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डार्क जोन से मुक्ति पर किसानों की बांछें खिलीं
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Fri, 02 Jan 2015 11:53 PM IST
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मारहरा में डार्क जोन श्रेणी से विकास खंड का नाम हटाने से क्षेत्रीय किसानों को राहत मिली है। इसके साथ ही किसान खेतों पर निजी सिंचाई साधनों की भी व्यवस्था कर सकेंगे।
ढाई दशक से डार्क जोन में चिह्नित विकास खंड के किसानों को सिंचाई की परेशानी हो रही थी। वे जरूरत के बाद भी बोरिंग-नलकूप नहीं लगा पा रहे थे। लेकिन हाल ही में डार्क जोन से पृथक होने के साथ ही विभाग ने यहां बोरिंग तकनीशियन की तैनाती भी कर दी है। इससे किसानों को राहत मिली है। किसानों ने इसका स्वागत किया है।
किसान हरिओम राजपूत ने कहा कि अब किसान सिंचाई के लिए निजी नलकूप लगा सकेंगे। किसान जेपी कश्यप, मदनलाल, मुकेश साहू आदि का कहना है कि पानी की समस्या दूर हो जायेगी।
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डार्क जोन से हटने का आदेश किसानों के लिए सर्वाधिक सुखद है। अब वे सिंचाई अव्यवस्था वाले क्षेत्र में निजी नलकूप लगवा सकेंगे।
- जगदीश प्रसाद, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई, एटा।
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ढाई दशक से डार्क जोन में चिह्नित विकास खंड के किसानों को सिंचाई की परेशानी हो रही थी। वे जरूरत के बाद भी बोरिंग-नलकूप नहीं लगा पा रहे थे। लेकिन हाल ही में डार्क जोन से पृथक होने के साथ ही विभाग ने यहां बोरिंग तकनीशियन की तैनाती भी कर दी है। इससे किसानों को राहत मिली है। किसानों ने इसका स्वागत किया है।
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किसान हरिओम राजपूत ने कहा कि अब किसान सिंचाई के लिए निजी नलकूप लगा सकेंगे। किसान जेपी कश्यप, मदनलाल, मुकेश साहू आदि का कहना है कि पानी की समस्या दूर हो जायेगी।
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डार्क जोन से हटने का आदेश किसानों के लिए सर्वाधिक सुखद है। अब वे सिंचाई अव्यवस्था वाले क्षेत्र में निजी नलकूप लगवा सकेंगे।
- जगदीश प्रसाद, सहायक अभियंता, लघु सिंचाई, एटा।