{"_id":"57d8361c4f1c1b912cd48480","slug":"garmee-mein-ja-raha-parivaar-hua-maut-ka-shikaar","type":"story","status":"publish","title_hn":"गमी में जा रहा परिवार हुआ मौत का शिकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गमी में जा रहा परिवार हुआ मौत का शिकार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 13 Sep 2016 10:53 PM IST
विज्ञापन
रोडवेज बस हादसा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वह एक परिवार के दुख में शामिल होने जा रहे थे, लेकिन उनको क्या पता था कि उन पर ही दुखों का पहाड़ टूटेगा। ससुर के निधन के बाद सांत्वना देने ससुराल जा रहे दंपति और उनके बेटे को मौत बीच रास्ते में से ही ले गई।
मैनपुरी जिले के भोगांव स्थित गांव भिवानी नगर निवासी सुनील पुत्र सीताराम हरियाणा के करनाल में नौकरी करते थे। सोमवार को मैनपुरी स्थित ससुराल में उनके ससुर का देहांत हो गया था। इसलिए वह अपनी पत्नी नीरज और सबसे छोटे बेटे अमन के साथ करनाल से वापस भोगांव लौट रहे थे। यहां से उनको पत्नी को लेकर ससुराल में गम में शामिल होने जाना था, लेकिन हाईटेंशन तार ने उनकी जिंदगी छीन ली। हादसे से एक घंटे पहले ही सुनील ने घर पर फोन कर एटा आने की सूचना दी थी। परिवारीजन और सुनील का 12 वर्षीय बेटा गगन और 10 वर्षीय बेटी शिखा उनके आने का बेस्रबी से इंतजार कर रहे थे। तीनों के मरने की सूचना जैसे ही गांव में पहुंची, तो परिवार में कोहराम मच गया। बेटी शिखा की जिन आंखों में इंतजार था, वह आंखें आंसुआें से भरी हुई थीं। वहीं बेटे गगन के अरमान और उम्मीद सब खाक हो गईं। पिता सीतराम, मां राजबेटी और बड़े भाई संतोष के आंखें भी नम थी। हादसे में बेटे गगन और बेटी शिखा के सिर से माता-पिता का साया उठ गया। परिजन जिला अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। इसके बाद देर शाम शव लेकर भोगांव रवाना हो गए।
विज्ञापन
मैनपुरी जिले के भोगांव स्थित गांव भिवानी नगर निवासी सुनील पुत्र सीताराम हरियाणा के करनाल में नौकरी करते थे। सोमवार को मैनपुरी स्थित ससुराल में उनके ससुर का देहांत हो गया था। इसलिए वह अपनी पत्नी नीरज और सबसे छोटे बेटे अमन के साथ करनाल से वापस भोगांव लौट रहे थे। यहां से उनको पत्नी को लेकर ससुराल में गम में शामिल होने जाना था, लेकिन हाईटेंशन तार ने उनकी जिंदगी छीन ली। हादसे से एक घंटे पहले ही सुनील ने घर पर फोन कर एटा आने की सूचना दी थी। परिवारीजन और सुनील का 12 वर्षीय बेटा गगन और 10 वर्षीय बेटी शिखा उनके आने का बेस्रबी से इंतजार कर रहे थे। तीनों के मरने की सूचना जैसे ही गांव में पहुंची, तो परिवार में कोहराम मच गया। बेटी शिखा की जिन आंखों में इंतजार था, वह आंखें आंसुआें से भरी हुई थीं। वहीं बेटे गगन के अरमान और उम्मीद सब खाक हो गईं। पिता सीतराम, मां राजबेटी और बड़े भाई संतोष के आंखें भी नम थी। हादसे में बेटे गगन और बेटी शिखा के सिर से माता-पिता का साया उठ गया। परिजन जिला अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। इसके बाद देर शाम शव लेकर भोगांव रवाना हो गए।
विज्ञापन