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शाम 7:21 से 8:20 तक महालक्ष्मी-गणेश के पूजन का शुभ मुहूर्त
Sun, 19 Oct 2025 11:46 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Sun, 19 Oct 2025 11:46 PM IST
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एटा। दिवाली सोमवार को धूमधाम से मनाई जाएगी। इसको लेकर लोगों ने तैयारियां कर ली हैं। पंडित आचार्य गिरजेश पचौरी ने बताया कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर प्रदोष काल में पूजन का समय 05:46 से 8:18 बजे तक रहेगा। वहीं शाम 7:21 से 8:20 तक घरों में महालक्ष्मी-गणेश के पूजन का शुभ मुहूर्त है।
आचार्य जी ने बताया कि महालक्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त रात 11:41 बजे से रहेगा। इस मुहूर्त में लक्ष्मी जी की पूजा करने से जीवन में अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी। आचार्य ने बताया कि हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का पर्व मनाया जाता है। इसको लेकर हर घर में सुख समृद्धि की कामना के साथ माता महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। दिवाली की रात सर्वार्थ सिद्धि की रात मानी जाता है। शुभ मुहूर्त में पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
ऐसे करें पूजा
आचार्य ने बताया कि माता महालक्ष्मी की आराधना के लिए पूजा का स्थान साफ करें और एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। चौकी पर छोटी थाली में चावल के दानों के बीच मुट्ठी भर गेहूं रखें। इस अनाज के ऊपर कलश को बिल्कुल बीच में रखें। इस कलश में पानी भरकर एक सुपारी, गेंदे का फूल, एक सिक्का और कुछ चावल के दाने डालें। कलश पर 5 आम के पत्ते गोलाकार आकार में रखें। इसके बीच में माता महालक्ष्मी की मूर्ति और कलश के दाहिनी ओर भगवान गणेश की मूर्ति रखें। जल से भरे हुए कलश पर तिलक लगाएं। भगवान को याद करते हुए दिवाली पूजा मंत्र का पाठ करें।
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आचार्य जी ने बताया कि महालक्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त रात 11:41 बजे से रहेगा। इस मुहूर्त में लक्ष्मी जी की पूजा करने से जीवन में अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी। आचार्य ने बताया कि हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का पर्व मनाया जाता है। इसको लेकर हर घर में सुख समृद्धि की कामना के साथ माता महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। दिवाली की रात सर्वार्थ सिद्धि की रात मानी जाता है। शुभ मुहूर्त में पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
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ऐसे करें पूजा
आचार्य ने बताया कि माता महालक्ष्मी की आराधना के लिए पूजा का स्थान साफ करें और एक चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। चौकी पर छोटी थाली में चावल के दानों के बीच मुट्ठी भर गेहूं रखें। इस अनाज के ऊपर कलश को बिल्कुल बीच में रखें। इस कलश में पानी भरकर एक सुपारी, गेंदे का फूल, एक सिक्का और कुछ चावल के दाने डालें। कलश पर 5 आम के पत्ते गोलाकार आकार में रखें। इसके बीच में माता महालक्ष्मी की मूर्ति और कलश के दाहिनी ओर भगवान गणेश की मूर्ति रखें। जल से भरे हुए कलश पर तिलक लगाएं। भगवान को याद करते हुए दिवाली पूजा मंत्र का पाठ करें।
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