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पटाखों के धुएं और शोर से जिले में जमकर प्रदूषण, 20 फीसदी इजाफा
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मोहल्ला पटियाली गेट स्थित आवास पर आतिस बाजी चलाते हुए युवा और बच्चे- अमर उजाला
- फोटो : ETAH
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एटा। खुशियों की दीपावली पर्यावरण में जहर घोल गई। पटाखों के धुएं और शोर से जिले में जमकर प्रदूषण हुआ। जिले में सोमवार को प्रदूषण में 20 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया। हालांकि प्रदूषण के आंकड़े महानगरों के मुकाबले कम हैं, लेकिन जिले के लिहाज से प्रदूषण की स्थिति खतरनाक है। दीपावली पर जिलेभर में 15 करोड़ रुपये के पटाखे जल गए।
धुआं, धूम-धड़ाके ने रविवार को धड़कनों में इजाफा कर दिया। एक ओर जहां प्रदूषण की मात्रा में इजाफा हुआ। वहीं दूसरी ओर कानफोड़ू शोर ने लोगों को परेशान किया। दीपावली त्योहार पर हर साल प्रदूषण कई गुना तक बढ़ जाता है। इस बार प्रदूषण में 20 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया। ध्वनि प्रदूषण 95 डेसिबल से बढ़कर 150 डेसिबल तक पहुंच गया। वहीं वायु प्रदूषण में संस्पेंडेड पार्टीकल्स और मैटर की मात्रा में भी बढ़ोतरी हुई। यह मात्रा 95 से बढ़कर 130 तक पहुंच गई। हालांकि बड़े महानगरों के मुकाबले आंकड़े बेहद कम हैं, लेकिन बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए हानिकारक हालात पैदा कर रहे हैं। मानकों के मुताबिक सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड के अलावा संस्पेडेड पार्टीकल्स ऑफ मैटर की मात्रा मानक के अनुरूप 120 माइक्रोग्राम होनी चाहिए। वहीं वायु गुणवत्ता सूचकांक 145 के स्तर पर पहुंच गया। जोकि सांस रोगियों के अनुकूल नहीं माना जाता।
ये हैं आंकड़े
ध्वनि प्रदूषण
दीपावली से पहले
85 से 95 डेसिबल
दीपावली के बाद
120 से 150 डेसिबल
मानक- 100 डेसिबल तक
वायु प्रदूषण (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
दीपावली से पहले
पीएम एसओ एनओ
60 20 39
दीपावली के बाद
पीएम एसओ एनओ
75 21.7 41.9
मानक
पीएम एसओ एनओ
65 20 35
बढ़ा बीमारियों का खतरा
पर्यावरण में प्रदूषण बढने से बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। डा. पवन मिश्रा कहते हैं कि बढ़ते प्रदूषण से अस्थमा, दमा और ब्रेन हेमरेज के मरीज बढ़ रहे हैं। वहीं धुएं से आंखों में एलर्जी के मामले बढ़े हैं। लोगों को इनसे बचने की जरूरत है।
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रात में बढ़ा एक्यूआई
रविवार रात को वायु गुणवत्ता सूचकांक ने रिकार्ड तोड़ दिया। रात को 11:30 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 350 का आंकड़ा पार कर गया। रात एक बजे 290 तक आ सका। सोमवार दोपहर को स्थिति कुछ सामान्य हुई। एक्यूआई बढ़ने से वातावरण में धुंध छा गई।
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धुआं, धूम-धड़ाके ने रविवार को धड़कनों में इजाफा कर दिया। एक ओर जहां प्रदूषण की मात्रा में इजाफा हुआ। वहीं दूसरी ओर कानफोड़ू शोर ने लोगों को परेशान किया। दीपावली त्योहार पर हर साल प्रदूषण कई गुना तक बढ़ जाता है। इस बार प्रदूषण में 20 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया। ध्वनि प्रदूषण 95 डेसिबल से बढ़कर 150 डेसिबल तक पहुंच गया। वहीं वायु प्रदूषण में संस्पेंडेड पार्टीकल्स और मैटर की मात्रा में भी बढ़ोतरी हुई। यह मात्रा 95 से बढ़कर 130 तक पहुंच गई। हालांकि बड़े महानगरों के मुकाबले आंकड़े बेहद कम हैं, लेकिन बढ़ता प्रदूषण सेहत के लिए हानिकारक हालात पैदा कर रहे हैं। मानकों के मुताबिक सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड के अलावा संस्पेडेड पार्टीकल्स ऑफ मैटर की मात्रा मानक के अनुरूप 120 माइक्रोग्राम होनी चाहिए। वहीं वायु गुणवत्ता सूचकांक 145 के स्तर पर पहुंच गया। जोकि सांस रोगियों के अनुकूल नहीं माना जाता।
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ये हैं आंकड़े
ध्वनि प्रदूषण
दीपावली से पहले
85 से 95 डेसिबल
दीपावली के बाद
120 से 150 डेसिबल
मानक- 100 डेसिबल तक
वायु प्रदूषण (माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर)
दीपावली से पहले
पीएम एसओ एनओ
60 20 39
दीपावली के बाद
पीएम एसओ एनओ
75 21.7 41.9
मानक
पीएम एसओ एनओ
65 20 35
बढ़ा बीमारियों का खतरा
पर्यावरण में प्रदूषण बढने से बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। डा. पवन मिश्रा कहते हैं कि बढ़ते प्रदूषण से अस्थमा, दमा और ब्रेन हेमरेज के मरीज बढ़ रहे हैं। वहीं धुएं से आंखों में एलर्जी के मामले बढ़े हैं। लोगों को इनसे बचने की जरूरत है।
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रात में बढ़ा एक्यूआई
रविवार रात को वायु गुणवत्ता सूचकांक ने रिकार्ड तोड़ दिया। रात को 11:30 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 350 का आंकड़ा पार कर गया। रात एक बजे 290 तक आ सका। सोमवार दोपहर को स्थिति कुछ सामान्य हुई। एक्यूआई बढ़ने से वातावरण में धुंध छा गई।