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लक्ष्मी के स्वागत को सजे घर द्वार
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Tue, 10 Nov 2015 09:54 PM IST
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धन की देवी माता लक्ष्मी गुरुवार को घर-घर दस्तक देंगी। लोगों ने मां के स्वागत सत्कार की तैयारियां पूरी कर ली हैं। भवनों, प्रतिष्ठानों की सजावट का काम चल रहा है। तो मिठाई और लजीज व्यंजन भी घर-घर बने।
दीपावली पर पूरे घर को रोशनी से सजाया जाएगा। लोगों ने अपने घर, दुकानों के बाहर घर प्रतिष्ठान की सजावट पूरी कर ली है। बाजारों में पूजा सामग्री, पटाखे और अन्य सामान की खरीदारी चल रही है। पूरा शहर रोशनी में नहाया नजर आ रहा है।
भगवान विष्णु के साथ करें लक्ष्मी पूजन
पंडित ओमप्रकाश शर्मा का कहना है कि भगवान विष्णु के चरण दबाती मां लक्ष्मी के चित्र या मूर्ति का पूजन करना चाहिए। उनके साथ में वो गरुण की सवारी करती है। गरुण प्रकाश का प्रतीक है। अकेले में वो उल्लू की सवारी करती हैं। जबकि उल्लू अंधकार का प्रतीक। प्रकाश में उल्लू को दिखाई नहीं देता। दीपोत्सव प्रकाश का पर्व है।
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कीमतों में गिरावट से खिले चेहरे
दीपवली पर्व के मौके पर कीमतों की गिरावट ने लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला दी। लोगों ने बाजार से जमकर सामान की खरीदारी की।
खील, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां पिछले साल से सस्ती मिल रही हैं। इस बार कारोबारी भी खुश हैं। पिछले साल खिलौने 60 रुपये किलो बिके जो इस बार 50 रुपये किलो पर बिक रहे हैं। खील भी पिछले साल से आधी कीमतों पर बिक रही है। मात्र 50 रपये किलो में ही बाजार में इसकी बिक्री हो रही है। मोमबत्ती के दाम में भी 50 रुपये किलो की गिरावट है। 100 रुपये किलो के हिसाब से इसकी बिक्री हो रही है। कीमत अधिक न होने से लोग इनकी जमकर खरीदारी करते देखे गए। कारोबारी अनिल माहेश्वरी ने बताया कि इस साल चीनी की कीमतों में गिरावट के चलते खांड के खिलौने सस्ते हैं।
चाइनीज झालर और लेजर लाइट पर रुकी नजर
चाइनीज झालरों के बढ़ते प्रचलन ने देशी बल्बों की मालाओं को बाजार से आउट ही कर दिया है। इनके आकर्षण के चलते लोगों की नजर इन पर ठहर जाती है। तो लेजर लाइट भी लोगों को काफी पसंद आ रही हैं। इनकी कीमत एक से डेढ़ हजार तक है। चाइनीज आइटम की कई वैरायटी बाजार में आ चुकी हैं। इनकी कीमत अधिक नहीं है। पिछले पांच सालों में यह कारोबार बढ़कर चार से पांच गुना हो चुका है। बाजार में चाइनीज मालाएं 25-700 रुपये तक की कीमत की हैं। जिनमें एलईडी, पाइप, स्नेक, रेम्बो, राइस, क्रिस्टल, म्यूजिकल आदि हैं। इन मालाओं की भी लोगों ने दीपावली को लेकर अच्छी खासी खरीदारी की है। झालर विक्रेता भरत माहेेश्श्वरी ने बताया कि उनके पास हर वर्ग के लोगों के लिए झालर मौजूद हैं।
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दीपावली पर पूरे घर को रोशनी से सजाया जाएगा। लोगों ने अपने घर, दुकानों के बाहर घर प्रतिष्ठान की सजावट पूरी कर ली है। बाजारों में पूजा सामग्री, पटाखे और अन्य सामान की खरीदारी चल रही है। पूरा शहर रोशनी में नहाया नजर आ रहा है।
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भगवान विष्णु के साथ करें लक्ष्मी पूजन
पंडित ओमप्रकाश शर्मा का कहना है कि भगवान विष्णु के चरण दबाती मां लक्ष्मी के चित्र या मूर्ति का पूजन करना चाहिए। उनके साथ में वो गरुण की सवारी करती है। गरुण प्रकाश का प्रतीक है। अकेले में वो उल्लू की सवारी करती हैं। जबकि उल्लू अंधकार का प्रतीक। प्रकाश में उल्लू को दिखाई नहीं देता। दीपोत्सव प्रकाश का पर्व है।
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कीमतों में गिरावट से खिले चेहरे
दीपवली पर्व के मौके पर कीमतों की गिरावट ने लोगों के चेहरों पर मुस्कान ला दी। लोगों ने बाजार से जमकर सामान की खरीदारी की।
खील, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां पिछले साल से सस्ती मिल रही हैं। इस बार कारोबारी भी खुश हैं। पिछले साल खिलौने 60 रुपये किलो बिके जो इस बार 50 रुपये किलो पर बिक रहे हैं। खील भी पिछले साल से आधी कीमतों पर बिक रही है। मात्र 50 रपये किलो में ही बाजार में इसकी बिक्री हो रही है। मोमबत्ती के दाम में भी 50 रुपये किलो की गिरावट है। 100 रुपये किलो के हिसाब से इसकी बिक्री हो रही है। कीमत अधिक न होने से लोग इनकी जमकर खरीदारी करते देखे गए। कारोबारी अनिल माहेश्वरी ने बताया कि इस साल चीनी की कीमतों में गिरावट के चलते खांड के खिलौने सस्ते हैं।
चाइनीज झालर और लेजर लाइट पर रुकी नजर
चाइनीज झालरों के बढ़ते प्रचलन ने देशी बल्बों की मालाओं को बाजार से आउट ही कर दिया है। इनके आकर्षण के चलते लोगों की नजर इन पर ठहर जाती है। तो लेजर लाइट भी लोगों को काफी पसंद आ रही हैं। इनकी कीमत एक से डेढ़ हजार तक है। चाइनीज आइटम की कई वैरायटी बाजार में आ चुकी हैं। इनकी कीमत अधिक नहीं है। पिछले पांच सालों में यह कारोबार बढ़कर चार से पांच गुना हो चुका है। बाजार में चाइनीज मालाएं 25-700 रुपये तक की कीमत की हैं। जिनमें एलईडी, पाइप, स्नेक, रेम्बो, राइस, क्रिस्टल, म्यूजिकल आदि हैं। इन मालाओं की भी लोगों ने दीपावली को लेकर अच्छी खासी खरीदारी की है। झालर विक्रेता भरत माहेेश्श्वरी ने बताया कि उनके पास हर वर्ग के लोगों के लिए झालर मौजूद हैं।