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बच्चों के शव देख भड़का आक्रोश

Tue, 24 Nov 2015 06:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 24 Nov 2015 06:43 PM IST
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children's bodies triggered outrage
आग की घटना के बाद जैसे ही बच्चों के जले शव भीड़ ने देखे वैसे ही लोगों का
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आक्रोश भड़क गया। गुस्साई भीड़ ने हाईवे-91 से कचहरी रोड और रोडवेज से लेकर घंटाघर तक उपद्रव काटा। आग बुझाने में नाकाम अग्निशमन की एक दमकल गाड़ी में आग लगा दी तो वहां से गुजर रहे पुलिस के वाहन में आग लगा दी। यही नहीं उपद्रवियों ने अग्निशमन विभाग के दूसरे वाहन में भी आग लगाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाए।

वाहनों को आग के हवाले करने के बाद गुस्साए लोगों ने जीटी रोड पर कई सब्जी, फल के रिक्शे पलट दिए, तो कचहरी तिराहे के आसपास के इलाकों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। यही नहीं भीड़ ने रोडवेज बस स्टैंड पर पुलिस चौकी फूंकने के बाद राहगीर से साइकिल और ठेली छीनकर आग के हवाले कर दिया। आगजनी और उपद्रव होने पर देखते ही देखते जीटी रोड स्थित दुकानों के शटर गिरने शुरू हो गए।

इतने बवाल के बाद भी जीटी रोड पर कहीं भी पुलिस कर्मी दिखाई नहीं दिए। जब भी पुलिस और पीएसी बल ने आंसू गैस छोड़कर उपद्रवियों को रोकने का प्रयास किया तो भीड़ ने पथराव कर पुलिस को खदेड़ दिया। आक्रोशित लोगों के सामने पुलिस और पीएसी बल आधा घंटे में ही बैकफुट पर आ गया। इसके बाद पुलिस सिविल लाइन की ओर से कचहरी तिराहे की ओर बढ़ना शुरू हुई, लेकिन आक्रोशित लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने हवा में कई राउंड गोलियां चलाई, जिसके बाद घटनास्थल पर अफरातफरी का माहौल बन गया। लोग थोड़ी देर के लिए इधर-उधर भागे, लेकिन इसके बाद फिर पुलिस पर आक्रामक हो गए।
 
सतर्कता से बच जाती बच्चों की जान
 बच्चों के पिता सुनील सक्सेना का कहना है कि घर में लगी आग के बाद वह हाथ जोड़कर अपने बच्चों की जान बचाने के लिए दमकल और पुलिस कर्मियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन आग की डर की वजह से पुलिस और दमकलकर्मी तीसरी मंजिल तक नहीं गए। लोगों की मानें तो यदि समय रहते बच्चों को घर से बाहर निकालने की कोशिश होती तो शायद बच्चों की जानें बच भी सकती थीं। अंश के पिता सुनील सक्सेना और संजीव के पिता धर्मपाल प्रशासन को अपने बच्चों की मौत का जिम्मेदार ठहरा रहे थे।
 
आधा घंटे बाद पहुंची दमकल वाहन
घटनास्थल पर मौजूद भीड़ ने घटना के लिए दमकल और पुलिस प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि घर में आग लगने के आधा घंटा बाद दमकल गाड़ियां पहुंची तो पुलिस अधिकारी एक घंटे बाद पहुंचे। आरोप है कि घटनास्थल से एक किमी दूरी पर कलक्ट्रेट में डीएम, एसएसपी और पुलिस लाइन है। लेकिन घटना की सूचना मिलने के बाद भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी अपने कार्यालय से नहीं निकले। घटना पर एकमात्र अधिकारी के रूप में सीओ सिटी अजीजुल हक ही पहुंचे और भीड़ का आक्रोश देख वो भी चुपके से निकल गए।  
 
आग लगने के कारणों की पुष्टि नहीं
सुनील की माने तो बच्चों ने खेल-खेल में बिजली के तारों में आग लगा दी। आग लगने के बाद अंश की मां रजनी घबरा गई और सुनील को बुलाने नीचे दौड़ी। तब तक आग पूरे घर में फैल चुकी थी। वहीं अंश के बाबा बृजबिहारी लाल ने बताया कि उनके घर में शॉर्टसर्किट से आग लगी थी। घटना के बाद पिता और बाबा ने अलग-अलग बयान दिए। इससे आग लगने के कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी। बता दें कि मंगलवार को सुनील की बेटी नंदनी (6) स्कूल गई थी, यदि घटना के दौरान वह भी मौजूद होती तो हादसेे की चपेट में आ सकती थी।
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