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आलू की खरीद से व्यापारियों ने खींचे हाथ

Sat, 04 Mar 2017 11:21 PM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Sat, 04 Mar 2017 11:21 PM IST
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Hand drawn traders from buying potatoes
आलू की खोदाई करते क‌िसान - फोटो : Amar Ujala

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आलू की मंदी ने इस बार व्यापार का पूरा ही चक्र गड़बड़ा दिया है। हर कोई मंदी की मार से डरा हुआ है। आलू किसान तो फसल की लागत न निकलने से बेहद परेशान हैं। वे समझ नहीं पा रहे कि इन बिगड़े हालातों में क्या करें, क्योंकि पूरी की पूरी फसल उन्हीं के हाथों में है। आलू की फसल तैयार होने पर तमाम कारोबारी किसानों का आलू खोदाई के समय ही खरीद लेते थे, लेकिन इस बार कोई भी व्यापारी खेतों पर नहीं पहुंच रहा।
जिले में शीत गृहों की क्षमता से करीब 4 से 5 लाख क्विंटल अधिक आलू की पैदावार हुई है। शीत गृह तेजी से फुल हो रहे हैं। होली के आसपास सभी शीत गृह फुल होने की संभावना है। ऐसे में अधिक पैदावार हुए आलू का किया होगा, न किसान समझ पा रहा है और न ही कारोबारी क्योंकि बाहरी मंडियों में आलू की मांग नहीं है और स्थानीय मंडी में इतनी खपत नहीं है। परिणामस्वरूप स्थानीय मंडी में आलू के भाव तीन रुपये किलो पर ही अटके पड़े हैं। जिससे किसानों को फसल का लागत मूूल्य भी हाथ नहीं लग रहा।
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आम तौर पर आलू की फसल तैयार होते ही मुनाफा कमाने के उद्देश्य से तमाम भड़सारी कारोबारियों के बीच इस बात की प्रतिस्पर्धा रहती थी कि वह भंडारण के लिए अधिक से अधिक आलू किसान से खेेतों पर सीधे खरीद पाएं। इस प्रतिस्पर्धा के चलते किसानों केा फसल का अच्छा मूल्य भी मिल जाता था, लेकिन इसबार ऐसा नहीं हो रहा। आलू की मंदी को देखकर भड़सारी कारोबारियों ने पूरी तरह से मुंह मोड़ लिया है। कोई भी कारेाबारी आलू खरीद के लिए खेतेां पर नहीं पहुंचा, जिसके  चलते पूरी फसल ही किसानों के हाथ है। किसान स्वयं अपने आलू का भंडारण शीतगृहों में कर रहे हैं। जिन किसानों की भंडारण शीत गृह में करने की नहीं वे अपना आलू मंडी में सस्ती कीमत पर बेचने को मजबूर हो गए हैं। शीतगृह संचालक मुकेश शर्मा का कहना है कि पहले व्यापारी किसानों से आलू खरीदकर भंडारण करते थे, लेकिन इस बार किसान स्वयं आलू रख रहे हैं।
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कैसे चुकेगा कर्ज
घोषगंज के किसान रामसनेही शाक्य का कहना है कि आलू की पैदावार तो अच्छी हुई है, लेकिन इस पैदावार का क्या फायदा जब कीमत ही नहीं मिल रही। उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि फसल के लिए बैंक और साहूकार से लिया कर्ज कैसे चुकता होगा।


लागत नहीं निकली
 नगला अबदाल के किसान यासीन का कहना है कि पट्टे पर जमीन लेकर उन्होंने आलू की खेती की थी, लेकिन उसे काफी नुकसान हो गया है। आलू की लागत भी नहीं निकली है। पट्टे की जमीन है ऐसे में वह काफी परेशान है।
 
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