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Etah News: 12 साल बाद बेगुनाह साबित हुए पिटाई और आगजनी के आरोपी
Tue, 25 Nov 2025 12:05 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Tue, 25 Nov 2025 12:05 AM IST
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एटा। पिटाई ओर आगजनी के करीब 12 साल पुराने मामले में अदालत ने फैसला सुनाया। इसमें आरोपी बनाए गए पप्पू और इसके भाई अवधेश निवासी गांव मंसूर नगर थाना सकीट को दोषमुक्त करार दिया गया है।
थाना सकीट में इसी गांव के सुमेर ने 7 फरवरी 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि सुबह 9 बजे उसके भाई रामखिलाड़ी और उसके पुत्र अवधेश व पप्पू ने जमीन के बंटवारे के विवाद में हमला बोल दिया। उसके और पुत्र अशोक पर ईंटों, लाठी-डंडों से प्रहार कर घायल कर दिया। इसके बाद उसकी झोपड़ी में आग लगा दी। इससे काफी घरेलू सामान, कपड़े आदि जल गए। जब उसने शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने जाने का प्रयास किया तो आरोपियों ने रास्ता रोक लिया और धमकी दी कि अगर वह थाने गया तो जान से मार देंगे।
थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने विवेचना कर अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान रामखिलाड़ी की मौत हो गई। अदालत में अधिकांश गवाह अपने बयानों से मुकर गए। दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने पर विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट अशोक कुमार ने फैसला सुनाया। इसमें कहा है कि पप्पू और अवधेश पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं। इस आधार पर दोनों को दोषमुक्त किया जाता है।
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थाना सकीट में इसी गांव के सुमेर ने 7 फरवरी 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि सुबह 9 बजे उसके भाई रामखिलाड़ी और उसके पुत्र अवधेश व पप्पू ने जमीन के बंटवारे के विवाद में हमला बोल दिया। उसके और पुत्र अशोक पर ईंटों, लाठी-डंडों से प्रहार कर घायल कर दिया। इसके बाद उसकी झोपड़ी में आग लगा दी। इससे काफी घरेलू सामान, कपड़े आदि जल गए। जब उसने शिकायत दर्ज कराने के लिए थाने जाने का प्रयास किया तो आरोपियों ने रास्ता रोक लिया और धमकी दी कि अगर वह थाने गया तो जान से मार देंगे।
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थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने विवेचना कर अदालत में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान रामखिलाड़ी की मौत हो गई। अदालत में अधिकांश गवाह अपने बयानों से मुकर गए। दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने पर विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट अशोक कुमार ने फैसला सुनाया। इसमें कहा है कि पप्पू और अवधेश पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं। इस आधार पर दोनों को दोषमुक्त किया जाता है।
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