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आठ सौ बीघा चारागाह पर दबंगों का कब्जा
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Sat, 04 Jun 2016 11:36 PM IST
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चारागाह की भूमि
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जवाहर बाग केवल मथुरा जिले में ही नहीं है, बल्कि एटा जिले में भी कई स्थानों पर सैकड़ों बीघा सरकारी भूमि दबंगों और रसूखदारों के कब्जे में है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रशासन दशकों से कब्जा मुक्त नहीं करा पाया है। प्रशासन की नाकामयाबी कहें या लापरवाही, जो शिकायतों के बाद भी इसे गंभीरता से नहीं लेता है।
विकास खंड मारहरा की ग्राम पंचायत अहमद नगर बमनोई और चाठी रफीपुर में चारागाह की जमीन पर तहसील प्रशासन द्वारा किए गए पट्टों को सुप्रीमकोर्ट के आदेश से निरस्त किया जा चुका है लेकिन दशकों से चारागाह की भूमि को जिला प्रशासन मुक्त नहीं करा पाया है। ग्रामीणों की मानें तो भूमि को कराने के लिये सैकड़ों प्रार्थना पत्र तहसील दिवस के अलावा अधिकारियों को दिये गये लेकिन जिला प्रशासन ने भूमि खाली कराने का कोई प्रयास नहीं किया। इसके चलते आठ सौ बीघा चारागाह की भूमि दबंगों के कब्जे में है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी अजय यादव से इन चारागाह को दबंगों से मुक्त कराने की मांग की है। ताकि इससे पशुपालकों को लाभ मिल सके। मांग करने वालों में रामबाबू वर्मा, चंद्रपाल सिंह, दाताराम पूर्व प्रधान, उदल सिंह, ओवन सिंह, हरीराम समेत अनेक ग्रामीण शामिल हैं।
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पट्टों को सुप्रीम कोर्ट ने किया था खारिज
मारहरा। ग्रामीणाें की माने चारागाहों की भूमि पर ग्राम प्रधानों और तहसील प्रशासन की सांठ-गांठ से पट्टों का आवंटन किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन पट्टों को अवैध बताते हुए कई साल पहले निरस्त कर दिया। साथ ही जिला प्रशासन को भूमि कब्जा मुक्त कराने के आदेश दिये थे, लेकिन जिला प्रशासन आज तक चारागाह की भूमि को मुक्त नहीं करा सका।
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विकास खंड मारहरा की ग्राम पंचायत अहमद नगर बमनोई और चाठी रफीपुर में चारागाह की जमीन पर तहसील प्रशासन द्वारा किए गए पट्टों को सुप्रीमकोर्ट के आदेश से निरस्त किया जा चुका है लेकिन दशकों से चारागाह की भूमि को जिला प्रशासन मुक्त नहीं करा पाया है। ग्रामीणों की मानें तो भूमि को कराने के लिये सैकड़ों प्रार्थना पत्र तहसील दिवस के अलावा अधिकारियों को दिये गये लेकिन जिला प्रशासन ने भूमि खाली कराने का कोई प्रयास नहीं किया। इसके चलते आठ सौ बीघा चारागाह की भूमि दबंगों के कब्जे में है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी अजय यादव से इन चारागाह को दबंगों से मुक्त कराने की मांग की है। ताकि इससे पशुपालकों को लाभ मिल सके। मांग करने वालों में रामबाबू वर्मा, चंद्रपाल सिंह, दाताराम पूर्व प्रधान, उदल सिंह, ओवन सिंह, हरीराम समेत अनेक ग्रामीण शामिल हैं।
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पट्टों को सुप्रीम कोर्ट ने किया था खारिज
मारहरा। ग्रामीणाें की माने चारागाहों की भूमि पर ग्राम प्रधानों और तहसील प्रशासन की सांठ-गांठ से पट्टों का आवंटन किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन पट्टों को अवैध बताते हुए कई साल पहले निरस्त कर दिया। साथ ही जिला प्रशासन को भूमि कब्जा मुक्त कराने के आदेश दिये थे, लेकिन जिला प्रशासन आज तक चारागाह की भूमि को मुक्त नहीं करा सका।
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