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औपचारिक घोषणा आज, जिले को मिलेगा पांचवां विधायक
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एटा। सदस्य विधान परिषद (एमएलसी) स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र चुनाव कार्यक्रम के तहत 24 मार्च को नाम वापसी की प्रक्रिया तय है। हालांकि दो पदों पर भाजपा के ही दो प्रत्याशी ही बचे हैं। बृहस्पतिवार को निर्धारित समय के बाद औपचारिक रूप से विजेताओं की घोषणा कर उन्हें प्रमाण पत्र दे दिए जाएंगे। इसके साथ ही जिले को पांचवां विधायक मिल जाएगा।
दो सदस्य पदों वाली मथुरा-एटा-मैनपुरी सीट पर 2016 में हुए चुनाव में सपा के अरविंद यादव और उदयवीर सिंह निर्विरोध रूप से चुनाव जीते थे। हालांकि ये दोनों ही एमएलसी अन्य जनपदों के थे। इस बार चुनाव में पांच प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र जमा किए। इनमें से भाजपा से पूर्व विधायक आशीष यादव और सुभासपा से अनुज कुमार एटा के हैं। जबकि भाजपा के ओमप्रकाश सिंह, सपा के उदयवीर सिंह और राकेश यादव बाहरी जिलों के हैं। सपा व सुभासपा के प्रत्याशियों के नामांकन पत्र निरस्त होने के बाद अब भाजपा के दोनों ही प्रत्याशियों का चुना जाना तय हो गया है। हाल ही में हुए विस चुनाव में एटा की चारों विस पर चारों ही विधायक भाजपा के चुने जा चुके हैं। ये चारों ही एटा के स्थानीय निवासी हैं। अब विप सदस्य के रूप में एक और स्थानीय निवासी आशीष यादव बढ़ गए हैं।
सत्ता के साथ बहती रही एमएलसी चुनाव की हवा
जिले में एमएलसी स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र चुनाव की हवा दो दशक से सत्ता के साथ बहती रही है। बसपा फिर सपा और अब भाजपा की सरकार में हुए चुनाव में भले ही चुनाव का प्रकार अलग-अलग रहा, लेकिन परिणाम सत्ताधारी दल के प्रत्याशियों के पक्ष में रहे। 2010 में बसपा की सरकार के समय चुनाव हुआ था। उस समय बसपा प्रत्याशी चंद्रप्रताप सिंह यादव और लेखराज का मुख्य मुकाबला सपा प्रत्याशी अवधेश कुमार और राजेंद्र सिंह से था। हालांकि सत्ता के प्रभाव से बसपा प्रत्याशियों ने बड़े अंतर से जीत हासिल की। इसके बाद 2016 में मतदान कराने की नौबत ही नहीं आई। सपा की सरकार के प्रभाव के चलते अन्य प्रत्याशियों के नामांकन नहीं हुए। ऐसे में सपा के अरविंद प्रताप और उदयवीर सिंह निर्विरोध जीत गए। उसी राह पर इस बार भाजपा की सत्ता का असर दिखा है। दोनों भाजपा प्रत्याशी एमएलसी बनने की राह पर बढ़ गए हैं।
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दो सदस्य पदों वाली मथुरा-एटा-मैनपुरी सीट पर 2016 में हुए चुनाव में सपा के अरविंद यादव और उदयवीर सिंह निर्विरोध रूप से चुनाव जीते थे। हालांकि ये दोनों ही एमएलसी अन्य जनपदों के थे। इस बार चुनाव में पांच प्रत्याशियों ने नामांकन पत्र जमा किए। इनमें से भाजपा से पूर्व विधायक आशीष यादव और सुभासपा से अनुज कुमार एटा के हैं। जबकि भाजपा के ओमप्रकाश सिंह, सपा के उदयवीर सिंह और राकेश यादव बाहरी जिलों के हैं। सपा व सुभासपा के प्रत्याशियों के नामांकन पत्र निरस्त होने के बाद अब भाजपा के दोनों ही प्रत्याशियों का चुना जाना तय हो गया है। हाल ही में हुए विस चुनाव में एटा की चारों विस पर चारों ही विधायक भाजपा के चुने जा चुके हैं। ये चारों ही एटा के स्थानीय निवासी हैं। अब विप सदस्य के रूप में एक और स्थानीय निवासी आशीष यादव बढ़ गए हैं।
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सत्ता के साथ बहती रही एमएलसी चुनाव की हवा
जिले में एमएलसी स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र चुनाव की हवा दो दशक से सत्ता के साथ बहती रही है। बसपा फिर सपा और अब भाजपा की सरकार में हुए चुनाव में भले ही चुनाव का प्रकार अलग-अलग रहा, लेकिन परिणाम सत्ताधारी दल के प्रत्याशियों के पक्ष में रहे। 2010 में बसपा की सरकार के समय चुनाव हुआ था। उस समय बसपा प्रत्याशी चंद्रप्रताप सिंह यादव और लेखराज का मुख्य मुकाबला सपा प्रत्याशी अवधेश कुमार और राजेंद्र सिंह से था। हालांकि सत्ता के प्रभाव से बसपा प्रत्याशियों ने बड़े अंतर से जीत हासिल की। इसके बाद 2016 में मतदान कराने की नौबत ही नहीं आई। सपा की सरकार के प्रभाव के चलते अन्य प्रत्याशियों के नामांकन नहीं हुए। ऐसे में सपा के अरविंद प्रताप और उदयवीर सिंह निर्विरोध जीत गए। उसी राह पर इस बार भाजपा की सत्ता का असर दिखा है। दोनों भाजपा प्रत्याशी एमएलसी बनने की राह पर बढ़ गए हैं।
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