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मानव अंग तस्कर: आरोपियों को बचा रही पुलिस...सीबीआई से कराओ जांच
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एटा। मानव अंग तस्करों के शिकार बने एटा के भगीपुर निवासी युवक के भाई ने पुलिस जांच पर असंतुष्टि जताई है। शासन को पत्र भेजकर कहा है कि पुलिस आरोपियों को बचाने में लगी है। मामले की जांच सीबीआई या एसटीएफ से कराई जाए।
भगीपुर के रहने वाले किशन को मानव अंग तस्करी गिरोह ने फेसबुक के जरिए अपने झांसे में फंसाया था। 24 लाख रुपये में एक किडनी का सौदा तय किया गया। विशाखापट्टनम के एक अस्पताल में उसकी किडनी निकाली गई। लेकिन केवल ढाई लाख रुपये ही खाते में भेजे, वो भी निकाल लिए गए। इसके बाद किशन एटा आ गया। 21 अप्रैल को इस गिरोह से जुड़े एक आरोपी अश्वनी उर्फ रौकी को पकड़ लिया गया।
22 अप्रैल को उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। इस दिन उसके एक साथी शहर के दीपक उपाध्याय को गिरफ्तार किया गया। बाद में अन्य लोगों के नाम का खुलासा हुआ। बहराइच निवासी राजेश उर्फ प्रतीक सहित तीन अन्य को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। लेकिन विशाखापट्टनम और लखनऊ के मुख्य आरोपियों तक पुलिस के हाथ अभी तक नहीं पहुंच सके हैं।
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इसे लेकर किशन के भाई राजकुमार ने अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र भेजा है। कहा है कि मुख्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी करने में विवेचक की भूमिका संदिग्ध है, वह निष्पक्ष जांच नहीं कर रहे हैं। अभी तक हम लोगों के बयान तक नहीं लिए गए हैं। विवेचक मुख्य आरोपियों को संरक्षण दे रहे हैं। जबकि यह बहुत बड़ा गैंग है, जिसके मुख्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो ये लोग गरीब व बेसहारा लोगों को प्रलोभन देकर किडनी निकालने का काम लगातार करते रहेंगे।
इस प्रकरण में निष्पक्षता के साथ गंभीरतापूर्वक जांच की जा रही है। लगातार आरोपी पकड़े भी जा रहे हैं। मुख्य अभियुक्तों की तलाश के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
धनंजय सिंह कुशवाह, अपर पुलिस अधीक्षक
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भगीपुर के रहने वाले किशन को मानव अंग तस्करी गिरोह ने फेसबुक के जरिए अपने झांसे में फंसाया था। 24 लाख रुपये में एक किडनी का सौदा तय किया गया। विशाखापट्टनम के एक अस्पताल में उसकी किडनी निकाली गई। लेकिन केवल ढाई लाख रुपये ही खाते में भेजे, वो भी निकाल लिए गए। इसके बाद किशन एटा आ गया। 21 अप्रैल को इस गिरोह से जुड़े एक आरोपी अश्वनी उर्फ रौकी को पकड़ लिया गया।
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22 अप्रैल को उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। इस दिन उसके एक साथी शहर के दीपक उपाध्याय को गिरफ्तार किया गया। बाद में अन्य लोगों के नाम का खुलासा हुआ। बहराइच निवासी राजेश उर्फ प्रतीक सहित तीन अन्य को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। लेकिन विशाखापट्टनम और लखनऊ के मुख्य आरोपियों तक पुलिस के हाथ अभी तक नहीं पहुंच सके हैं।
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इसे लेकर किशन के भाई राजकुमार ने अपर मुख्य सचिव गृह को पत्र भेजा है। कहा है कि मुख्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी करने में विवेचक की भूमिका संदिग्ध है, वह निष्पक्ष जांच नहीं कर रहे हैं। अभी तक हम लोगों के बयान तक नहीं लिए गए हैं। विवेचक मुख्य आरोपियों को संरक्षण दे रहे हैं। जबकि यह बहुत बड़ा गैंग है, जिसके मुख्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो ये लोग गरीब व बेसहारा लोगों को प्रलोभन देकर किडनी निकालने का काम लगातार करते रहेंगे।
इस प्रकरण में निष्पक्षता के साथ गंभीरतापूर्वक जांच की जा रही है। लगातार आरोपी पकड़े भी जा रहे हैं। मुख्य अभियुक्तों की तलाश के लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
धनंजय सिंह कुशवाह, अपर पुलिस अधीक्षक