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Etah News: भेदभावपूर्ण व्यवहार को खत्म करने की मांग
Thu, 08 Feb 2024 11:33 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Thu, 08 Feb 2024 11:33 PM IST
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एटा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के आह्वान पर देशव्यापी प्रदर्शन किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य केंद्र सरकार की ओर से केरल व अन्य विपक्ष शासित राज्यों के प्रति अपनाए जा रहे भेदभावपूर्ण व्यवहार को खत्म करना है। इसी संबंध में केरल की वाम लोकतांत्रिक सरकार के साथ एकजुटता दिखाते हुए कुछ मांगों के साथ राष्ट्रपति के नाम डीएम को ज्ञापन सौंपा गया।
कार्यकर्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार केरल सहित अन्य राज्यों को उनके करो और संसाधनों के तय हिस्से से वंचित करना बंद करें। राज्य सरकारों के उधार लेने की सीमा तय करने पर रोक लगनी चाहिए। राज्य सूची के विषय में हस्तक्षेप करने के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं का उपयोग करना बंद करे। केंद्र सरकार विपक्ष की राज्य सरकार के नेताओं को निशाना बनाने व परेशान करने के लिए ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग का दुरुपयोग करना बंद करे।
राज्य सरकार के मामले में हस्तक्षेप करने के लिए राज्यपाल को अपनी संवैधानिक स्थिति का दुरुपयोग करना बंद करना चाहिए। साथ ही राज्यपाल को कुलपति के पद का दुरुपयोग कर राज्य विश्वविद्यालयों के संचालन में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही राज्यपालों को राज्य विधानसभा की ओर से पारित कानून को दबाकर बैठने की बजाय बिना देरी किए मंजूरी देनी चाहिए। राजाराम यादव, ज्ञानसिंह बघेल, राजवीर सिंह यादव, नीरज कुमार, योगेश कुमार बघेल, यतेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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कार्यकर्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार केरल सहित अन्य राज्यों को उनके करो और संसाधनों के तय हिस्से से वंचित करना बंद करें। राज्य सरकारों के उधार लेने की सीमा तय करने पर रोक लगनी चाहिए। राज्य सूची के विषय में हस्तक्षेप करने के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं का उपयोग करना बंद करे। केंद्र सरकार विपक्ष की राज्य सरकार के नेताओं को निशाना बनाने व परेशान करने के लिए ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग का दुरुपयोग करना बंद करे।
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राज्य सरकार के मामले में हस्तक्षेप करने के लिए राज्यपाल को अपनी संवैधानिक स्थिति का दुरुपयोग करना बंद करना चाहिए। साथ ही राज्यपाल को कुलपति के पद का दुरुपयोग कर राज्य विश्वविद्यालयों के संचालन में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही राज्यपालों को राज्य विधानसभा की ओर से पारित कानून को दबाकर बैठने की बजाय बिना देरी किए मंजूरी देनी चाहिए। राजाराम यादव, ज्ञानसिंह बघेल, राजवीर सिंह यादव, नीरज कुमार, योगेश कुमार बघेल, यतेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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