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गंगाजली बनाकर सुकून पाते हैं मुस्लिम परिवार

Fri, 17 Feb 2017 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 17 Feb 2017 11:29 PM IST
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gangaajalee banaakar sukoon paate hain muslim parivaar
गंगाजली बनाते कारीगर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सोरों (कासगंज)। कांच की जिस गंगाजली में गंगाजल ले जाकर भोलेनाथ का जलाभिषेक किया जाता है, उस गंगाजली का निर्माण पीढ़ियों से कादरवाड़ी के कई मुस्लिम परिवार कर रहे हैं। गंगाजली का निर्माण करने से उन्हें भले ही पेट भरने की आमदनी नहीं हो पाती, फिर भी वह इस काम को नहीं छोड़ते। गंगाजली का निर्माण करके उन्हें सुकून मिलता है। यह सौहार्द की बड़ी मिसाल है।
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गंगाजली निर्माण का काम सीजनल होता है। दीपावली के बाद से यह काम शुरू हो जाता है और शिवरात्रि तथा सावन मास तक चलता है। इस समय कादरवाड़ी में तीन भट्ठियों पर मुस्लिम परिवार के लोग गंगाजली बनाने का काम कर रहे हैं। फिरोजाबाद से कांच यहां लाया जाता है। कांच को भट्ठियों पर तपाकर गंगाजली बनाई जाती है। 12 से 16 घंटे तक भट्टियों के आगे बैठकर यह कारीगर काम करते हैं। एक कारीगर इतनी कड़ी मशक्कत के बाद 300 गंगाजली प्रतिदिन बना पाता है और ढाई सौ रुपये तक की उसकी कमाई होती है। कादरवाड़ी में तैयार होने वाली गंगाजली सोरों के कांवड़ मेले के अलावा कछला, राजघाट अलीगढ़ तक के बाजार में जाती है। गंगाजली निर्माण का सीजन करने के बाद मुस्लिम परिवार के लोग या तो खेतों में मजदूरी करते हैं या फिर महानगरों में जाकर रिक्शा आदि चलाते हैं।
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- पचास वर्षीय कारीगर हनीफ का कहना है कि उसके परिवार में तीन पीढ़ियों से गंगाजली बनाई जा रही है। यह पुराना काम है। वह सुकून देने वाले इस काम से मुंह नहीं मोड़ना चाहता। उसने कहा कि उसके परिवार के लोग बाकी समय में दूसरों के खेत आलू खोदकर मजदूरी करते हैं।
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- युवा कारीगर जाबुदद्ीन का कहना है कि उसके परिवार में पांच पीढ़ियों से गंगाजली का काम किया जा रहा है। गंगाजली का सीजन करने के बाद वह दिल्ली रिक्शा चलाने चला जाता है।

- तीस वर्षीय कारीगर नूर मोहम्मद का कहना है कि गंगाजली निर्माण के कार्य से केवल गुजर बसर ही होती है। बाकी मजदूरी करके ही परिवार का भरण पोषण होता है।
- कारीगर इमरान ने कहा कि आज के समय में गंगाजली बनाना का कार्य काफी कठिन होता जा रहा है। रामघाट में भी लोग गंगाजली बनाते है। अच्छा मुनाफा नहीं हो पाता, जिससे परिवार के पोषण का संकट रहता है।
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