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Etah News: जेल के बंदी सीखेंगे हुनर, करेंगे रोजगार
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एटा। जिला कारागार में निरुद्ध बंदियों और सजायाफ्ता कैदियों को प्रशिक्षण दिलाकर हुनरमंद बनाया जाएगा। तैयार किए जाने वाले उत्पादों का जेल के बाहर आउटलेट (दुकानें) खोलकर बिक्री की जाएगी। इनसे होने वाली आमदनी से बंदियों को आर्थिक लाभ होगा। जेल में बंदियों को सबसे पहले तीन प्रकार के उत्पादन करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इनमें विभिन्न प्रकार के अचार, छोटे-बड़े लिफाफा तैयार करने और शिक्षित व होनहार बंदियों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण कारागार के अंदर ही दिलाया जाएगा, इसका लाभ महिला व पुरुष बंदियों को मिलेगा। इनकी ओर से तैयार किए गए उत्पादनों को बाजार से मुनासिब दरों पर जेल से बाहर आउटलेट खोलकर बिक्री कराई जाएगी और इसका सीधा लाभ बंदियों और कैदियों को जाएगा।
कारागार अधीक्षक अमित चौधरी ने बताया कि बंदियों को जनवरी माह के पहले सप्ताह में ही तीन प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे बंदियों और कैदियों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा। इनके उत्पादन जेल प्रोडक्ट के नाम से कारागार के बाहर ही बिक्री किए जाएंगे। यहां से होने वाली आमदनी सीधे तौर पर बंदियों को ही मिलेगी। पहले से ही सिलाई का कार्य कारागार में चल रहा है। इसी तरह से तीन अन्य प्रकार के भी प्रशिक्षण दिलाए जाएंगे।
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बंदी कल्याण समिति का होगा पंजीकरण
कारागार अधीक्षक ने बताया कि निरुद्ध बंदियों को पदाधिकारी व सदस्य बनाकर बंदी कल्याण समिति का पंजीकरण कराया जा रहा है। इसकी विधिवत तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और दस्तावेज आदि को लगाकर प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। समिति के माध्यम से ही कच्चा माल आया करेगा। जिसके बाद उत्पादन करके बिक्री किया जाएगा। इसका बंदियों के सुधार में विशेष योगदान रहेगा।
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इनमें विभिन्न प्रकार के अचार, छोटे-बड़े लिफाफा तैयार करने और शिक्षित व होनहार बंदियों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रशिक्षण कारागार के अंदर ही दिलाया जाएगा, इसका लाभ महिला व पुरुष बंदियों को मिलेगा। इनकी ओर से तैयार किए गए उत्पादनों को बाजार से मुनासिब दरों पर जेल से बाहर आउटलेट खोलकर बिक्री कराई जाएगी और इसका सीधा लाभ बंदियों और कैदियों को जाएगा।
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कारागार अधीक्षक अमित चौधरी ने बताया कि बंदियों को जनवरी माह के पहले सप्ताह में ही तीन प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे बंदियों और कैदियों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा। इनके उत्पादन जेल प्रोडक्ट के नाम से कारागार के बाहर ही बिक्री किए जाएंगे। यहां से होने वाली आमदनी सीधे तौर पर बंदियों को ही मिलेगी। पहले से ही सिलाई का कार्य कारागार में चल रहा है। इसी तरह से तीन अन्य प्रकार के भी प्रशिक्षण दिलाए जाएंगे।
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बंदी कल्याण समिति का होगा पंजीकरण
कारागार अधीक्षक ने बताया कि निरुद्ध बंदियों को पदाधिकारी व सदस्य बनाकर बंदी कल्याण समिति का पंजीकरण कराया जा रहा है। इसकी विधिवत तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और दस्तावेज आदि को लगाकर प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। समिति के माध्यम से ही कच्चा माल आया करेगा। जिसके बाद उत्पादन करके बिक्री किया जाएगा। इसका बंदियों के सुधार में विशेष योगदान रहेगा।