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जिले के गुरुओं पर गिर सकती है फर्जी प्रमाणपत्रों की गाज
ब्यूरो, अमर उजाला एटा
Updated Thu, 16 Apr 2015 11:22 PM IST
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जिले के प्राथमिक शिक्षा विभाग में सेवारत दर्जनों शिक्षक शिक्षिकाओं पर
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फर्जी प्रमाणपत्रों की ‘एसआईटी जांच’ की गाज गिर सकती है। 2007 से 2010 के
बीच के बीएड डिग्री धारकों की विवि में चल रही जांच के बाद इनकी नींद उड़ी
हुई है। इतना ही नहीं यह लोग विभागीय आदेश के बाद भी बीएड अंकपत्र और
डिग्री उपलब्ध नहीं करा रहे। ऐसे में जिले के दर्जनों शिक्षक शिक्षिकाओं की
सर्विस बुक नहीं बन पा रही।
फर्जी डिग्री की शिकायतों को लेकर विवि में चल रही एसआईटी जांच का असर जिले में भी दिख रहा है। इन डिग्रियों की दम पर नौकरी पा चुके जांच एजेंसी के निशाने पर हैं। सूत्रों की मानें तो सौ से अधिक लोग तो प्राथमिक शिक्षा विभाग में ही ‘गुरुजी’ बन बैठे हैं। मिलीभगत से सत्यापन करा चुके यह लोग नियमित हजारों रुपये मासिक वेतन भी ले रहे हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार इन दिनों 2007 से 2010 के बीच के बीएड डिग्री धारकों की जांच के बाद संबंधित में हड़कंप है तो वहीं यह लोग विभागीय आदेश के बाद भी शैक्षिक प्रमाणपत्र विभाग को प्रस्तुत नहीं कर रहे। इसके चलते सालों बाद भी इनकी सर्विस बुक नहीं बन पा रही। हर विकास खंड में दर्जन भर से अधिक शिक्षक शिक्षिकाएं संदेह के दायरे में हैं।
निर्देशों के बाद भी दर्जनों शिक्षक शिक्षिकाएं बीएड प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं करा रहे। निधौली कलां एवं शीतलपुर विकास खंड के ही दो दर्जन से अधिक शिक्षक शिक्षिकाएं आदेश अनुपालन में आनाकानी कर रहे हैं। ऐसे में इनके सर्विस बुक नहीं बन पा रहे। इनमें अधिकांश 2007 से 10 के बीच के हैं।
- श्रीकांत पटेल, खंड शिक्षा अधिकारी
फर्जी डिग्री की शिकायतों को लेकर विवि में चल रही एसआईटी जांच का असर जिले में भी दिख रहा है। इन डिग्रियों की दम पर नौकरी पा चुके जांच एजेंसी के निशाने पर हैं। सूत्रों की मानें तो सौ से अधिक लोग तो प्राथमिक शिक्षा विभाग में ही ‘गुरुजी’ बन बैठे हैं। मिलीभगत से सत्यापन करा चुके यह लोग नियमित हजारों रुपये मासिक वेतन भी ले रहे हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार इन दिनों 2007 से 2010 के बीच के बीएड डिग्री धारकों की जांच के बाद संबंधित में हड़कंप है तो वहीं यह लोग विभागीय आदेश के बाद भी शैक्षिक प्रमाणपत्र विभाग को प्रस्तुत नहीं कर रहे। इसके चलते सालों बाद भी इनकी सर्विस बुक नहीं बन पा रही। हर विकास खंड में दर्जन भर से अधिक शिक्षक शिक्षिकाएं संदेह के दायरे में हैं।
निर्देशों के बाद भी दर्जनों शिक्षक शिक्षिकाएं बीएड प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं करा रहे। निधौली कलां एवं शीतलपुर विकास खंड के ही दो दर्जन से अधिक शिक्षक शिक्षिकाएं आदेश अनुपालन में आनाकानी कर रहे हैं। ऐसे में इनके सर्विस बुक नहीं बन पा रहे। इनमें अधिकांश 2007 से 10 के बीच के हैं।
- श्रीकांत पटेल, खंड शिक्षा अधिकारी