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नेत्र चिकित्सा वार्ड में खड़ी साइकिलें और गंदगी से पटे शौचालय

Mon, 06 Mar 2017 11:27 PM IST
Amar Ujala
Amar Ujala Updated Mon, 06 Mar 2017 11:27 PM IST
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Bicycles parked in the eye ward and dirt Pte toilet
जिला अस्पताल के नेत्र चिकित्सा विभाग मरीजों के लिए परेशानी का सबब है। नेत्र चिकित्सक मरीजाें से मेडिकल स्टोर से दवाइयां मंगा कर इलाज कर रहे हैं। - फोटो : Amar Ujala
 जिला अस्पताल के नेत्र चिकित्सा विभाग मरीजों के लिए परेशानी का सबब है। नेत्र चिकित्सक मरीजाें से मेडिकल स्टोर से दवाइयां मंगा कर इलाज कर रहे हैं। सोमवार को अमर उजाला टीम ने नेत्र चिकित्सा विभाग का जायजा लिया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आपरेशन से पहले आंख में डालने वाले ड्रॉप 13 मरीजाें ने चिकित्सक पर्ची पर मेडिकल स्टोर से खरीदे थे। पूर्व में चिकित्सक के खिलाफ शिकायतें मिलने पर निरीक्षण के दौरान डीएम विजय किरन आनंद ने चेतावनी दी थी, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। यही नहीं नेत्र विभाग में ऑपरेशन के बाद जहां मरीजों का वार्ड है वहां साइकिलें खड़ी दिखाई दीं और छत से डिस्टेंपर टपक रहा था। शौचालय भी गंदे पड़े थे। जिला अस्पताल में हर महीने 350 से अधिक ऑपरेशन होते है। विभागीय कर्मचारियों की माने तो ऑपरेशन के बाद चिकित्सक 800 रुपये की दवाइयां भी बाजार मंगाते हैं।  
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मरीज नंबर-1
सिकंदरपुर से आंख का ऑपरेशन कराने जिला अस्पताल पहुंचे सोरन सिंह को दो बजे ऑपरेशन का समय दिया गया था। सोरन सिंह ने बताया कि चिकित्सक डाक्टर शमशाद ने मेडिकल स्टोर से 180 रुपये कीमत की टेरोपेटिक और मोटेक-बीआर ड्रॉप खरीदवा कर आंख में डालकर लिटा दिया। वार्ड में सुबह से सफाई नहीं हुई थी।
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मरीज नंबर-2
मारहरा दरवाजा निवासी इजहार भी जिला अस्पताल में आंख का ऑपरेशन कराने आए थे। इजहार ने बताया कि उनके दामाद ने डाक्टर शमशाद द्वारा लिखी पर्ची पर 180 रुपये कीमत के टेरोपेटिक और मोटेक-बीआर मेडिकल स्टोर से खरीदे थे। इसके बाद वार्ड ब्वाय ने आंख में डाल कर बेड पर लिटाया है।
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मरीज नंबर-3
सरमनपुर निवासी रघुनाथ जिला अस्पताल में आंख का ऑपरेशन कराने पहुंचे थे और ड्रॉप डाल कर बेड पर लेटे थे। उनके बेटे रंजीत ने बताया कि डा0 शमशाद ने पर्ची लिख कर बाहर से टेरोपेटिक और मोटेक-बीआर ड्रॉप 180 रुपये में बाहर से खरीदवाए थे। रंजीत ने बताया कि चिकित्सक ने तीन बजे ऑपरेशन का समय दिया है।
मरीज नंबर-4
होलीगेट निवासी सरफुद्दीन भी जिला अस्पताल में आंख का ऑपरेशन कराने आए थे। इनकी आंख में भी ऑपरेशन से पहले टेरोपेटिक और मोटेक-बीआर आई ड्रॉप डाले गए थे। बेटे साबिर ने बताया कि उसका भाई अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर से दोनों ड्रॉप खरीद कर लाया था।


नेत्र चिकित्सक की सुनिए
ऑपरेशन से पहले आंख में डालने वाले ड्रॉप स्टॉक है या नहीं है आप आरटीआई से जानकारी लें। ज्यादा करोगे तो मरीजों के ऑपरेशन बंद कर दूंगा। नेत्र चिकित्सा विभाग का बजट कॉफी कम है। उतने में इतने मरीज नहीं निपटाए जा सकते।
डाक्टर शमशाद अनवर, नेत्र सर्जन जिला अस्पताल।


अस्पताल से बाहर दवाइयां मरीजों से खरीदवाना गंभीर मामला है। मामले की जांच कराकर नेत्र सर्जन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ये सब नहीं चलेगा।
- डा0 आरसी पांडेय, सीएमओ एटा
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