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20 लाख लेकर फर्जी समिति चंपत
ब्यूूराे, अमर उजाला एटा
Updated Sat, 10 Jan 2015 11:55 PM IST
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एटा। रकम दुगनी करने का लालच देकर एक फर्जी कंपनी ग्राहकों को फंसाकर किश्त जमा कराती रही, बाद में 20 लाख रुपये लेकर चंपत हो गई। मामले की जानकारी हुई तो पीड़ितों के पैरों तले जमीन खिसक गई। संजय नगर निवासी पून कुलश्रेष्ठ ने कोर्ट के आदेश से मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
पूनम कुलश्रेष्ठ ने बताया है कि वर्ष 2008 में आरोपी गुरुवचन सिंह निवासी मोहम्मदपुर खालसा टेंट हाउस कंपाउंड पश्चिमपुरी थाना सिकंदरा आगरा ने भगवान सिंह सहित दो अन्य आरोपियों के साथ मिलकर गुरुनानक सेवा समिति का कार्यालय सिविल लाइन के पास खोला था। बताया कि जीवन बीमा निगम से संबद्ध हैं। पांच साल में दोगुनी रकम देने की बात कही। कागज देखकर वह झांसे में आ गईं। पांच प्रतिशत कमीशन पर वह, रीना मिश्र, जितेंद्र, पंकज वार्ष्णेय, रमादेवी आदि ने एजेंट बनाकर लाखों रुपये जमा कर रसीद प्राप्त कर ली।
बताया कि 2011 में 6.66 लाख, 2012 में 6.57 लाख, 2013 में दो लाख की रसीद प्राप्त की। पूछने पर आरोपी ने बताया कि यह रुपया जीवन बीमा निगम में जमा करा दिया। इस तरह से कुल मिलाकर समिति पर 20 लाख रुपये जमा करा दिए। पांच साल बाद जब रुपये लेने पहुंचे तो कार्यालय बंद मिला। जीवन बीमा निगम कार्यालय में पूछताछ करने के बाद पता चला कि ऐसी कोई समिति ही नहीं है।
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पीड़ित ने बाद में आगरा जाकर पूछताछ की तो वहां भी आरोपियों का पता नहीं चल सका। पीड़िता ने बताया कि आरोपी धोखाधड़ी कर रुपये ले गए हैं। नगर प्रभारी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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पूनम कुलश्रेष्ठ ने बताया है कि वर्ष 2008 में आरोपी गुरुवचन सिंह निवासी मोहम्मदपुर खालसा टेंट हाउस कंपाउंड पश्चिमपुरी थाना सिकंदरा आगरा ने भगवान सिंह सहित दो अन्य आरोपियों के साथ मिलकर गुरुनानक सेवा समिति का कार्यालय सिविल लाइन के पास खोला था। बताया कि जीवन बीमा निगम से संबद्ध हैं। पांच साल में दोगुनी रकम देने की बात कही। कागज देखकर वह झांसे में आ गईं। पांच प्रतिशत कमीशन पर वह, रीना मिश्र, जितेंद्र, पंकज वार्ष्णेय, रमादेवी आदि ने एजेंट बनाकर लाखों रुपये जमा कर रसीद प्राप्त कर ली।
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बताया कि 2011 में 6.66 लाख, 2012 में 6.57 लाख, 2013 में दो लाख की रसीद प्राप्त की। पूछने पर आरोपी ने बताया कि यह रुपया जीवन बीमा निगम में जमा करा दिया। इस तरह से कुल मिलाकर समिति पर 20 लाख रुपये जमा करा दिए। पांच साल बाद जब रुपये लेने पहुंचे तो कार्यालय बंद मिला। जीवन बीमा निगम कार्यालय में पूछताछ करने के बाद पता चला कि ऐसी कोई समिति ही नहीं है।
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पीड़ित ने बाद में आगरा जाकर पूछताछ की तो वहां भी आरोपियों का पता नहीं चल सका। पीड़िता ने बताया कि आरोपी धोखाधड़ी कर रुपये ले गए हैं। नगर प्रभारी ने बताया कि मामले की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। आरोपियों की तलाश की जा रही है।