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एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए मारामारी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 13 Feb 2017 10:54 PM IST
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अस्पताला में उमड़ी भीड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कुत्ते के काटने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों को काफी मारामारी करनी पड़ रही है। वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या ज्यादा और कंपनी से दवा की आपूर्ति कम होने से जिला अस्पताल में सोमवार को मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। इनमें से 25 फीदी लोग कासगंज जिले से आए थे। विधानसभा चुनाव के चलते पिछले तीन दिन छुट्टी रहने से सोमवार को भीड़ ज्यादा ही हो गई।
अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट एसके दीक्षित ने बताया कि दिसंबर-2016 में एंटी रैबीज वैक्सीन की पांच हजार डोज का ऑर्डर दिया गया था, लेकिन आपूर्ति केवल 2000 डोज की हुई। इसके चलते सीएचसी और पीएचसी में एंटी रैबीज डोज नहीं पहुंची है। सोमवार को जिला अस्पताल तीन दिन बाद खुलते ही 500 से अधिक लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए लाइन लग गए। इनमें कासगंज, पटियाली, धुमरी, जैथरा, अलीगंज, सराय अगहत, मिरहची, मारहरा, अवागढ़, निधौली कलां, जलेसर से भी आए थे। उन्होंने कहा कि 17 जनवरी को फिर 5000 डोज का आर्डर दिया गया, लेकिन अभी तक पूरी आपूर्ति नहीं हुई है।
पागल कुत्ते के काटने पर ही एंटी रैबीज वैक्सीन लगती है। जानकारी के अभाव और जांच की सुविधा न होने से कुत्ते का पंजा लगने पर भी लोग वैक्सीन लगवाने आ रहे हैं। हालांकि वैक्सीन के साइड इफेक्ट नहीं हैं। अगर पागल कुत्ता काटे तो इसका असर तीन दिन, तीन सप्ताह, तीन महीने और तीन साल बाद भी हो सकता है। रैबीज का असर होने के बाद कोई इलाज नहीं होता।
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डॉ. एस. चंद्रा, चिकित्सक, जिला अस्पताल
लोग पालतू कुत्तों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगवा लेते हैं, लेकिन आवारा कुत्तों को नगर निकाय और ग्राम पंचायत के पकड़ने पर पशु पालन विभाग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगा सकता है, लेकिन निकायों या पंचायतों ने कभी ऐसा किया नहीं है।
- डा0 राजेश कुमार, सीवीओ एटा
कुत्ते की लार में रैबीज बैक्टीरिया होते हैं। काटने के बाद रैबीज का असर होने पर मरीज पानी से डरने लगता है। यहां तक पीता भी नहीं है। पंखा चलने पर मरीज हवा में बैठने से डरकर भागता है।
1. कुत्ते के काटने पर जब घाव हो जाए तो उसे 15 मिनट तक पानी की धार से धोएं
2. घाव को कॉस्टिक सोडा वाले साबुन से भी धोएं। बीटाडिन व डिटॉल से धो सकते हैं
3. रैबीज का वायरस लार छोड़ता है, धोने से 80 प्रतिशत तक रैबीज से बचाव हो जाता है
4. घाव पर न तो कोई पट्टी बांधे और न ही कपड़ा। घाव को खुला ही छोड़ देना चाहिए।
5. तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और 24 घंटे के भीतर पहली एंटी रैबीज की डोज लगवा लें।
6. फिर तीसरे, सातवें, 14वें और 28वें दिन एंटी रैबीज का डोज लगवाना होगा।
7. जादू, टोना और घरेलू उपचार के चक्कर में न पड़ें। इससे नुकसान मरीज को होगा
कासगंज। यहां भी हालात एटा से जुदा नहीं है। जिला अस्पताल में पिछले 40 दिनों से एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं है जिसके कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे में उन्हें बाजार से महंगी वैक्सीन लगवानी पड़ रही है। विभाग के पास जो वैक्सीन थी, वह लगा दी गईं। 3 जनवरी को ये वैक्सीन पूरी तरह से खत्म हो गईं। जबकि कुत्ता एवं बंदर के काटने के मामलों में कोई कमी नहीं आई है। जनपद भर में प्रतिदिन सौ से अधिक कुत्ता या बंदर के काटने के मामले अस्पतालों में पहुंचते हैं। बाजार में यह वैक्सीन यह काफी महंगी है। पूरा वैक्सीनेशन कराने में मरीज का डेढ़ से दो हजार रुपये तक खर्च हो जाता है। इतनी महंगी वैक्सीन लगवा पान हर किसी के बस की बात नहीं होती। रेबीज से मौत के मामले पूर्व में हो भी चुके है।
कुत्ता काटने के बाद वह जिला अस्पताल पर वैक्सीन लगवाने गया था, लेकिन वैक्सीन न होने की बात बताई गई। मजबूरन उसे बाजार से वैक्सीन को लगवाना पड़ा। डॉक्टर ने पांच वैक्सीन लगवाने को कहा है। एक वैक्सीन की कीमत लगभग 300 रुपये है।
-सोनू निवासी सहावर गेट
एंटी रैबीज वैक्सीन के लिए चार अलग-अलग कंपनियों को काफी पहले आर्डर दिए जा चुके है, लेकिन सप्लाई नहीं मिल पा रही। विभाग सप्लाई के लिए लगातार प्रयासरत है।
-डॉ. रंगजी दुवे, सीएमओ, कासगंज
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अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट एसके दीक्षित ने बताया कि दिसंबर-2016 में एंटी रैबीज वैक्सीन की पांच हजार डोज का ऑर्डर दिया गया था, लेकिन आपूर्ति केवल 2000 डोज की हुई। इसके चलते सीएचसी और पीएचसी में एंटी रैबीज डोज नहीं पहुंची है। सोमवार को जिला अस्पताल तीन दिन बाद खुलते ही 500 से अधिक लोग एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए लाइन लग गए। इनमें कासगंज, पटियाली, धुमरी, जैथरा, अलीगंज, सराय अगहत, मिरहची, मारहरा, अवागढ़, निधौली कलां, जलेसर से भी आए थे। उन्होंने कहा कि 17 जनवरी को फिर 5000 डोज का आर्डर दिया गया, लेकिन अभी तक पूरी आपूर्ति नहीं हुई है।
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पागल कुत्ते के काटने पर ही एंटी रैबीज वैक्सीन लगती है। जानकारी के अभाव और जांच की सुविधा न होने से कुत्ते का पंजा लगने पर भी लोग वैक्सीन लगवाने आ रहे हैं। हालांकि वैक्सीन के साइड इफेक्ट नहीं हैं। अगर पागल कुत्ता काटे तो इसका असर तीन दिन, तीन सप्ताह, तीन महीने और तीन साल बाद भी हो सकता है। रैबीज का असर होने के बाद कोई इलाज नहीं होता।
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डॉ. एस. चंद्रा, चिकित्सक, जिला अस्पताल
लोग पालतू कुत्तों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगवा लेते हैं, लेकिन आवारा कुत्तों को नगर निकाय और ग्राम पंचायत के पकड़ने पर पशु पालन विभाग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगा सकता है, लेकिन निकायों या पंचायतों ने कभी ऐसा किया नहीं है।
- डा0 राजेश कुमार, सीवीओ एटा
कुत्ते की लार में रैबीज बैक्टीरिया होते हैं। काटने के बाद रैबीज का असर होने पर मरीज पानी से डरने लगता है। यहां तक पीता भी नहीं है। पंखा चलने पर मरीज हवा में बैठने से डरकर भागता है।
1. कुत्ते के काटने पर जब घाव हो जाए तो उसे 15 मिनट तक पानी की धार से धोएं
2. घाव को कॉस्टिक सोडा वाले साबुन से भी धोएं। बीटाडिन व डिटॉल से धो सकते हैं
3. रैबीज का वायरस लार छोड़ता है, धोने से 80 प्रतिशत तक रैबीज से बचाव हो जाता है
4. घाव पर न तो कोई पट्टी बांधे और न ही कपड़ा। घाव को खुला ही छोड़ देना चाहिए।
5. तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और 24 घंटे के भीतर पहली एंटी रैबीज की डोज लगवा लें।
6. फिर तीसरे, सातवें, 14वें और 28वें दिन एंटी रैबीज का डोज लगवाना होगा।
7. जादू, टोना और घरेलू उपचार के चक्कर में न पड़ें। इससे नुकसान मरीज को होगा
कासगंज। यहां भी हालात एटा से जुदा नहीं है। जिला अस्पताल में पिछले 40 दिनों से एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं है जिसके कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे में उन्हें बाजार से महंगी वैक्सीन लगवानी पड़ रही है। विभाग के पास जो वैक्सीन थी, वह लगा दी गईं। 3 जनवरी को ये वैक्सीन पूरी तरह से खत्म हो गईं। जबकि कुत्ता एवं बंदर के काटने के मामलों में कोई कमी नहीं आई है। जनपद भर में प्रतिदिन सौ से अधिक कुत्ता या बंदर के काटने के मामले अस्पतालों में पहुंचते हैं। बाजार में यह वैक्सीन यह काफी महंगी है। पूरा वैक्सीनेशन कराने में मरीज का डेढ़ से दो हजार रुपये तक खर्च हो जाता है। इतनी महंगी वैक्सीन लगवा पान हर किसी के बस की बात नहीं होती। रेबीज से मौत के मामले पूर्व में हो भी चुके है।
कुत्ता काटने के बाद वह जिला अस्पताल पर वैक्सीन लगवाने गया था, लेकिन वैक्सीन न होने की बात बताई गई। मजबूरन उसे बाजार से वैक्सीन को लगवाना पड़ा। डॉक्टर ने पांच वैक्सीन लगवाने को कहा है। एक वैक्सीन की कीमत लगभग 300 रुपये है।
-सोनू निवासी सहावर गेट
एंटी रैबीज वैक्सीन के लिए चार अलग-अलग कंपनियों को काफी पहले आर्डर दिए जा चुके है, लेकिन सप्लाई नहीं मिल पा रही। विभाग सप्लाई के लिए लगातार प्रयासरत है।
-डॉ. रंगजी दुवे, सीएमओ, कासगंज