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एटा: निराश्रित गोवंशों के बढ़ रहे कुनबा पर रोक लगाने की बनाई रणनीति
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एटा। गोशालाओं में निराश्रित गोवंश को आश्रय दिया गया है। यहां पर वर्तमान में नर और मादा एक साथ ही रह रहे हैं, इसकी वजह से गोवंश के कुनबा में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।
इनका कुनबा बढ़ने पर रोक लगाने के लिए पशुधन एवं चिकित्सा विभाग द्वारा नर-मादाओं को अलग-अलग रखने की व्यवस्था पहली बार की जा रही है, ताकि बढ़ते परिवार को रोका जा सके।
तहसील स्तर पर वृहद गोशालाओं का निर्माण कराया गया और इनमें हजारों गोवंश को आश्रय दिया गया है। नर और मादा गोवंश के एक साथ रहने की वजह से गायें गर्भवती हो जाती हैं और गोवंश की संख्या में कमी नहीं आ पा रही है।
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आलम यह है कि हर वर्ष करीब 20 फीसदी गोवंश बढ़ जाते हैं। गायों को नर गोवंश के संपर्क से दूर रखने की योजना बनाई गई है ताकि लगातार बढ़ रहे कुनबा को रोका जा सके। वृहद गोशालाओं में रह रहे गोवंश को अलग-अलग रखने की व्यवस्थाएं पहली बार होने जा रही है।
जब नर-मादा अलग रहेंगे तो गायों के गर्भवती होने की संभावनाएं खत्म हो जाएगी और लगातार हो रही बढ़ोत्तरी पर अंकुश लग सकेगा। सरकार गोशालाओं में रह रहे निराश्रित गोवंश के लिए तमाम व्यवस्थाएं जुटाने में लगी हुई है, इसके बाद भी गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं। ऐसी तमाम अव्यवस्थाओं को भी सुधारा जा सकेगा।
आंकड़ों पर एक नजर..
वृहद गोशालाओं में - 489
अस्थाई गोशाला में- 1317
कान्हा आश्रय स्थलों में- 312
निजी गोशालाओं में- 1316
सुपुर्दगी में दिए गए गोवंश- 1456
कुल संरक्षित गोवंश- 4890
तहसील स्तर पर बनी वृहद गोशालाओं में आश्रयरत गोवंश में से नर-मादा को अलग-अलग रखने की व्यवस्था होने जा रही है। इससे गोवंश के कुनबा को रोकने में मदद मिलेगी। वर्तमान में गायों के साथ सांड़ (नंदी) भी रह रहे हैं, जिसकी वजह से गायें गर्भवती हो जाती हैं और परिवार लगातार बढ़ रहा है। हर वर्ष करीब 20 फीसदी से अधिक गोवंश बढ़ जाते हैं, इस पर पाबंदी लग सकेगी।
-अनिल कुमार मित्तल, प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी
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इनका कुनबा बढ़ने पर रोक लगाने के लिए पशुधन एवं चिकित्सा विभाग द्वारा नर-मादाओं को अलग-अलग रखने की व्यवस्था पहली बार की जा रही है, ताकि बढ़ते परिवार को रोका जा सके।
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तहसील स्तर पर वृहद गोशालाओं का निर्माण कराया गया और इनमें हजारों गोवंश को आश्रय दिया गया है। नर और मादा गोवंश के एक साथ रहने की वजह से गायें गर्भवती हो जाती हैं और गोवंश की संख्या में कमी नहीं आ पा रही है।
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आलम यह है कि हर वर्ष करीब 20 फीसदी गोवंश बढ़ जाते हैं। गायों को नर गोवंश के संपर्क से दूर रखने की योजना बनाई गई है ताकि लगातार बढ़ रहे कुनबा को रोका जा सके। वृहद गोशालाओं में रह रहे गोवंश को अलग-अलग रखने की व्यवस्थाएं पहली बार होने जा रही है।
जब नर-मादा अलग रहेंगे तो गायों के गर्भवती होने की संभावनाएं खत्म हो जाएगी और लगातार हो रही बढ़ोत्तरी पर अंकुश लग सकेगा। सरकार गोशालाओं में रह रहे निराश्रित गोवंश के लिए तमाम व्यवस्थाएं जुटाने में लगी हुई है, इसके बाद भी गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं। ऐसी तमाम अव्यवस्थाओं को भी सुधारा जा सकेगा।
आंकड़ों पर एक नजर..
वृहद गोशालाओं में - 489
अस्थाई गोशाला में- 1317
कान्हा आश्रय स्थलों में- 312
निजी गोशालाओं में- 1316
सुपुर्दगी में दिए गए गोवंश- 1456
कुल संरक्षित गोवंश- 4890
तहसील स्तर पर बनी वृहद गोशालाओं में आश्रयरत गोवंश में से नर-मादा को अलग-अलग रखने की व्यवस्था होने जा रही है। इससे गोवंश के कुनबा को रोकने में मदद मिलेगी। वर्तमान में गायों के साथ सांड़ (नंदी) भी रह रहे हैं, जिसकी वजह से गायें गर्भवती हो जाती हैं और परिवार लगातार बढ़ रहा है। हर वर्ष करीब 20 फीसदी से अधिक गोवंश बढ़ जाते हैं, इस पर पाबंदी लग सकेगी।
-अनिल कुमार मित्तल, प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी