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सावधान : आंख-त्वचा ही नहीं फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचाएंगे घटिया रंग

Sun, 09 Mar 2025 05:58 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Updated Sun, 09 Mar 2025 05:58 PM IST
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Caution: Poor quality colours will harm not only eyes and skin but also lungs
रेलवे रोड पर सजी रंगों की दुकान। - फोटो : रेलवे रोड पर सजी रंगों की दुकान।
एटा। होली पर हमजोली को ऐसे रंगों से रंगने की चाहत सभी की होती है जो कई दिनों तक न छूटे। इसी चाहत में लोग रासायनिक रंग का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही ये सस्ते भी मिल जाते हैं। उन्हें इस बात का आभास भी नहीं होता है कि यह रासायनिक रंग त्वचा और आंख को ही नहीं बल्कि फेफड़े और अंदरूनी पेट को भी नुकसान पहुंचा सकता है। ये घटिया रंग 25 ग्राम की पैकिंग में 25 से 35 रुपये के मिल रहे हैं। जबकि इतने ही वजन के हर्बल रंग का पैकेट 90 से 130 रुपये का है।
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इन रंगों को तैयार करने में सिल्क, सीसा मिलाया जाता है। यह सांस के जरिये अंदर चला जाए तो यह फेफड़ों और पेट को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे लोगों की इस चाहत को कैश करने के लिए बाजार में रासायनिक रंगों का स्टॉक कर लिया गया है। त्योहार पर इसे बेचने की तैयारी है। हालांकि रंगों की दुकान भी बाजार में सज गई हैं।
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बीते वर्ष होली पर लोगों ने एक दूसरे को चटक रंग लगाया था इस दौरान आंखों में दिक्कत हुई थी। वहीं, त्वचा पर फफोले जैसे मामले सामने आए थे। ऐसी घटनाएं हर वर्ष सामने आती है। इसके बावजूद लोग रासायनिक रंग इस्तेमाल करते हैं। फिर से होली नजदीक आ गई है, ऐसे में थोक बाजार में रंगों का भारी स्टॉक किया गया है। जनपद में हाथरस और आगरा से यहां रंग लाया गया है, जो कि फुटकर दुकानों पर बिक्री किया जाएगा। हालांकि बाजार में कुछ फुटकर की दुकान अभी खुल गईं हैं। इसमें बड़े पैमाने में रासायनिक रंग भी हैं।
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सस्ते और पक्के रंग होने की चाहत में लोग इन लोगों को खरीद लेते हैं जो कि त्योहार के उल्लास में रंग में भंग मिला सकते हैं। उन्हें नहीं मालूम सस्ते के चक्कर में इनमें खतरनाक केमिकल मिलाकर तैयार किया जाता है। इनमें लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, डाई और पिसा हुआ कांच मिला होता है, जो सेहत को नुकसान पहुंचता है। रंग का वजन बढ़ाने और उसे चमकीला बनाने के लिए उसमें कांच पीसकर मिलाया जाता है जो कि सांस के जरिये फेफड़ों तक पहुंचता है।


यह बरतें सावधानी

- होली पर रंग खेलने से पहले अपने शरीर पर नारियल या सरसों का तेल लगा लें।

- फुल आस्तीन के कपड़े पहने ताकि त्वचा पर रंग कम ही पड़े।

- रंग खेलने से पहले आंखों पर चश्मा लगाए और मास्क पहनें।



- हर रंग में अलग-अलग रासायनिक तत्व होते हैं।


- हरा रंग बनाने में कॉपर सल्फेट का इस्तेमाल होता है, जो आंखों में एलर्जी के साथ अंधा भी कर सकता है।


- चमकीला या सफेद रंग में मिलाया जाने वाला एल्मुनियम ब्रोमाइड कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी देता है।


- लाल रंग में रोडामिन बी, बालू, मिट्टी और यूरिया मिलाई जाती, जिससे स्किन कैंसर सौगात में मिलता है।


- बैगनी रंग में क्रोमियम आयोडाइड का इस्तेमाल होता है। जिससे एलर्जी और अस्थमा की शिकायत हो सकती है।



बोले चिकित्सक

रासायनिक रंगों का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, जिससे आंखों में लंबे समय तक किरकिरी होती रहती है आंखों में पानी आने लगता है और लाली आ जाती है ऐसे में आंखों को जोर से रगड़ने पर कार्नियल इपीथिलियम को नुकसान होता है और कॉर्नियल अल्सर हो सकता है। इससे आंखों की रोशनी भी प्रभावित हो सकती है। -डॉ. सुमुख उपाध्याय




रासायनिक रंगों से दूर ही रहना बेहतर है। ज्यादातर रंग केमिकल से तैयार किए जाते हैं। इसमें हानिकारक तत्व मिले होते हैं, जिनका सीधा प्रयोग त्वचा को नुकसान पहुंचता है। इससे स्किन, एलर्जी, खुजली व त्वचा का रंग लाल होने के अलावा चकत्ते पढ़ सकते हैं। फेफड़ों में पहुंचने से सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है। -डाॅ. ऋषभ सक्सेना
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