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संविदा कर्मियों को हटाया तो जिला अस्पताल में नहीं र्हुइं जांचे
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एटा। जिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को खून की जांच करने वाले तीन संविदा कर्मियों को कंपनी ने हटा दिया। इससे अस्पताल में मरीजों के खून की जांच नहीं हो पाई। मरीज जांच के लिए इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। इस पर मरीज बिना जांच के ही लौट गए।
जिला अस्पताल में लैब टेक्नीशियन की कमी के चलते शासन से एक कंपनी को कार्य करने के लिए ठेकेदारी पर लैब दी गई थी। जहां संसाधन तो जिला अस्पताल के थे, लेकिन कर्मचारी संबंधित कंपनी ने संविदा पर लगाए थे। बृहस्पतिवार को लैब में कार्य कर रहे तीनों कर्मचारियों को कंपनी के मैनेजर ने हटाकर घर भेज दिया। इससे अस्पताल में जांचें नहीं र्हुइं। जांच न होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीज अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से जांच कराने की मिन्नतें करते देखे गए। जांच करने के लिए पहुंचने वाले मरीज लौट गए।
प्रतिदिन होती हैं 200 से 250 जांचे
जिला अस्पातल की लैब में प्रतिदिन मलेरिया, टॉयफाइड, सीवीसी, लिवर सहित अन्य रोग की प्रतिदिन 200 से 250 तक जांचें होती हैं। बृहस्पतिवार को जांच न होने से मरीज परेशान रहे।
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चिकित्सकों को पता ही नहीं जांच हो रही या नहीं
ओपीडी में मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सकों को पता ही नहीं था कि लैब में जांच हो रही है या नहीं। इस दौरान वह मरीजों की जांच के लिए पर्चे पर लिखते जा रहे थे। इससे लैब के सामने मरीजों की भीड़ लग गई।
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जिला अस्पताल में लैब टेक्नीशियन की कमी के चलते शासन से एक कंपनी को कार्य करने के लिए ठेकेदारी पर लैब दी गई थी। जहां संसाधन तो जिला अस्पताल के थे, लेकिन कर्मचारी संबंधित कंपनी ने संविदा पर लगाए थे। बृहस्पतिवार को लैब में कार्य कर रहे तीनों कर्मचारियों को कंपनी के मैनेजर ने हटाकर घर भेज दिया। इससे अस्पताल में जांचें नहीं र्हुइं। जांच न होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। मरीज अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से जांच कराने की मिन्नतें करते देखे गए। जांच करने के लिए पहुंचने वाले मरीज लौट गए।
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प्रतिदिन होती हैं 200 से 250 जांचे
जिला अस्पातल की लैब में प्रतिदिन मलेरिया, टॉयफाइड, सीवीसी, लिवर सहित अन्य रोग की प्रतिदिन 200 से 250 तक जांचें होती हैं। बृहस्पतिवार को जांच न होने से मरीज परेशान रहे।
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चिकित्सकों को पता ही नहीं जांच हो रही या नहीं
ओपीडी में मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सकों को पता ही नहीं था कि लैब में जांच हो रही है या नहीं। इस दौरान वह मरीजों की जांच के लिए पर्चे पर लिखते जा रहे थे। इससे लैब के सामने मरीजों की भीड़ लग गई।