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घरौंदे के इंतजार में पथराईं 225 गरीब परिवारों आंखें
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Mon, 23 May 2016 10:18 PM IST
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एकीकृत मलिन बस्ती आवासीय योजना
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सात साल से घरौंदे का इंताजर कर रहे 225 गरीब परिवारों की आंखें पथरा गईं हैं। जबकि एकीकृत मलिन बस्ती आवासीय योजना के तहत डूडा ने वर्ष 2009-10 में एटा, अवागढ़ और निधौलीकलां में कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को निर्माण का ठेका दिया था। 236 लाख रुपये से अधिक कीमत के प्रोजेक्ट का निर्माण उसी साल शुरू हो गया, लेकिन अब तक गरीबों के आवास पूरे नहीं बन पाए हैं। जबकि सात साल में प्रोजेक्ट का बजट दोगुना हो गया है और कार्यदायी संस्था सीएनडीएस इसका भुगतान भी ले चुकी है।
डूडा परियोजना अधिकारी सुभाषवीर राजपूत ने बताया कि वर्ष 2009-10 में एकीकृत मलिन बस्ती आवासीय योजना के तहत एटा में 96 अवागढ़ 69 और निधौलीकलां में 60 आवासों के निर्माण का ठेका सीएनडीएस को दिया गया था। उस वक्त 225 आवासों की कीमत 236.04 लाख रुपये थी, जो कि अब बढ़कर 597.29 लाख रुपये हो चुकी है। पीओ की मानें तो प्रोजेक्ट की बढ़ी कीमत का पैसा शासन से मिलने के बाद निर्माण एजेंसी को दिया जा चुका है, लेकिन निर्माण एजेंसी कार्य पूरा करने को तैयार नहीं है, जिसके चलते जिले के 225 गरीब परिवार पिछले सात साल से छत मिलने का इंतजार कर रहे हैं। आरोप है कि जिन लोगों के नाम आवासाें का आवंटन हुआ है वे डूडा के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन सीएनडीएस के अधिकारी निर्माण कार्य पूरा करने को तैयार नहीं है। यही नहीं डूडा समेत जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी प्रकरण को लेकर कई बार पत्र भेज चुके हैं, लेकिन निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के कान पर जू नहीं रेंगे रही।
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खंडहर में तब्दील हो रहे आवास
एटा, अवागढ़, निधौली कलां में निर्माणाधीन एकीकृत मलिन बस्ती आवासीय योजना के अधूरे बने आवास खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं। आलम यह है कि आवासों से खिड़कियां और रोशनदान गायब हो चुके हैं। जबकि कई आवासों पर लोगो ने अनाधिकृत रूप से कब्जा कर वहां आवास बना लिया है। जबकि योजना के पात्र बिना छत के धक्के खाने को मजबूर हैं।
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मलिन बस्ती के लोगों को मिली थी प्राथमिकता
जिले मे जिन स्थानों पर एकीकृत महिला बस्ती आवासीय योजना का निर्माण हो रहा है। वहां पहले मलिन बस्तियां होने के कारण वहंा रहने वाले लोेगों को प्राथमिकता दी गई थी। निर्माण शुरू हुआ तो छत मिलने के इंतजार में लोगों ने भूमि खाली कर दी, लेकिन सात सात बाद भी निर्माण पूरा नहीं होने के कारण गरीब परिवारों को छत नसीब नहीं हुई है। इसके चलते परिवार भीषण गर्मी में खुले में जिंदगी बिताने को मजबूर हैं।
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डूडा परियोजना अधिकारी सुभाषवीर राजपूत ने बताया कि वर्ष 2009-10 में एकीकृत मलिन बस्ती आवासीय योजना के तहत एटा में 96 अवागढ़ 69 और निधौलीकलां में 60 आवासों के निर्माण का ठेका सीएनडीएस को दिया गया था। उस वक्त 225 आवासों की कीमत 236.04 लाख रुपये थी, जो कि अब बढ़कर 597.29 लाख रुपये हो चुकी है। पीओ की मानें तो प्रोजेक्ट की बढ़ी कीमत का पैसा शासन से मिलने के बाद निर्माण एजेंसी को दिया जा चुका है, लेकिन निर्माण एजेंसी कार्य पूरा करने को तैयार नहीं है, जिसके चलते जिले के 225 गरीब परिवार पिछले सात साल से छत मिलने का इंतजार कर रहे हैं। आरोप है कि जिन लोगों के नाम आवासाें का आवंटन हुआ है वे डूडा के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन सीएनडीएस के अधिकारी निर्माण कार्य पूरा करने को तैयार नहीं है। यही नहीं डूडा समेत जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी प्रकरण को लेकर कई बार पत्र भेज चुके हैं, लेकिन निर्माण एजेंसी के अधिकारियों के कान पर जू नहीं रेंगे रही।
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खंडहर में तब्दील हो रहे आवास
एटा, अवागढ़, निधौली कलां में निर्माणाधीन एकीकृत मलिन बस्ती आवासीय योजना के अधूरे बने आवास खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं। आलम यह है कि आवासों से खिड़कियां और रोशनदान गायब हो चुके हैं। जबकि कई आवासों पर लोगो ने अनाधिकृत रूप से कब्जा कर वहां आवास बना लिया है। जबकि योजना के पात्र बिना छत के धक्के खाने को मजबूर हैं।
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मलिन बस्ती के लोगों को मिली थी प्राथमिकता
जिले मे जिन स्थानों पर एकीकृत महिला बस्ती आवासीय योजना का निर्माण हो रहा है। वहां पहले मलिन बस्तियां होने के कारण वहंा रहने वाले लोेगों को प्राथमिकता दी गई थी। निर्माण शुरू हुआ तो छत मिलने के इंतजार में लोगों ने भूमि खाली कर दी, लेकिन सात सात बाद भी निर्माण पूरा नहीं होने के कारण गरीब परिवारों को छत नसीब नहीं हुई है। इसके चलते परिवार भीषण गर्मी में खुले में जिंदगी बिताने को मजबूर हैं।