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मीर औसाफ अली की संपत्ति के वारिसान बन करते गए कब्जे
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जलेसर में बड़े मियां की दरगाह पर लगाया गया भगवा रंग का ध्वज ।संवाद
- फोटो : ETAH
जलेसर (एटा)। दरगाह और कमेेटी की विभिन्न संपत्तियों को लेकर अवैध कब्जों की तमाम शिकायतें सामने आई हैं। दरअसल यह संपत्तियां 18वीं शताब्दी में यहां के तत्कालीन जमींदार मीर औसाफ अली की थीं। उनकी कोई भी संतान नहीं थी। कमेटी पदाधिकारियों के पूर्वजों का दावा है कि मीर औसाफ अली की पत्नी ने उन लोगों को वारिस का दर्जा देकर वसीयत की थी। इसी वसीयत के आधार पर वह तमाम संपत्तियों पर कब्जे कर बैनामे करते रहे।
जलेसर के मोहल्ला कलाबाजार मोड़ निवासी वयोवृद्ध नंदकिशोर गुप्ता ने बताया कि मीर औसाफ अली की काफी संपत्तियां क्षेत्र में थीं। उनकी कोई संतान नहीं थी। उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी नन्ही फातिमा ने 1950 से 1955 के बीच हमीदुल्ला नाम के व्यक्ति को कुछ जायदाद की वसीयत की थी। हमीदुल्ला की बहन नवाब के यहां काम करती थीं। हमीदुल्ला की चौथी पीढ़ी के लोग बड़े मियां दरगाह समिति के पदाधिकारी हैं। ये लोग ही जमींदार के आवास में रहते थे। आवास और दरगाह के बाद इन लोगों ने अन्य जमीनों पर भी कब्जे जमाना शुरू किए। बताते थे कि नन्ही फातिमा ने किला खाई की वसीयत भी इनके पूर्वजों के नाम की थी।
वर्तमान में इस इलाके में मोहल्ला हथोड़ा, सादात, इस्लामनगर, छत्ता, ठगेलाल आदि मोहल्ले आते हैं। इन स्थानों की खाली जमीनों पर प्लॉटिंग कर समिति पदाधिकारियों ने जमीन के बैनामा अन्य लोगों के नाम कर रखे हैं। इसे लेकर भाजयुमो के पूर्व नगर अध्यक्ष सतेंद्र जादौन ने एसडीएम को शिकायती पत्र दिया है। एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि कमेटी से जुड़े लोगों की संपत्ति का ब्योरा और पुराने कागजात भी जुटाए जा रहे हैं। काफी गहराई से जांच की जा रही है। जिसमें पूरी स्थिति साफ हो जाएगी।
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रात में पुलिस ने दी दबिश, कोई नहीं लगा हाथ
कस्बा के मोहल्ला सादात में कमेटी अध्यक्ष मु. अकबर का आवास है। जहां अधिकांश परिजन रहते थे। मामला उछलने के बाद ये सभी फरार हो गए। पुलिस को मंगलवार रात जानकारी मिली कि कोई परिजन इस आवास में पहुंचा है। इस पर काफी पुलिसफोर्स को एकत्रित कर इस आवास पर दबिश दी गई। हालांकि वहां पुलिस को कोई हाथ नहीं लगा। जलेसर सीओ इरफान नासिर खान ने बताया कि आरोपियों की तलाश लगातार जारी है। संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है।
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जलेसर के मोहल्ला कलाबाजार मोड़ निवासी वयोवृद्ध नंदकिशोर गुप्ता ने बताया कि मीर औसाफ अली की काफी संपत्तियां क्षेत्र में थीं। उनकी कोई संतान नहीं थी। उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी नन्ही फातिमा ने 1950 से 1955 के बीच हमीदुल्ला नाम के व्यक्ति को कुछ जायदाद की वसीयत की थी। हमीदुल्ला की बहन नवाब के यहां काम करती थीं। हमीदुल्ला की चौथी पीढ़ी के लोग बड़े मियां दरगाह समिति के पदाधिकारी हैं। ये लोग ही जमींदार के आवास में रहते थे। आवास और दरगाह के बाद इन लोगों ने अन्य जमीनों पर भी कब्जे जमाना शुरू किए। बताते थे कि नन्ही फातिमा ने किला खाई की वसीयत भी इनके पूर्वजों के नाम की थी।
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वर्तमान में इस इलाके में मोहल्ला हथोड़ा, सादात, इस्लामनगर, छत्ता, ठगेलाल आदि मोहल्ले आते हैं। इन स्थानों की खाली जमीनों पर प्लॉटिंग कर समिति पदाधिकारियों ने जमीन के बैनामा अन्य लोगों के नाम कर रखे हैं। इसे लेकर भाजयुमो के पूर्व नगर अध्यक्ष सतेंद्र जादौन ने एसडीएम को शिकायती पत्र दिया है। एसडीएम अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि कमेटी से जुड़े लोगों की संपत्ति का ब्योरा और पुराने कागजात भी जुटाए जा रहे हैं। काफी गहराई से जांच की जा रही है। जिसमें पूरी स्थिति साफ हो जाएगी।
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रात में पुलिस ने दी दबिश, कोई नहीं लगा हाथ
कस्बा के मोहल्ला सादात में कमेटी अध्यक्ष मु. अकबर का आवास है। जहां अधिकांश परिजन रहते थे। मामला उछलने के बाद ये सभी फरार हो गए। पुलिस को मंगलवार रात जानकारी मिली कि कोई परिजन इस आवास में पहुंचा है। इस पर काफी पुलिसफोर्स को एकत्रित कर इस आवास पर दबिश दी गई। हालांकि वहां पुलिस को कोई हाथ नहीं लगा। जलेसर सीओ इरफान नासिर खान ने बताया कि आरोपियों की तलाश लगातार जारी है। संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है।