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पूर्व मंत्री अवधपाल, बेटे-भतीजे को जाना पड़ा जेल
ब्यूरो, अमर उजाला एटा
Updated Tue, 09 Jun 2015 09:52 AM IST
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पूर्व मंत्री पर एक नहीं कई संगीन आरोप
पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह यादव, उसके बेटे रणजीत व भतीजे लालजी ने सोमवार सुबह कोर्ट में समर्पण कर दिया। इन पर पांच-पांच हजार रुपये का इनाम घोषित था। कोर्ट ने इन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इनके समर्थकों ने पहले कचहरी में नारेबाजी की, बाद में जेल में इनके साथ घुसने का प्रयास किया। इसको लेकर समर्थकों की पुलिस के साथ नोकझोंक भी हुई।
अवधपाल बसपा सरकार में दो बार दुग्ध विकास एवं पशुपालन मंत्री रहे हैं। जून 2011 में कस्बा जैथरा में हुई सराफ विजय वर्मा, अभिनव वर्मा, गनर संतोष की हत्या के मामले में अवधपाल और जिला पंचायत सदस्य रणजीत आरोपी है। इन पर हत्या के प्रयास, बलात्कार, गैंगेस्टर, डकैती आदि धाराओं के मामले भी दर्ज हैं। अवधपाल सिंह यादव पर आठ, रणजीत सिंह पर नौ, लालजी पर दो मामलों में वारंट जारी थे। सुबह 10:30 बजे तीनों ने सिविल जज सीनियर डिवीजन चंद्रपाल द्वितीय के न्यायालय में समर्पण किया।
अवधपाल सिंह और उसके परिवारीजनों के खिलाफ हत्या, डकैती, बलात्कार जैसी संगीन धाराओं के मामले चल रहे हैं। हाल ही में इनके भतीजे सुरजीत के समेत चार के खिलाफ एक किशोरी के साथ गैंगरेप का मामला दर्ज हुई है। इस परिवार का एटा की राजनीति में दबदबा रहा है। अवधपाल के अलावा इनका बेटा रणजीत जिला पंचायत सदस्य है तो इनके भाई और सुरजीत के पिता चंद्र प्रताप सिंह सिंह विधान परिषद सदस्य है।
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10 जून 2011 को जैथरा में सरफा विजय वर्मा, अभिनव वर्मा और इनके गनर संतोष वर्मा की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अवधपाल और इनके बेटे रणजीत के खिलाफ डकैती, हत्या सहित कई अन्य संगीन धाराओं में मामला दर्ज हुआ था।
इसके अलावा थाना अलीगंज में एक दलित महिला को नौकरी दिलाने का आश्वासन देकर उसके साथ दुष्कर्म करने, बंधक बनाने और एससीएसटी एक्ट समेत कई अन्य धाराओं में मामला दर्ज हुआ। चार दिसंबर 2012 को जैथरा में एक मजदूर के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाकर उसकी हत्या करने, ब्लाक प्रमुख चुनाव के दौरान फायरिंग करने, मारपीट, बलवे, चोरी, सहित कई अन्य धाराओं में भी मामले दर्ज है। 2013 में फायरिंग करने और उसके बाद गैंगेस्टर एक्ट में भी इनके और इनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की गई। 17 मामले अवधपाल सिंह के ऊपर दर्ज हैं, इनमें आठ में उनके खिलाफ वारंट जारी थे। साढ़े चार घंटे तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार पूर्व मंत्री को जेल जाना पड़ा।
सपा ने फंसाया, 55 साल में पहली बार जा रहा हूं जेल: अवधपाल
बसपा सरकार में मंत्री रहे अवधपाल सिंह यादव ने खुद को बेगुनाह बताया और कहा कि 55 साल में पहली बार निर्दोष होते हुए भी जेल जा रहे हैं। सत्ताधारी नेताओं के दबाव में झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। अब उन्हें और परिवार की जान को खतरा है।
जेल जाने से पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि हाल ही में अलीगंज में हुए दुष्कर्म के मामले में भतीजे सुरजीत सहित चार लड़कों को गलत फंसाया गया, जबकि दुष्कर्म करने वाले दो आरोपियों को सत्ताधारी नेताओं के इशारे पर बचाया गया। सत्ताधारी नेताओं के इशारे पर लड़की, उसके पिता को धमकाकर उनके भतीजे का नाम लिखवाया गया। पिछली सरकार में करीब छह केस, अब की सरकार में 11 झूठे मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। बीजेपी में जाने की अटकलों को सोमवार को पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह यादव ने खारिज कर दिया और कहा कि बसपा में हूं और बसपा में ही रहूंगा। बीजेपी में जाने की गलत अफवाह उड़ाई गई है।
समर्थकों की भीड़ जुटी
कोर्ट में हाजिर होने की जानकारी लगते ही पूर्व मंत्री के समर्थक कचहरी पहुंच गए। जेल जाते समय समर्थक पैदल-पैदल ही जेल पर पहुंच गए। इतना ही नहीं अवधपाल के समर्थन में नारे भी लगाए। जेल में इनके साथ घुसकर गिरफ्तारी देने की पेशकश की। इस दौरान पुलिस के साथ इनकी झड़प भी हुई। उधर, कोर्ट परिसर में केवल समर्थक दिखाई दे रहे थे, पुलिस के मात्र एक-दो सिपाही ही मौजूद थे।
ब्लाक प्रमुख से किया राजनीति का सफर शुरू
1986 में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीतकर राजनीतिक जीवन की शुरूआत की थी। बसपा सरकार में 1993, 2007 में मंत्री और वर्ष 1991 में अलीगंज से विधायक, 1998 में भाजपा से एमएलसी रहे है।
जेल के अस्पताल में बीतेगी रात
अवधपाल की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें जिला जेल के अस्पताल में रखा गया है। वो डायबिटीज के मरीज हैं। बेटे रणजीत, भतीजे लालजी को मुलाइजा में रखा गया। बाद में बैरक में भेजा जाएगा।
इन चर्चित मामलों में जारी थे वारंट
- 10 जून 2012 को जैथरा में हुए चर्चित तिहरे हत्याकांड की घटना में पेश न होने पर।
- अलीगंज थाना क्षेत्र में दलित महिला से दुष्कर्म, धमकी देकर बंधक बनाने की घटना में
- चार दिसंबर 2012 को जैथरा में मजदूर पर ट्रैक्टर चढ़ाकर हत्या करने के मामले में।
- 22 दिसंबर 2010 को ब्लॉक प्रमुख चुनाव के दौरान फायरिंग और बलवा करने में।
- 22 अक्तूबर 2010 को मारपीट ले में 47, 48, 349, 382 की धारा में
- 6 जुलाई 2013 को फायरिंग करने में मामले में 147, 336, 307, 120 बी की धारा में।
- 174 ए गैंगेस्टर एक्ट के मामले और ब्लाक प्रमुख चुनाव में फायरिंग के दो मामलों थे।
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पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह यादव, उसके बेटे रणजीत व भतीजे लालजी ने सोमवार सुबह कोर्ट में समर्पण कर दिया। इन पर पांच-पांच हजार रुपये का इनाम घोषित था। कोर्ट ने इन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इनके समर्थकों ने पहले कचहरी में नारेबाजी की, बाद में जेल में इनके साथ घुसने का प्रयास किया। इसको लेकर समर्थकों की पुलिस के साथ नोकझोंक भी हुई।
अवधपाल बसपा सरकार में दो बार दुग्ध विकास एवं पशुपालन मंत्री रहे हैं। जून 2011 में कस्बा जैथरा में हुई सराफ विजय वर्मा, अभिनव वर्मा, गनर संतोष की हत्या के मामले में अवधपाल और जिला पंचायत सदस्य रणजीत आरोपी है। इन पर हत्या के प्रयास, बलात्कार, गैंगेस्टर, डकैती आदि धाराओं के मामले भी दर्ज हैं। अवधपाल सिंह यादव पर आठ, रणजीत सिंह पर नौ, लालजी पर दो मामलों में वारंट जारी थे। सुबह 10:30 बजे तीनों ने सिविल जज सीनियर डिवीजन चंद्रपाल द्वितीय के न्यायालय में समर्पण किया।
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अवधपाल सिंह और उसके परिवारीजनों के खिलाफ हत्या, डकैती, बलात्कार जैसी संगीन धाराओं के मामले चल रहे हैं। हाल ही में इनके भतीजे सुरजीत के समेत चार के खिलाफ एक किशोरी के साथ गैंगरेप का मामला दर्ज हुई है। इस परिवार का एटा की राजनीति में दबदबा रहा है। अवधपाल के अलावा इनका बेटा रणजीत जिला पंचायत सदस्य है तो इनके भाई और सुरजीत के पिता चंद्र प्रताप सिंह सिंह विधान परिषद सदस्य है।
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10 जून 2011 को जैथरा में सरफा विजय वर्मा, अभिनव वर्मा और इनके गनर संतोष वर्मा की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अवधपाल और इनके बेटे रणजीत के खिलाफ डकैती, हत्या सहित कई अन्य संगीन धाराओं में मामला दर्ज हुआ था।
इसके अलावा थाना अलीगंज में एक दलित महिला को नौकरी दिलाने का आश्वासन देकर उसके साथ दुष्कर्म करने, बंधक बनाने और एससीएसटी एक्ट समेत कई अन्य धाराओं में मामला दर्ज हुआ। चार दिसंबर 2012 को जैथरा में एक मजदूर के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाकर उसकी हत्या करने, ब्लाक प्रमुख चुनाव के दौरान फायरिंग करने, मारपीट, बलवे, चोरी, सहित कई अन्य धाराओं में भी मामले दर्ज है। 2013 में फायरिंग करने और उसके बाद गैंगेस्टर एक्ट में भी इनके और इनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की गई। 17 मामले अवधपाल सिंह के ऊपर दर्ज हैं, इनमें आठ में उनके खिलाफ वारंट जारी थे। साढ़े चार घंटे तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार पूर्व मंत्री को जेल जाना पड़ा।
सपा ने फंसाया, 55 साल में पहली बार जा रहा हूं जेल: अवधपाल
बसपा सरकार में मंत्री रहे अवधपाल सिंह यादव ने खुद को बेगुनाह बताया और कहा कि 55 साल में पहली बार निर्दोष होते हुए भी जेल जा रहे हैं। सत्ताधारी नेताओं के दबाव में झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। अब उन्हें और परिवार की जान को खतरा है।
जेल जाने से पहले पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व मंत्री ने कहा कि हाल ही में अलीगंज में हुए दुष्कर्म के मामले में भतीजे सुरजीत सहित चार लड़कों को गलत फंसाया गया, जबकि दुष्कर्म करने वाले दो आरोपियों को सत्ताधारी नेताओं के इशारे पर बचाया गया। सत्ताधारी नेताओं के इशारे पर लड़की, उसके पिता को धमकाकर उनके भतीजे का नाम लिखवाया गया। पिछली सरकार में करीब छह केस, अब की सरकार में 11 झूठे मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। बीजेपी में जाने की अटकलों को सोमवार को पूर्व मंत्री अवधपाल सिंह यादव ने खारिज कर दिया और कहा कि बसपा में हूं और बसपा में ही रहूंगा। बीजेपी में जाने की गलत अफवाह उड़ाई गई है।
समर्थकों की भीड़ जुटी
कोर्ट में हाजिर होने की जानकारी लगते ही पूर्व मंत्री के समर्थक कचहरी पहुंच गए। जेल जाते समय समर्थक पैदल-पैदल ही जेल पर पहुंच गए। इतना ही नहीं अवधपाल के समर्थन में नारे भी लगाए। जेल में इनके साथ घुसकर गिरफ्तारी देने की पेशकश की। इस दौरान पुलिस के साथ इनकी झड़प भी हुई। उधर, कोर्ट परिसर में केवल समर्थक दिखाई दे रहे थे, पुलिस के मात्र एक-दो सिपाही ही मौजूद थे।
ब्लाक प्रमुख से किया राजनीति का सफर शुरू
1986 में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीतकर राजनीतिक जीवन की शुरूआत की थी। बसपा सरकार में 1993, 2007 में मंत्री और वर्ष 1991 में अलीगंज से विधायक, 1998 में भाजपा से एमएलसी रहे है।
जेल के अस्पताल में बीतेगी रात
अवधपाल की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें जिला जेल के अस्पताल में रखा गया है। वो डायबिटीज के मरीज हैं। बेटे रणजीत, भतीजे लालजी को मुलाइजा में रखा गया। बाद में बैरक में भेजा जाएगा।
इन चर्चित मामलों में जारी थे वारंट
- 10 जून 2012 को जैथरा में हुए चर्चित तिहरे हत्याकांड की घटना में पेश न होने पर।
- अलीगंज थाना क्षेत्र में दलित महिला से दुष्कर्म, धमकी देकर बंधक बनाने की घटना में
- चार दिसंबर 2012 को जैथरा में मजदूर पर ट्रैक्टर चढ़ाकर हत्या करने के मामले में।
- 22 दिसंबर 2010 को ब्लॉक प्रमुख चुनाव के दौरान फायरिंग और बलवा करने में।
- 22 अक्तूबर 2010 को मारपीट ले में 47, 48, 349, 382 की धारा में
- 6 जुलाई 2013 को फायरिंग करने में मामले में 147, 336, 307, 120 बी की धारा में।
- 174 ए गैंगेस्टर एक्ट के मामले और ब्लाक प्रमुख चुनाव में फायरिंग के दो मामलों थे।