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नहर-रजबाह सूखे, सिंचाई का संकट
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Sun, 06 Dec 2015 11:36 PM IST
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इस समय सिंचाई के लिये पानी की जरूरत है और जिले के रजबाह-नहर सूखे पड़े हैं। किसानों को रबी की फसल सींचने और बुवाई के लिए पानी की दरकार है। लेकिन सिंचाई विभाग द्धारा क्लोजर लेने के कारण जिले की नहरे और रजबाह के सूखने से किसान परेशान हैं। ऐसे में मुफ्त सिंचाई का तोहफा देने वाली सरकार की नीति किसानों के गले नहीं उतर रही है।
नहरों और रजबाहों में पानी के न होने से किसानों के सामने रबी की फसलों को सींचने का संकट गहरा रहा है। सिंचाई विभाग की मानें तो क्लोजर की वजह से नहरों में अभी पानी की सप्लाई नहीं की जा रही है। इसके चलते रजबहों में भी पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। क्लोजर नौ दिसंबर तक रहेगा। सिंचाई विभाग क्लोजर की वजह नहरों में साफ सफाई का होना और उनके किनारों को सही कराया जाना बता रहा है। जबकि 15 नवंबर से जिले में गेहूं की बुवाई शुरू हो गई थी। इससे पहले किसान मटर, चना, तिलहन और दलहन की बुवाई कर चुके हैं। किसान धान की फसल काटने के बाद अब उसमें गेहूं की बुवाई करना चाह रहे हैं। लेकिन, बुवाई से पहले की जाने वाली पलेवट के लिए पानी नहीं है। बता दें कि जिले में जिस 12 हजार हेक्टेयर में धान की फसल हुई है, वह जमीन नहर और रजबाह की सिंचाई पर ही निर्भर है। ऐसे में उन किसानों को गेहूं की बुवाई में देरी हो रही है। बेवर ब्रांच और उपरी गंग नहर में पानी न होने से कई माचुआ, सकरौली आदि रजबाह भी सूखे पड़े हैं।
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नहरों और रजबाहों में पानी के न होने से किसानों के सामने रबी की फसलों को सींचने का संकट गहरा रहा है। सिंचाई विभाग की मानें तो क्लोजर की वजह से नहरों में अभी पानी की सप्लाई नहीं की जा रही है। इसके चलते रजबहों में भी पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है। क्लोजर नौ दिसंबर तक रहेगा। सिंचाई विभाग क्लोजर की वजह नहरों में साफ सफाई का होना और उनके किनारों को सही कराया जाना बता रहा है। जबकि 15 नवंबर से जिले में गेहूं की बुवाई शुरू हो गई थी। इससे पहले किसान मटर, चना, तिलहन और दलहन की बुवाई कर चुके हैं। किसान धान की फसल काटने के बाद अब उसमें गेहूं की बुवाई करना चाह रहे हैं। लेकिन, बुवाई से पहले की जाने वाली पलेवट के लिए पानी नहीं है। बता दें कि जिले में जिस 12 हजार हेक्टेयर में धान की फसल हुई है, वह जमीन नहर और रजबाह की सिंचाई पर ही निर्भर है। ऐसे में उन किसानों को गेहूं की बुवाई में देरी हो रही है। बेवर ब्रांच और उपरी गंग नहर में पानी न होने से कई माचुआ, सकरौली आदि रजबाह भी सूखे पड़े हैं।
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