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Etah News: युवती ने मर्जी से की शादी, अदालत ने खारिज किया अपहरण का दावा
Mon, 19 May 2025 06:46 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 19 May 2025 06:46 PM IST
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एटा। एक युवती अपनी मर्जी से युवक के साथ चली गई और मंदिर में शादी कर ली। युवती की मां ने तीन लोगों के खिलाफ अपहरण का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने इसमें अंतिम आख्या लगा दी। मां ने अदालत में इसको चुनौती दी लेकिन अदालत ने भी उसका परिवाद खारिज कर दिया।
जैथरा थाने में राधा निवासी मोहल्ला गांधी नगर ने आकाश उर्फ नंदू, अभिषेक और मुन्ना के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप था कि 21 जनवरी 2020 को आरोपी घर में घुस आए। एक ने मुंह बंद कर दिया और दूसरे ने कनपटी पर तमंचा रखा। इसके बाद पुत्री मेघा को जबरन ले गए। जातिसूचक गालियां देने और पिटाई करने का भी आरोप लगाया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। 2 मार्च 2020 को युवती को ढूंढ़ लिया। उसने बताया कि वह स्वेच्छा से आकाश के साथ प्रयागराज गई। वहां आर्य समाज मंदिर में दोनों ने विवाह किया है। मां ने झूठा मुकदमा दर्ज कराया है।
इस आधार पर पुलिस ने 18 मार्च 2020 को अंतिम रिपोर्ट लगा दी। इसके विरोध में राधा ने अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया। आरोपियों को न पकड़ने और पुत्री से झूठा कथन दिलवाने का आरोप पुलिस पर लगाया। पुत्री का विवाह प्रमाणपत्र फर्जी होने का दावा किया। जिस तारीख में शादी बताई गई, उस तारीख का अलीगढ़ के अस्पताल का पर्चा दाखिल किया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट अशोक कुमार ने माना कि अपराध के लिए पर्याप्त आधार नहीं है और परिवाद खारिज कर दिया।
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जैथरा थाने में राधा निवासी मोहल्ला गांधी नगर ने आकाश उर्फ नंदू, अभिषेक और मुन्ना के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। आरोप था कि 21 जनवरी 2020 को आरोपी घर में घुस आए। एक ने मुंह बंद कर दिया और दूसरे ने कनपटी पर तमंचा रखा। इसके बाद पुत्री मेघा को जबरन ले गए। जातिसूचक गालियां देने और पिटाई करने का भी आरोप लगाया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। 2 मार्च 2020 को युवती को ढूंढ़ लिया। उसने बताया कि वह स्वेच्छा से आकाश के साथ प्रयागराज गई। वहां आर्य समाज मंदिर में दोनों ने विवाह किया है। मां ने झूठा मुकदमा दर्ज कराया है।
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इस आधार पर पुलिस ने 18 मार्च 2020 को अंतिम रिपोर्ट लगा दी। इसके विरोध में राधा ने अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया। आरोपियों को न पकड़ने और पुत्री से झूठा कथन दिलवाने का आरोप पुलिस पर लगाया। पुत्री का विवाह प्रमाणपत्र फर्जी होने का दावा किया। जिस तारीख में शादी बताई गई, उस तारीख का अलीगढ़ के अस्पताल का पर्चा दाखिल किया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट अशोक कुमार ने माना कि अपराध के लिए पर्याप्त आधार नहीं है और परिवाद खारिज कर दिया।
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