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एटा के लाल को वीरता मेडल
Etah
Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
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एटा। देश को जितना विदेशी दुश्मनों से खतरा है, उतना ही देश की पृथकतावादी ताकतों से। सेना दोनों से ही बखूबी निपट रही है। असम में देश की सुरक्षा के लिए खतरा बने बोडो उग्रवादियों से मुठभेड़ में एटा के शूरवीर निश्चल भारद्वाज ने उन्हें जिंदा दबोच लिया। इस अदम्य साहस के सम्मान स्वरूप केंद्र सरकार उन्हें सम्मानित करेगी। जांबाज निश्चल को 26 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति के हाथों बहादुरी का पुरस्कार मिलेगा।
मद्रास रेजीमेंट में लेफ्टिनेंटपद पर तैनात निश्चल भारद्वाज को सैन्य अभियान के दौरान वीरता दिखाने के लिए सेना मेडल के लिए चुना गया है। वर्ष 2010 में भारतीय थल सेना में कमीशन प्राप्त करने वाले लेफ्टिनेंट निश्चल भारद्वाज की मई 2011 में असम में तैनाती हुई। दस मई 2011 को उन्हें सूचना मिली कि चिरांग जिले में बोडो उग्रवादियों का एरिया कमांडर अपने साथियों के साथ एक विवाह समारोह में शामिल होने आ रहा है। सूचना पर वह अपने साथी जवानों के साथ पहुंच गए। उग्रवादी चीन निर्मित अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। दोनों से भीषण गोलीबारी हुई, जिसमें उग्रवादियों के पांव उखड़ गए। इस मुठभेड़ में लेफ्टिनेंट निश्चल व उनके जवानों ने एरिया कमांडर समेत पांच उग्रवादियों को जिंदा दबोच लिया। निश्चल की इस बहादुरी के लिए सेना के उनका नाम वीरता पुरस्कार के लिए चुना है। शहर की ठंडी सड़क की जैनवाली गली निवासी निश्चल के पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा हाईकोर्ट में वकील हैं। वह अपने बेटे की इस कामयाबी से गदगद हैं। उन्होंने बताया कि निश्चल ने देश के कई दुश्मनों को मार गिराया है। बताया कि देश सेवा और वीरता के कारण लेफ्टिेनेंट निश्चल अब कैप्टन निश्चल बन गए हैं। बेटे की इतनी बड़ी उपलब्धि पर पिता के अलावा मां प्रसून शर्मा और बहन दीक्षा भारद्वाज गर्व से फूले नहीं समा रही हैं।
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मद्रास रेजीमेंट में लेफ्टिनेंटपद पर तैनात निश्चल भारद्वाज को सैन्य अभियान के दौरान वीरता दिखाने के लिए सेना मेडल के लिए चुना गया है। वर्ष 2010 में भारतीय थल सेना में कमीशन प्राप्त करने वाले लेफ्टिनेंट निश्चल भारद्वाज की मई 2011 में असम में तैनाती हुई। दस मई 2011 को उन्हें सूचना मिली कि चिरांग जिले में बोडो उग्रवादियों का एरिया कमांडर अपने साथियों के साथ एक विवाह समारोह में शामिल होने आ रहा है। सूचना पर वह अपने साथी जवानों के साथ पहुंच गए। उग्रवादी चीन निर्मित अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। दोनों से भीषण गोलीबारी हुई, जिसमें उग्रवादियों के पांव उखड़ गए। इस मुठभेड़ में लेफ्टिनेंट निश्चल व उनके जवानों ने एरिया कमांडर समेत पांच उग्रवादियों को जिंदा दबोच लिया। निश्चल की इस बहादुरी के लिए सेना के उनका नाम वीरता पुरस्कार के लिए चुना है। शहर की ठंडी सड़क की जैनवाली गली निवासी निश्चल के पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा हाईकोर्ट में वकील हैं। वह अपने बेटे की इस कामयाबी से गदगद हैं। उन्होंने बताया कि निश्चल ने देश के कई दुश्मनों को मार गिराया है। बताया कि देश सेवा और वीरता के कारण लेफ्टिेनेंट निश्चल अब कैप्टन निश्चल बन गए हैं। बेटे की इतनी बड़ी उपलब्धि पर पिता के अलावा मां प्रसून शर्मा और बहन दीक्षा भारद्वाज गर्व से फूले नहीं समा रही हैं।
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