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Etah News: इफ्को किसान सेवा केंद्र पर यूरिया की कालाबाजारी
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वाहन में भरी यूरिया की बोरियां। संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। अलीगंज तिराहा स्थित इफ्को किसान सेवा केंद्र पर यूरिया की कालाबाजारी की जा रही है। मंगलवार रात अमर उजाला टीम ने पड़ताल की। शाम 5 बजे केंद्र के बंद होने का समय है, लेकिन रात करीब 9 बजे यूरिया गाड़ियों में लोड की जा रही थी। टीम को देखते ही कर्मचारी केंद्र बंद कर भाग गए।
अलीगंज तिराहा स्थित इफ्को किसान सेवा केंद्र पर एक पिकअप लोडर वाहन में यूरिया की बोरी लादी जा रही थी। रात के नौ बजे सहकारी समिति के खुले होने पर अमर उजाला की टीम ने पास जाकर वीडियो और फोटो बनाना शुरू किए। इस पर हड़बड़ाए कर्मचारियों ने तुरंत शटर बंद कर दिए। बाहर खड़ी पिकअप गाड़ी संख्या यूपी 87 टी 9141 में यूरिया की करीब 40 बोरी लदी हुईं थीं। मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। तब तक पिकअप चालक यूरिया लेकर फरार हो गया। एआर कोऑपरेटिव महावीर सिंह का कहना है कि मामले की जानकारी नहीं है। वीडियो व पिकअप नंबर के आधार पर जांच कराई जाएगी।
दिन में बुकिंग, रात में होती है लोडिंग
आलू की बुवाई हो चुकी है और डीएपी की मांग अब लगभग खत्म हो गई है। जबकि इस समय यूरिया की मांग अचानक से बढ़ी है, लेकिन इसकी आपूर्ति आसानी से नहीं मिल पा रही है। किसानों को डीएपी की तरह ही यूरिया के लिए भी कतारों में लगना पड़ रहा है। एक ओर जहां सामान्य किसानों को यूरिया नहीं मिल रही तो दूसरी ओर इसकी कालाबाजारी की जा रही है। दिन में ही बुकिंग कर ली जाती है। अंधेरा और सन्नाटा होते ही रात में केंद्रों से यूरिया की बोरी गाड़ियों में लोड कर भेज दी जाती हैं।
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अलीगंज तिराहा स्थित इफ्को किसान सेवा केंद्र पर एक पिकअप लोडर वाहन में यूरिया की बोरी लादी जा रही थी। रात के नौ बजे सहकारी समिति के खुले होने पर अमर उजाला की टीम ने पास जाकर वीडियो और फोटो बनाना शुरू किए। इस पर हड़बड़ाए कर्मचारियों ने तुरंत शटर बंद कर दिए। बाहर खड़ी पिकअप गाड़ी संख्या यूपी 87 टी 9141 में यूरिया की करीब 40 बोरी लदी हुईं थीं। मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। तब तक पिकअप चालक यूरिया लेकर फरार हो गया। एआर कोऑपरेटिव महावीर सिंह का कहना है कि मामले की जानकारी नहीं है। वीडियो व पिकअप नंबर के आधार पर जांच कराई जाएगी।
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दिन में बुकिंग, रात में होती है लोडिंग
आलू की बुवाई हो चुकी है और डीएपी की मांग अब लगभग खत्म हो गई है। जबकि इस समय यूरिया की मांग अचानक से बढ़ी है, लेकिन इसकी आपूर्ति आसानी से नहीं मिल पा रही है। किसानों को डीएपी की तरह ही यूरिया के लिए भी कतारों में लगना पड़ रहा है। एक ओर जहां सामान्य किसानों को यूरिया नहीं मिल रही तो दूसरी ओर इसकी कालाबाजारी की जा रही है। दिन में ही बुकिंग कर ली जाती है। अंधेरा और सन्नाटा होते ही रात में केंद्रों से यूरिया की बोरी गाड़ियों में लोड कर भेज दी जाती हैं।
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