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मदरसे में फर्जी शिक्षकों के नाम से निकल रही पगार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 11 Apr 2017 10:49 PM IST
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बदहाल पड़ा रीडगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय जहां अभी कुछ दिन पहले एक हादसा हो चुका है उसके बाद भी यहां कोई इसकी सुध लेने वाला नहीं है ।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में मदरसा घोटाले में एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। मदरसे में शिक्षकों के वेतन के नाम पर खेल चल रहा है। फर्जी तरीके से शिक्षकों के नाम कागजों में दिखाकर इंतजामिया कमेटी लूटने में लगी है। मदरसा रिकार्ड में जिन शिक्षकों के नाम दर्शाए गए हैं, उनमें से अधिकांश के चेहरे तो बच्चों ने देखे ही नहीं हैं। वहीं कोई नौकरीपेशा है, तो किसी ने अपना अलग से स्कूल खोल रखा है, लेकिन विभागीय अधिकारियों को कुछ भी नजर नहीं आ रहा।
शहर के भूतेश्वर रोड मारहरा गेट पर चल रहे मदरसा फातिमा इस्लामिया आलिया स्कूल में इंतजामिया कमेटी ने 11 शिक्षकों को दिखाया है। जिसमें सबसे पहले अरमान खान का नाम है। अरमान खान फूलबाग कालोनी में रहते हैं और स्कूल आते ही नहीं हैं। इसके बाद इमामुद्दीन मदरसा संचालक के दामाद हैं। वह फिरोजाबाद के नगला बीच में अपना पब्लिक स्कूल चलाते हैं। वे कभी स्कूल नहीं आए। शिक्षिका कविता पाल भी एक पुलिस विभाग के अधिकारी की बेटी हैं और उनका विवाह हो चुका है, लेकिन उनका नाम से आज भी वेतन लिया जा रहा है। वहीं शिक्षक नईमुद्दीन बैटरी संभालने का काम करते हैं। एक और शिक्षक सौरभ सिंह को बच्चे भी नहीं जानते। वहीं एक ही भवन में चल रहे दूसरे मदरसा फेमिदा अरेबिक स्कूल में कार्यरत दिखाए गए शिक्षक हसन अली अलीगढ़ में एक मीट फैक्ट्री में काम करते हैं। इसके साथ ही जयप्रकाश मिश्र, रतिभान और रूही आजमी को कोई नहीं जानता। इस मामले में सीडीओ जांच कर रहे है।
मदरसा में शिक्षकों को हर माह 12 से 18 हजार रुपये वेतन मिलता है। फातिमा स्कूल में दिखाए गए 11 शिक्षकों में से महज तीन शिक्षक काम कर रहे हैं। फेमिदा अरेबिक में 6 शिक्षकों में दो कार्यरत हैं। नियमों के मुताबिक पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड शिक्षक को 18 हजार और ग्रेजुएट बीएड शिक्षक को 12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है।
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खुद को मदरसों का डायरेक्टर बताकर खेल करने वाला न्याय विभाग का सरकारी कर्मचारी ने कई घोटाले किए हैं। कर्मचारी ने अपनी बहन को मदरसों का प्रबंधन बना रखा है और खुद निदेशक है। इसके होर्डिंग्स भी हैं।
हमारे मदरसे में कोई फर्जीवाड़ा नहीं है। मदरसे को लेकर लगाए गए आरोप और शिकायतें निराधार हैं। जो शिक्षक छोड़कर जा चुके हैं, उनके नाम शासन को भेजे थे, लेकिन अब तक बदले नहीं गए हैं। जांच में सबकुछ साफ हो जाएगा।
इस्लाम खान, निदेशक, मदरसा फातिमा इस्लामिया आलिया स्कूल, एटा
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शहर के भूतेश्वर रोड मारहरा गेट पर चल रहे मदरसा फातिमा इस्लामिया आलिया स्कूल में इंतजामिया कमेटी ने 11 शिक्षकों को दिखाया है। जिसमें सबसे पहले अरमान खान का नाम है। अरमान खान फूलबाग कालोनी में रहते हैं और स्कूल आते ही नहीं हैं। इसके बाद इमामुद्दीन मदरसा संचालक के दामाद हैं। वह फिरोजाबाद के नगला बीच में अपना पब्लिक स्कूल चलाते हैं। वे कभी स्कूल नहीं आए। शिक्षिका कविता पाल भी एक पुलिस विभाग के अधिकारी की बेटी हैं और उनका विवाह हो चुका है, लेकिन उनका नाम से आज भी वेतन लिया जा रहा है। वहीं शिक्षक नईमुद्दीन बैटरी संभालने का काम करते हैं। एक और शिक्षक सौरभ सिंह को बच्चे भी नहीं जानते। वहीं एक ही भवन में चल रहे दूसरे मदरसा फेमिदा अरेबिक स्कूल में कार्यरत दिखाए गए शिक्षक हसन अली अलीगढ़ में एक मीट फैक्ट्री में काम करते हैं। इसके साथ ही जयप्रकाश मिश्र, रतिभान और रूही आजमी को कोई नहीं जानता। इस मामले में सीडीओ जांच कर रहे है।
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मदरसा में शिक्षकों को हर माह 12 से 18 हजार रुपये वेतन मिलता है। फातिमा स्कूल में दिखाए गए 11 शिक्षकों में से महज तीन शिक्षक काम कर रहे हैं। फेमिदा अरेबिक में 6 शिक्षकों में दो कार्यरत हैं। नियमों के मुताबिक पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड शिक्षक को 18 हजार और ग्रेजुएट बीएड शिक्षक को 12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है।
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खुद को मदरसों का डायरेक्टर बताकर खेल करने वाला न्याय विभाग का सरकारी कर्मचारी ने कई घोटाले किए हैं। कर्मचारी ने अपनी बहन को मदरसों का प्रबंधन बना रखा है और खुद निदेशक है। इसके होर्डिंग्स भी हैं।
हमारे मदरसे में कोई फर्जीवाड़ा नहीं है। मदरसे को लेकर लगाए गए आरोप और शिकायतें निराधार हैं। जो शिक्षक छोड़कर जा चुके हैं, उनके नाम शासन को भेजे थे, लेकिन अब तक बदले नहीं गए हैं। जांच में सबकुछ साफ हो जाएगा।
इस्लाम खान, निदेशक, मदरसा फातिमा इस्लामिया आलिया स्कूल, एटा