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अब दो साल तक पहरे में रहेंगे टीबी के सामान्य मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 13 Dec 2016 11:41 PM IST
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मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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बीमारी के उपचार के बाद स्वस्थ होने पर भी टीबी के सामान्य मरीजों पर नजर रखी जाएगी। क्षय रोग विभाग इन मरीजों पर दो साल तक मानीटरिंग करेगा। हर छह महीने पर बलगम की जांच के अलावा एक्सरे कराया जाएगा। यही नहीं हर महीने चिकित्सकों की टीम मरीज के घर जाकर उनकी सेहत परखेगी। ताकि टीबी के निष्क्रिय हो चुके कीटाणुओं के दोबारा पनपने का पता चलने पर दोबारा उपचार कराया जा सके।
आमतौर पर टीबी के मरीज छह से आठ महीने के उपचार के बाद स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन खानपान और सेहत में लापरवाही बरतने पर कुछ मरीज दोबारा टीबी जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। सर्वे में सामने आया है कि उपचार के बाद सामान्य हो चुके मरीज खुद को स्वस्थ समझकर बीमार होने पर दोबारा उपचार या चेकअप नहीं कराते और बाद में इन्हीं मरीजों के कारण कीटाणु परिवार के स्वस्थ सदस्यों के शरीर में पहुंचकर दूसरों को बीमार करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सर्वे रिपोर्ट के बाद शासन ने अब सामान्य हो चुके टीबी के मरीजों की निगरानी कराने का फैसला किया है। जिला क्षय रोग अधिकारी डाक्टर सीएस शर्मा का कहना है कि मार्च 2017 से टीबी के सामान्य मरीजों की दो साल तक मानीटरिंग की शुरुआत होगी। हर छह महीने पर बलगम की जांच और एक्सरे कराया जाएगा। यदि टीबी के सामान्य हो चुके मरीज में कीटाणु सक्रिय मिले तो उपचार कराया जाएगा। जिले में वर्ष 2016 में अभी तक 2500 टीबी के मरीज पंजीकृत हो चुके हैं और उपचार चल रहा है। उन्होेंने बताया कि जिला अस्पताल में विभाग वर्ष 2003 से चल रहा है। औसतन हर साल दो हजार टीबी के मरीज पंजीकृत होते हैं। ज्यादातर मरीज छह से नौ महीने में स्वस्थ हो जाते हैं।
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अलीगंज ब्लॉक में सबसे ज्यादा टीबी के मरीज
जिला क्षय रोग अधिकारी डा0 सीएस शर्मा ने बताया कि जिले में सबसे ज्यादा 800 से 1000 मरीज अलीगंज ब्लॉक के पंजीकृत हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि अलीगंज और राजा का रामपुर इलाके में तंबाकू का उत्पाद होने के कारण किसान बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इसके चलते उनका पंजीकरण कर प्राथमिकता से उपचार चल रहा है।
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आमतौर पर टीबी के मरीज छह से आठ महीने के उपचार के बाद स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन खानपान और सेहत में लापरवाही बरतने पर कुछ मरीज दोबारा टीबी जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। सर्वे में सामने आया है कि उपचार के बाद सामान्य हो चुके मरीज खुद को स्वस्थ समझकर बीमार होने पर दोबारा उपचार या चेकअप नहीं कराते और बाद में इन्हीं मरीजों के कारण कीटाणु परिवार के स्वस्थ सदस्यों के शरीर में पहुंचकर दूसरों को बीमार करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सर्वे रिपोर्ट के बाद शासन ने अब सामान्य हो चुके टीबी के मरीजों की निगरानी कराने का फैसला किया है। जिला क्षय रोग अधिकारी डाक्टर सीएस शर्मा का कहना है कि मार्च 2017 से टीबी के सामान्य मरीजों की दो साल तक मानीटरिंग की शुरुआत होगी। हर छह महीने पर बलगम की जांच और एक्सरे कराया जाएगा। यदि टीबी के सामान्य हो चुके मरीज में कीटाणु सक्रिय मिले तो उपचार कराया जाएगा। जिले में वर्ष 2016 में अभी तक 2500 टीबी के मरीज पंजीकृत हो चुके हैं और उपचार चल रहा है। उन्होेंने बताया कि जिला अस्पताल में विभाग वर्ष 2003 से चल रहा है। औसतन हर साल दो हजार टीबी के मरीज पंजीकृत होते हैं। ज्यादातर मरीज छह से नौ महीने में स्वस्थ हो जाते हैं।
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अलीगंज ब्लॉक में सबसे ज्यादा टीबी के मरीज
जिला क्षय रोग अधिकारी डा0 सीएस शर्मा ने बताया कि जिले में सबसे ज्यादा 800 से 1000 मरीज अलीगंज ब्लॉक के पंजीकृत हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि अलीगंज और राजा का रामपुर इलाके में तंबाकू का उत्पाद होने के कारण किसान बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इसके चलते उनका पंजीकरण कर प्राथमिकता से उपचार चल रहा है।
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