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#हिंदीहैंहम : 'हिंदी भाषा को दिया सम्मान, सफलता की ऊंचाइयों तक पाया मुकाम'
Thu, 27 Aug 2020 01:34 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा-कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, एटा-कासगंज
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 27 Aug 2020 01:34 PM IST
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हिंदी हैं हम
- फोटो : Amar Ujala
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हिंदी स्नेह, ममता और करुणा की भाषा है। विश्व पटल पर हिंदी एक प्राचीन भाषा के रूप में उभर कर सामने आई है। हिंदी को जब होनहारों ने मान सम्मान दिया तो हिंदी भाषा ने उन्हें मुकाम तक पहुंचा दिया। कोई सरकारी महकमे में ऊंचाइयों तक पहुंच गया तो कोई साहित्य के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छा गया। कासगंज और एटा में व्हाट्सएप संवाद पर हिंदी से मुकाम पाने वाले लोगों ने अपने अनुभव साझा किए।
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'हिंदी माध्यम की परीक्षा से बना पीसीएस'
कासगंज के मोहल्ला जय जयराम निवासी पीसीएस दीपक कुमार ने बताया कि हिंदी भाषा से मुझे बचपन से ही प्यार था। वर्ष 2017 में हिंदी भाषा में लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी और इस परीक्षा में सफलता हासिल हुई। पीसीएस संवर्ग में सफलता हासिल की और अब हिंदी भाषा के प्रेम का ही नतीजा है कि आगरा में प्रशासनिक सेवा दे रहा हूं।
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हिंदी प्रोफेसर उमाकांत ने कहा कि हिंदी भाषा को सम्मान दिलाने के लिए मैंने काफी संघर्ष किया। अब तक 10 अंतरराष्ट्रीय और 8 राष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन करा चुका हूं। प्राज्ञ साहित्य नाम से एक पत्रिका भी मैने प्रकाशित की है जो विश्व पटल पर छाई हुई है। गूगल ने इस पत्रिका को निशुल्क साझा कर दिया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन में भी मैने हिंदी सम्मेलन मे एकल वक्ता के रूप में भूमिका निभाई यहां हिंदी भाषा ने मुझे सम्मान दिलाया।
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स्कूल से कॉलेज तक हिंदी एक सशक्त अभिव्यक्ति
एटा के एक निजी स्कूल के प्रधानाचार्य बिंदु जायसवाल ने कहा कि हिंदी का वर्चस्व शैक्षिक एवं व्यापारिक क्षेत्र में दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। नई शिक्षा नीति में मिले स्थान के बाद इसका नया प्रभाव भी नजर आएगा। स्कूल से लेकर कालेज तक हिंदी एक सशक्त भाषा एवं विषय के रूप में उभरेगी। आसान अभिव्यक्ति एवं एकरूप सरल उच्चारण से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी मांग एवं आकर्षण बढ़ रहा है।
‘शब्दों की वास्तविकता हिंदी में है’
प्रधानाध्यापक डॉ. पंकज मिश्र ने कहा कि शब्दों की वास्तविकता हिंदी में है। हिंदी से हमें भाषाई ज्ञान के साथ संस्कारित जीवन पद्धति भी मिलती है। यह सामाजिक जीवन का मूल आधार भी है। इसके शब्द संबोधन के साथ रिश्तों की भी पहचान कराते हैं। अम्मा, बाबा, नाना, नानी, बुआ, ताई, चाचा, चाची, मौसी जैसे शब्दों में रिश्तों का प्यार एवं माधुर्य भी झलकता है। इसी कारण हिंदी को आमजन की भाषा कहा जाता है।
‘शब्दों की वास्तविकता हिंदी में है’
प्रधानाध्यापक डॉ. पंकज मिश्र ने कहा कि शब्दों की वास्तविकता हिंदी में है। हिंदी से हमें भाषाई ज्ञान के साथ संस्कारित जीवन पद्धति भी मिलती है। यह सामाजिक जीवन का मूल आधार भी है। इसके शब्द संबोधन के साथ रिश्तों की भी पहचान कराते हैं। अम्मा, बाबा, नाना, नानी, बुआ, ताई, चाचा, चाची, मौसी जैसे शब्दों में रिश्तों का प्यार एवं माधुर्य भी झलकता है। इसी कारण हिंदी को आमजन की भाषा कहा जाता है।