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जांच की आंच में तत्कालीन डीआईओएस मलिक
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Sun, 08 Feb 2015 11:43 PM IST
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तत्कालीन डीआईओएस जितेंद्र कुमार मलिक के खिलाफ शासन ने जांच के आदेश दिए
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हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक से बिंदुवार जांच कर आख्या रिपोर्ट मांगी है।
आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा जिले के एक बीएड डिग्री कॉलेज के छात्रों से अवैध
वसूली और उत्पीड़न की शिकायत की गई थी। वर्तमान में डीआईओएस हाथरस जिले
में तैनात हैं।
कस्बा जैथरा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार ने पांच अगस्त 2014 को जिले के तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक जितेंद्र कुमार मलिक के विरुद्ध शासन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में 11 बिंदुओं का उल्लेख करते हुए इसकी जांच किसी सक्षम एजेंसी या उच्चाधिकारी से कराए जाने की मांग की थी।
शासन ने प्रकरण की जांच माध्यमिक शिक्षा निदेशक, उप्र लखनऊ को सौंप दी। शासन के अनुसचिव विजय कुमार ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को लिखे अपने पत्र में निर्देश दिए कि शिकायती पत्र में तथ्यों की जांच कर बिंदुवार आख्या शासन को शीघ्र उपलब्ध कराई जाए। शासन स्तर से संबंधित मामले को प्राथमिकता पर लेने के भी निर्देश दिए हैं।
ये है मामला
गत वर्ष 26-31 जुलाई को जिले की तहसील जलेसर क्षेत्र के एक बीएड डिग्री कॉलेज के छात्रों ने अवैध वसूली, उत्पीड़न की शिकायत तत्कालीन जिलाधिकारी लोकेश एम से की थी। डीएम ने डीआईओएस को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। आरोप था कि तत्कालीन डीआईओएस ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमुताबिक जांच कर प्राचार्य को क्लीन चिट दे दी, जबकि छात्र अवैध वसूली की शिकायत करते रहे। इसके बाद कुछ छात्रों ने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद, नई दिल्ली से की, इस पर डीएम से 15 दिन में जांच आख्या मांगी। इस पर फिर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक मलिक ने अधिकारियों को गुमराह किया और रिपोर्ट कई महीने बाद सौंपी। इन सभी तथ्यों को संकलित कर आरटीआई कार्यकर्ता ने शासन को भेजा था।
आरटीआई पर जागे अधिकारी
आरटीआई कार्यकर्ता ने पांच अगस्त 2014 को शासन से शिकायत की थी। करीब चार माह से अधिक समय तक शिकायती पत्र को अधिकारी दबाए रखे। इसके बाद 15 नवंबर को जब आवेदक ने आरटीआई के तहत अपने शिकायती पत्र के बारे में जानकारी मांगी, तो खलबली मच गई। इस पर शासन ने उक्त प्रकरण की जांच शिक्षा निदेशक माध्यमिक को सौंपी है।
कस्बा जैथरा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार ने पांच अगस्त 2014 को जिले के तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक जितेंद्र कुमार मलिक के विरुद्ध शासन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में 11 बिंदुओं का उल्लेख करते हुए इसकी जांच किसी सक्षम एजेंसी या उच्चाधिकारी से कराए जाने की मांग की थी।
शासन ने प्रकरण की जांच माध्यमिक शिक्षा निदेशक, उप्र लखनऊ को सौंप दी। शासन के अनुसचिव विजय कुमार ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को लिखे अपने पत्र में निर्देश दिए कि शिकायती पत्र में तथ्यों की जांच कर बिंदुवार आख्या शासन को शीघ्र उपलब्ध कराई जाए। शासन स्तर से संबंधित मामले को प्राथमिकता पर लेने के भी निर्देश दिए हैं।
ये है मामला
गत वर्ष 26-31 जुलाई को जिले की तहसील जलेसर क्षेत्र के एक बीएड डिग्री कॉलेज के छात्रों ने अवैध वसूली, उत्पीड़न की शिकायत तत्कालीन जिलाधिकारी लोकेश एम से की थी। डीएम ने डीआईओएस को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। आरोप था कि तत्कालीन डीआईओएस ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी मनमुताबिक जांच कर प्राचार्य को क्लीन चिट दे दी, जबकि छात्र अवैध वसूली की शिकायत करते रहे। इसके बाद कुछ छात्रों ने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद, नई दिल्ली से की, इस पर डीएम से 15 दिन में जांच आख्या मांगी। इस पर फिर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक मलिक ने अधिकारियों को गुमराह किया और रिपोर्ट कई महीने बाद सौंपी। इन सभी तथ्यों को संकलित कर आरटीआई कार्यकर्ता ने शासन को भेजा था।
आरटीआई पर जागे अधिकारी
आरटीआई कार्यकर्ता ने पांच अगस्त 2014 को शासन से शिकायत की थी। करीब चार माह से अधिक समय तक शिकायती पत्र को अधिकारी दबाए रखे। इसके बाद 15 नवंबर को जब आवेदक ने आरटीआई के तहत अपने शिकायती पत्र के बारे में जानकारी मांगी, तो खलबली मच गई। इस पर शासन ने उक्त प्रकरण की जांच शिक्षा निदेशक माध्यमिक को सौंपी है।