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Etah News: जान का खतरा बनकर खड़ीं हैं जर्जा टंकियां
Mon, 01 Jul 2024 11:53 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 01 Jul 2024 11:53 PM IST
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एटा। शहर के अंदर आबादी क्षेत्रों में दो निष्प्रयोज्य पुरानी पानी की टंकियां मौत बनकर खड़ी हैं, जो बुरी तरह जर्जर हैं। मथुरा में हादसा होने के बाद से लोगों में हादसे का डर बढ़ गया है। शहर के मेहता पार्क और कचहरी स्थित जलकल कार्यालय में बनी टंकियां जर्जर होने के कारण उपयोग में नहीं ली जा रहीं हैं, लेकिन आज तक इनका निस्तारण नहीं कराया गया है।
मेहता पार्क के पास खड़ी टंकी करीब 10 साल से उपयोग में नहीं ली जा रहीं हैं। टंकी की समय सीमा पूर्ण होने के साथ ही टपकने लगी थी। इसके बाद नगर पालिका की ओर से इसे परित्यक्त कर दिया गया। इसके पास ही दूसरी टंकी का निर्माण कराकर इस क्षेत्र के घरों को पानी की सप्लाई दी जाने लगी। लेकिन इतना समय बीतने के बाद भी पुरानी टंकी का निस्तारण नहीं कराया गया। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होने से आसपास निवास करने वालों में डर व दहशत का माहौल है।
वहीं कचहरी स्थित जलकल कार्यालय में बनी पानी की टंकी काफी समय से बंद पड़ी है, यह जर्जर भी हो चुकी है। लेकिन अब तक ध्वस्तीकरण नहीं कराया गया है। पालिकाध्यक्ष सुधा गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में शहर में ऐसी कोई टंकी नजर नहीं आ रही है जो हादसे का कारण बने। फिर भी मथुरा हादसे को लेकर नगर क्षेत्र में जर्जर व क्षतिग्रस्त टंकियों को चिह्नित कराने का काम किया जाएगा और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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मेहता पार्क के पास खड़ी टंकी करीब 10 साल से उपयोग में नहीं ली जा रहीं हैं। टंकी की समय सीमा पूर्ण होने के साथ ही टपकने लगी थी। इसके बाद नगर पालिका की ओर से इसे परित्यक्त कर दिया गया। इसके पास ही दूसरी टंकी का निर्माण कराकर इस क्षेत्र के घरों को पानी की सप्लाई दी जाने लगी। लेकिन इतना समय बीतने के बाद भी पुरानी टंकी का निस्तारण नहीं कराया गया। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होने से आसपास निवास करने वालों में डर व दहशत का माहौल है।
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वहीं कचहरी स्थित जलकल कार्यालय में बनी पानी की टंकी काफी समय से बंद पड़ी है, यह जर्जर भी हो चुकी है। लेकिन अब तक ध्वस्तीकरण नहीं कराया गया है। पालिकाध्यक्ष सुधा गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में शहर में ऐसी कोई टंकी नजर नहीं आ रही है जो हादसे का कारण बने। फिर भी मथुरा हादसे को लेकर नगर क्षेत्र में जर्जर व क्षतिग्रस्त टंकियों को चिह्नित कराने का काम किया जाएगा और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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