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आज घर-घर बाजेगी कान्हा के जन्म की बधाई
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Wed, 24 Aug 2016 11:41 PM IST
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आज घर-घर बाजेगी कान्हा के जन्म की बधाई
- फोटो : अमर उजाला
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शहर के प्राचीन तीन प्रमुख श्री कृष्ण मंदिर में कई रहस्य जुड़े है। यह मंदिर अपने आप में इतिहास समेटे हुए है। शहर के इन प्राचीन मंदिरों में जन्माष्टमी को लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं। प्राचीन मंदिर होने के चलते इनमें प्रवेश करते ही मथुरा-वृदांवन के मंदिरों की कलाकारी झलकती है।
नगर की सांवर वाली गली में प्राचीन द्वारिकाधीश मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना 1860 में लाला चैनसुखदास अग्रवाल ने की। इस मंदिर की व्यवस्था नगर के गोयल परिवार के हवाले है। द्वारिकाधीश की सेवा करने वाले महंत माधव गौर ने मंदिर के बारे में बताया कि यहां आसपास से भी लोग दर्शन करने आते हैं। भक्तों का कहना है कि यहां आने से उनकी मन की मुराद भी पूरी होती है। मंदिर के इतिहास में कई चमत्कार भी जुड़े हुए है। मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर निर्माण करने वाले कारीगर के पुत्र त्रिलोकी नाथ ने इस मंदिर का निर्माण किया। मंदिर की पूरी छवि मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर से मिलती जुलती है। जिसके कारण यहां भक्तों का जुड़ाव अधिक रहता है। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी पर भी विशेष श्रंगार एवं छप्पन भोग के दर्शन होंगे। ऐसी ही दूसरा मंदिर है गली बौहरान स्थित गोवर्धन नाथ मंदिर है। यहां भी प्रभु गोवर्धन नाथ की छवि भक्तों को आकर्षित करने वाली है। मंदिर पर प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। पंडित ओमप्रकाश ने बताया कि मंदिर एक सौ पच्चीस साल से अधिक पुराना है। उनके परिवार की पीढ़ियां इस मंदिर पर भगवान गोवर्धन नाथ की सेवा कर रही हैं। तीसरा मंदिर गली दाऊजी में स्थित है। इस गली का नाम मंदिर के नाम पर है। इस गली में स्थित दाऊ जी मंदिर में भगवान दाऊ जी के दर्शन को बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में पहुंचते है।
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नगर की सांवर वाली गली में प्राचीन द्वारिकाधीश मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना 1860 में लाला चैनसुखदास अग्रवाल ने की। इस मंदिर की व्यवस्था नगर के गोयल परिवार के हवाले है। द्वारिकाधीश की सेवा करने वाले महंत माधव गौर ने मंदिर के बारे में बताया कि यहां आसपास से भी लोग दर्शन करने आते हैं। भक्तों का कहना है कि यहां आने से उनकी मन की मुराद भी पूरी होती है। मंदिर के इतिहास में कई चमत्कार भी जुड़े हुए है। मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर निर्माण करने वाले कारीगर के पुत्र त्रिलोकी नाथ ने इस मंदिर का निर्माण किया। मंदिर की पूरी छवि मथुरा के द्वारिकाधीश मंदिर से मिलती जुलती है। जिसके कारण यहां भक्तों का जुड़ाव अधिक रहता है। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी पर भी विशेष श्रंगार एवं छप्पन भोग के दर्शन होंगे। ऐसी ही दूसरा मंदिर है गली बौहरान स्थित गोवर्धन नाथ मंदिर है। यहां भी प्रभु गोवर्धन नाथ की छवि भक्तों को आकर्षित करने वाली है। मंदिर पर प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। पंडित ओमप्रकाश ने बताया कि मंदिर एक सौ पच्चीस साल से अधिक पुराना है। उनके परिवार की पीढ़ियां इस मंदिर पर भगवान गोवर्धन नाथ की सेवा कर रही हैं। तीसरा मंदिर गली दाऊजी में स्थित है। इस गली का नाम मंदिर के नाम पर है। इस गली में स्थित दाऊ जी मंदिर में भगवान दाऊ जी के दर्शन को बड़ी संख्या में भक्त मंदिर में पहुंचते है।
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