एटा। जिले में डीएपी व खाद की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर कृषि विभाग द्वारा बार-बार दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में दावे फेल हैं। सरकारी गोदाम खाली पड़े हैं। बाजार में डीएपी की भारी किल्लत बनी हुई है, जिससे किसान हलाकान हैं। खेतों में बुवाई नहीं हो पा रही है। जहां डीएपी उपलब्ध है, वहां कालाबाजारी का खेल चल रहा है। कई दुकानों पर तीन सौ रुपये तक महंगी बेची जा रही है।
सरकारी गोदामों में डीएपी न होने से किसानों को मजबूरन बाजारों से महंगे रेट पर डीएपी लेनी पड़ रही है। 1190 रुपये की डीएपी खाद की एक बोरी के लिए 1500 रुपये देने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी गोदाम पर डीएपी न होने से निजी दुकानदार मनमानी कर रहे हैं। किसान चिंतित हैं कि इससे फसल पर लागत काफी बढ़ जाएगी। यही नहीं, डीएपी की उपलब्धता भी आसानी से नहीं हो पा रही। किसानों को एक दुकान से दूसरी दुकान के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।