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बदलते मौसम में बढ़ा डायरिया और वायरल का प्रकोप, 40 बच्चे बीमार
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शहर के एक क्लीनिक पर बच्चों के उपचार के लिए बैठे लोग। संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। भीषण गर्मी, बारिश और अब उमस से डायरिया का प्रकोप बढ़ रहा है। इससे बच्चे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सोमवार को जिला अस्पताल में 40 बच्चों का इलाज किया गया। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे उल्टी, दस्त और खांसी से ग्रसित थे। जिला अस्पताल सहित नर्सिंग होम में भी मरीजों में सर्वाधिक संख्या बच्चों की है। यहां भी मरीजों की भीड़ लगी हुई है।
यदि बच्चे को 24 घंटे में तीन से चार दस्त हों तो मान लें कि ऐसी स्थिति में वह डायरिया का शिकार हो सकता है। ऐसे बच्चे को तुरंत ओआरएस का घोल देना चाहिए। इसके साथ ही डॉक्टर को दिखाकर दवा लेनी चाहिए। गर्मी में सर्वाधिक बीमारी का शिकार कम वजन के बच्चे हो रहे हैं।
एक वर्ष के बच्चे में दस किलोग्राम का वजन होना चाहिए, यहां बच्चे सात से आठ किलोग्राम के हैं। इससे उनकी प्रतिरोधी क्षमता पर प्रभाव पड़ता है।
चिकित्सकों ने बताया कि नवजात को गंभीर जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए मां का दूध जरूरी होता है। इसलिए नवजात को छह माह तक मां का दूध पिलाना चालिए। जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
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ये बरतें सावधानी
-डायरिया के लक्षण दिखने पर तुरंत डाक्टर के पास जाएं।
-बच्चे को ओआरएस घोल दाल का पानी भी पिलाते रहें।
-नमक और चीनी का घोल बनाकर दे सकते हैं।
-डायरिया में बच्चों को दूध बिल्कुल भी न पिलाएं।
-खाने में वसा युक्त भोजन बिल्कुल शामिल न करें।
------------
तीन दिन में आए डायरिया के मरीज
शुक्रवार- 22
शनिवार- 18
सोमवार- 20
बच्चों को धूप में न निकलने दें
इस समय बच्चों को गर्मी से बचाना जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही में बच्चे डायरिया व वायरल बुखार के शिकार हो रहे हैं। सोमवार को 40 बच्चों का इलाज किया गया। अधिकतर बच्चे उल्टी, दस्त और खांसी से ग्रसित थे। बीमारियों से बच्चों को बचाने के लिए धूप में न निकलने दें। बार-बार ठंडा पानी न पीने दें।
-डॉ. वैभव गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल
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यदि बच्चे को 24 घंटे में तीन से चार दस्त हों तो मान लें कि ऐसी स्थिति में वह डायरिया का शिकार हो सकता है। ऐसे बच्चे को तुरंत ओआरएस का घोल देना चाहिए। इसके साथ ही डॉक्टर को दिखाकर दवा लेनी चाहिए। गर्मी में सर्वाधिक बीमारी का शिकार कम वजन के बच्चे हो रहे हैं।
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एक वर्ष के बच्चे में दस किलोग्राम का वजन होना चाहिए, यहां बच्चे सात से आठ किलोग्राम के हैं। इससे उनकी प्रतिरोधी क्षमता पर प्रभाव पड़ता है।
चिकित्सकों ने बताया कि नवजात को गंभीर जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए मां का दूध जरूरी होता है। इसलिए नवजात को छह माह तक मां का दूध पिलाना चालिए। जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
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ये बरतें सावधानी
-डायरिया के लक्षण दिखने पर तुरंत डाक्टर के पास जाएं।
-बच्चे को ओआरएस घोल दाल का पानी भी पिलाते रहें।
-नमक और चीनी का घोल बनाकर दे सकते हैं।
-डायरिया में बच्चों को दूध बिल्कुल भी न पिलाएं।
-खाने में वसा युक्त भोजन बिल्कुल शामिल न करें।
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तीन दिन में आए डायरिया के मरीज
शुक्रवार- 22
शनिवार- 18
सोमवार- 20
बच्चों को धूप में न निकलने दें
इस समय बच्चों को गर्मी से बचाना जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही में बच्चे डायरिया व वायरल बुखार के शिकार हो रहे हैं। सोमवार को 40 बच्चों का इलाज किया गया। अधिकतर बच्चे उल्टी, दस्त और खांसी से ग्रसित थे। बीमारियों से बच्चों को बचाने के लिए धूप में न निकलने दें। बार-बार ठंडा पानी न पीने दें।
-डॉ. वैभव गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल