिन से सुर्खियों में एटा जेल
लगातार 12 दिनों से एटा जेल सुर्खियों में है। इसकी शुरुआत तीन मार्च को उस समय हुई जब जेल में तलाशी के दौरान बंदी मनोज के पास मोबाइल बरामद हुआ। इसके बाद हुए संघर्ष में जेलर, दो डिप्टी जेलर सहित 12 बंदी रक्षक व बंदी घायल हुए थे। उसके बाद भी जेल के हालात नहीं सुधरे और बंदियाें ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। जेल प्रशासन ने तीन बंदियों को आगरा, बदायूं व अलीगढ़ भेज दिया। इस दौरान बदायूं से एटा डकैती कोर्ट में पेशी पर आया बंदी पंकज लौटते समय बस स्टैंड पर बस के आगे कूद गया था। इससे उसकी मौत हो गई थी। एक बार फिर बंदी आक्रोशित हो गए और 12 व 13 मार्च दो दिन जेल में भूख हड़ताल रखी। जेल में लगातार फैल रही अव्यवस्था व भूख हड़ताल के पीछे मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बंदी सौरभ यादव पर आरोप लगा कि उसके ही इशारे पर बंदी भूख हड़ताल कर रहे हैं। जेल प्रशासन ने डीएम को पत्र सौंपा। इसमें बंदी सौरभ को दूसरी जेल भेजने की गुहार लगाई। नहीं भेजने पर सामूहिक अवकाश पर जाने या फिर स्थानांतरण की चेतावनी देने पर रात में ही शासन से आए आदेश के बाद उसे सेंट्रल जेल बरेली भेज दिया गया था।
कुछ तो गड़बड़ है जेल में
जेल में बार-बार इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही हैं। प्रशासन भी इस मामले को हल्के में ले रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि पहली बार बंदी मनोज पर मोबाइल व सिम मिली उसके बाद सर्च हुई। फिर जेल में कहां से बंदी के पास मोबाइल पहुंच गया। यह जांच का विषय है। आखिर बंदियों को मोबाइल कौन पहुंचा रहा है। इसके पीछे कारण क्या है। इन सबके पीछे जेल के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत तो नहीं है यह भी जांच का विषय है। बताया यह भी जाता है कि जेल में असलाह होने की सूचना डीजी जेल को भी दी गई थी। इस पर यह छापामार कार्रवाई हुई। दूसरी ओर लोगाें में चर्चा है कि रसूखदार बंदी सौरभ यादव को एटा जेल से हटाना जेलर को भारी पड़ गया।
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रविवार रात प्रशासन को सूचना मिली कि जेल के अंदर बंदियों के पास असलाह हैं और कोई घटना हो सकती है। इस पर डीएम निधि केसरवानी डीआईजी जेल केदारनाथ, एएसपी विसर्जन सिंह यादव, अपर जिलाधिकारी प्रशासन लालमणि मिश्र, एसडीएम अजीत कुमार सिंह, सीओ सिटी करन सिंह सहित पीएसी व पुलिस बल के साथ जिला जेल पहुंचीं। दो घंटे तक हर बैरक में सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन जेल में कोई हथियार बरामद नहीं हुआ।
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डीएम ने बताया कि बैरक नंबर 15 में पेट्रोल पंप पर लूट का आरोपी कासगंज के गांव नगला गुलाबी निवासी गुड्डू से एक मोबाइल बरामद हुआ है। दूसरा मोबाइल बैरक के बाहर रखी बोरी में पॉलीथिन में लिपटा मिला, जिसमें बैटरी व सिम नहीं थी। बंदी को मोबाइल एक अन्य बंदी ने दिया है। जेल अधीक्षक ओपी कटियार ने कोतवाली नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई है। कहा है कि रविवार रात सर्च के दौरान बंदी गुड्डू निवासी कासगंज के पास से एक मोबाइल, एक डायरी व एक अधिवक्ता के विजिटिंग कार्ड मिले हैं। वहीं बैरक नंबर 16 से बंदी विवेक निवासी नगला रती थाना सिकंदरपुर वैश्य कासगंज से एक मोबाइल बिना सिम व बैटरी के मिला है।
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जेल में मोबाइल कैसे पहुंचा इसकी जांच कराई जा रही है। दूसरी ओर रात लगभग 12 बजे जिला अस्पताल से डॉ. अरुण कुमार एंबुलेंस लेकर पहुंचे। बाद में जेल से बाहर आए डॉ. अरुण ने बताया कि बंदी गुड्डू ने आरोप लगाया था कि उसे पीटा गया है। इस पर उन्हें बुलाया गया था, जब उन्होंने जांच की तो उसके शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं पाए गए हैं।
जेल अधीक्षक ओपी कटियार और जेलर एनके त्रिपाठी को हटा दिया गया है। फिलहाल फीरोजाबाद के जेलर शिवकुमार यादव को यहां का कार्य देखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जेल में स्थिति सामान्य है। सिर्फ दो मोबाइल बरामद हुए हैं।
-केदारनाथ, डीआईजी जेल, आगरा
12 दिन से सुर्खियों में एटा जेल
लगातार 12 दिनों से एटा जेल सुर्खियों में है। इसकी शुरुआत तीन मार्च को उस समय हुई जब जेल में तलाशी के दौरान बंदी मनोज के पास मोबाइल बरामद हुआ। इसके बाद हुए संघर्ष में जेलर, दो डिप्टी जेलर सहित 12 बंदी रक्षक व बंदी घायल हुए थे। उसके बाद भी जेल के हालात नहीं सुधरे और बंदियाें ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। जेल प्रशासन ने तीन बंदियों को आगरा, बदायूं व अलीगढ़ भेज दिया। इस दौरान बदायूं से एटा डकैती कोर्ट में पेशी पर आया बंदी पंकज लौटते समय बस स्टैंड पर बस के आगे कूद गया था। इससे उसकी मौत हो गई थी। एक बार फिर बंदी आक्रोशित हो गए और 12 व 13 मार्च दो दिन जेल में भूख हड़ताल रखी। जेल में लगातार फैल रही अव्यवस्था व भूख हड़ताल के पीछे मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बंदी सौरभ यादव पर आरोप लगा कि उसके ही इशारे पर बंदी भूख हड़ताल कर रहे हैं। जेल प्रशासन ने डीएम को पत्र सौंपा। इसमें बंदी सौरभ को दूसरी जेल भेजने की गुहार लगाई। नहीं भेजने पर सामूहिक अवकाश पर जाने या फिर स्थानांतरण की चेतावनी देने पर रात में ही शासन से आए आदेश के बाद उसे सेंट्रल जेल बरेली भेज दिया गया था।
कुछ तो गड़बड़ है जेल में
जेल में बार-बार इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही हैं। प्रशासन भी इस मामले को हल्के में ले रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि पहली बार बंदी मनोज पर मोबाइल व सिम मिली उसके बाद सर्च हुई। फिर जेल में कहां से बंदी के पास मोबाइल पहुंच गया। यह जांच का विषय है। आखिर बंदियों को मोबाइल कौन पहुंचा रहा है। इसके पीछे कारण क्या है। इन सबके पीछे जेल के अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत तो नहीं है यह भी जांच का विषय है। बताया यह भी जाता है कि जेल में असलाह होने की सूचना डीजी जेल को भी दी गई थी। इस पर यह छापामार कार्रवाई हुई। दूसरी ओर लोगाें में चर्चा है कि रसूखदार बंदी सौरभ यादव को एटा जेल से हटाना जेलर को भारी पड़ गया।