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कोरोना के चलते जिला अस्पताल बना रेफरल सेंटर
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जिला अस्पताल में स्ट्रेचर पर पड़ी घायल महिला उपचार के लिए इंतजार करती हुई। संवाद
- फोटो : ETAH
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एटा। लॉकडाउन के बाद से जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की संख्या थम गई है। गंभीर बीमारी हार्ट, सांस और टीबी सहित अन्य मर्ज से परेशान मरीज जिला अस्पताल आ ही नहीं रहे हैं, जो आ भी रहे हैं, उन्हें यहां से आगरा या सैफई रेफर किया जा रहा है। लॉकडाउन के बाद से पहुंचे हार्ट के चार मरीजों को हायर सेंटर भेज दिया गया।
वहीं, इमरजेंसी में एक दिन में 70 से अस्सी मरीज इलाज को पहुंच रहे हैं। इसमे सबसे ज्यादा संख्या दुघर्टना में घायलों की होती है। कोरोना वायरस के बाद जिला अस्पतालों की ओपीडी बंद कर दी गई। इसके चलते मरीज इलाज के लिए नर्सिंग होम पर पहुंचने लगे, लेकिन लॉकडाउन के चलते यहां भी उनकी संख्या कम हो गई।
आलम यह है कि जिला अस्पताल में लॉकडाउन के बाद अब तक दिल के रोग से पीड़ित मरीज चार पहुंचे। जहां अस्पताल के चिकित्सकों ने संसाधनों का अभाव बताकर उन्हें हायर सेंटर पर रेफर कर दिया। वहीं सांस रोग से पीड़ित 28 मरीज पहुंचे। जहां आठ मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में थोड़ी देर भर्ती कर रिलीफ होने पर उन्हें घर भेज दिया। वहीं, 20 मरीजों को हायर सेंटर पर रेफर कर दिया।
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रविवार को इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे चिकित्सक प्रवीन ने बताया कि इमरजेंसी में गंभीर मरीज को ही भर्ती किया जा रहा है। उन्होंने कहा अस्पताल में वेंटीलेटर की कोई व्यवस्था नहीं है। सांस रोगियों को कब वेंटीलेटर की जरूरत पड़ जाए। यह पता नहीं होता है। इसके चलते उन्हें अस्पताल से रेफर कर दिया जाता है।
फ्लू कार्नर पर देखा जा रहा मरीजों को
सीएम के निर्देश के बाद अस्पताल में खुले फ्लू कार्नर पर बुखार, खांसी और जुकाम से पीड़ित मरीजों का ही उपचार किया जा रहा है। यहां पहुंचने वाले मरीज को देखकर दवा दे उसे घर भेज दिया जाता है।
नर्सिंग होम पर भी चिकित्सक दे रहे कम समय
एमबीबीएस, एमएस डॉ श्याम सिंह शाक्य ने बताया कि वह सुबह के समय दो घंटे के लिए ही नर्सिंग होम पर बैठते है। वहीं मरीजों को एक मीटर की दूरी बनाए रखने क प्रति जागरूक करते हैं। उन्होंने कहा अस्पताल में दो मरीज भर्ती हैं। गंभीर मरीज को ही अस्पताल में रख रहे हैं। डॉ. शैलेंद्र जैन के बताया कि लॉकडाउन के चलते मरीज कम ही आ रहे हैं। वह एक घंटा सुबह व एक घंटा शाम के समय अस्पताल में बैठते हैं। उन्होंने कहा कि सीएमओ ने उनके अस्पताल को चयनित किया है। इसे चलते मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं। गौरतलब है कि जिले में एक मात्र इसी अस्पताल में वेंटीलेटर हैं।
जिले में हृदय सहित कई बीमारियों के चिकित्सक ही नहीं
जिले में चिकित्सकों का अभाव है। हृदय सहित कई अन्य बीमारियों के चिकित्सक जिले में नहीं है। जिला अस्पताल में 25 की जगह सिर्फ सात चिकित्सक ही कार्य कर रहे हैं। संसाधनों का भी अभाव है। वेंटीलेटर की मांग की गई है। वहीं चिकित्सकों की भी मांग लगातार की जा रही है। गंभीर होने की हालत में ही मरीज को रेफर किया जाता है।
-डॉ. अजय अग्रवाल, सीएमओ
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वहीं, इमरजेंसी में एक दिन में 70 से अस्सी मरीज इलाज को पहुंच रहे हैं। इसमे सबसे ज्यादा संख्या दुघर्टना में घायलों की होती है। कोरोना वायरस के बाद जिला अस्पतालों की ओपीडी बंद कर दी गई। इसके चलते मरीज इलाज के लिए नर्सिंग होम पर पहुंचने लगे, लेकिन लॉकडाउन के चलते यहां भी उनकी संख्या कम हो गई।
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आलम यह है कि जिला अस्पताल में लॉकडाउन के बाद अब तक दिल के रोग से पीड़ित मरीज चार पहुंचे। जहां अस्पताल के चिकित्सकों ने संसाधनों का अभाव बताकर उन्हें हायर सेंटर पर रेफर कर दिया। वहीं सांस रोग से पीड़ित 28 मरीज पहुंचे। जहां आठ मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में थोड़ी देर भर्ती कर रिलीफ होने पर उन्हें घर भेज दिया। वहीं, 20 मरीजों को हायर सेंटर पर रेफर कर दिया।
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रविवार को इमरजेंसी में ड्यूटी कर रहे चिकित्सक प्रवीन ने बताया कि इमरजेंसी में गंभीर मरीज को ही भर्ती किया जा रहा है। उन्होंने कहा अस्पताल में वेंटीलेटर की कोई व्यवस्था नहीं है। सांस रोगियों को कब वेंटीलेटर की जरूरत पड़ जाए। यह पता नहीं होता है। इसके चलते उन्हें अस्पताल से रेफर कर दिया जाता है।
फ्लू कार्नर पर देखा जा रहा मरीजों को
सीएम के निर्देश के बाद अस्पताल में खुले फ्लू कार्नर पर बुखार, खांसी और जुकाम से पीड़ित मरीजों का ही उपचार किया जा रहा है। यहां पहुंचने वाले मरीज को देखकर दवा दे उसे घर भेज दिया जाता है।
नर्सिंग होम पर भी चिकित्सक दे रहे कम समय
एमबीबीएस, एमएस डॉ श्याम सिंह शाक्य ने बताया कि वह सुबह के समय दो घंटे के लिए ही नर्सिंग होम पर बैठते है। वहीं मरीजों को एक मीटर की दूरी बनाए रखने क प्रति जागरूक करते हैं। उन्होंने कहा अस्पताल में दो मरीज भर्ती हैं। गंभीर मरीज को ही अस्पताल में रख रहे हैं। डॉ. शैलेंद्र जैन के बताया कि लॉकडाउन के चलते मरीज कम ही आ रहे हैं। वह एक घंटा सुबह व एक घंटा शाम के समय अस्पताल में बैठते हैं। उन्होंने कहा कि सीएमओ ने उनके अस्पताल को चयनित किया है। इसे चलते मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं। गौरतलब है कि जिले में एक मात्र इसी अस्पताल में वेंटीलेटर हैं।
जिले में हृदय सहित कई बीमारियों के चिकित्सक ही नहीं
जिले में चिकित्सकों का अभाव है। हृदय सहित कई अन्य बीमारियों के चिकित्सक जिले में नहीं है। जिला अस्पताल में 25 की जगह सिर्फ सात चिकित्सक ही कार्य कर रहे हैं। संसाधनों का भी अभाव है। वेंटीलेटर की मांग की गई है। वहीं चिकित्सकों की भी मांग लगातार की जा रही है। गंभीर होने की हालत में ही मरीज को रेफर किया जाता है।
-डॉ. अजय अग्रवाल, सीएमओ