{"_id":"47e002a1e04b584bba3673bde162f4dd","slug":"15000-hearing-complent-disposal-of-13885-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"15000 वादों की सुनवाई, 13885 का निस्तारण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
15000 वादों की सुनवाई, 13885 का निस्तारण
ब्यूरो अमर उजाला एटा
Updated Sat, 06 Dec 2014 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शनिवार को जनपद न्यायालय के अलावा सभी तहसीलों व प्रशासनिक कार्यालयों में आयोजित हुई राष्ट्रीय लोक अदालत में वर्षों से लंबित चल रहे वादों के निस्तारण के लिए लोगों की लाइन लगी रही। 15000 से ज्यादा आए वादों में से 13885 का मौके पर ही निस्तारण किया गया। 3800 मामले प्रिलिटीगेशन के थे। इस मौके पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने लोक अदालत का निरीक्षण किया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण व उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में सुबह आठ बजे से ही न्यायालय परिसर में लोगों का आना शुरू हो गया। संबंधित कक्षों में जाकर लोगाें ने अपने वादों के निस्तारण की पहल खुद की तो कुछ ने वकीलों की मदद ली। सबसे ज्यादा छोटे अपराधों से जुड़े मामले सामने ज्यादा आए। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर लोक अदालत का शुभारंभ किया।
उन्होंने कहा कि सुलह समझौते के आधार पर विवादों का लोक अदालत के माध्यम से निस्तारण पक्षों के मध्य रंजिशों को सदैव के लिए समाप्त कर दिया जाता है। सुलह समझौतों के आधार पर वादों के निस्तारण से न्यायालयों में त्वरित वादों की संख्या भी कम होती है और लोगों को त्वरित न्याय मिलता है।
विज्ञापन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व जिला जज केके शर्मा ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से पक्षों के मध्य विवादों का निपटारा एक सशक्त तकनीक है। नियमित रूप से वादों की सुनवाई के अलावा यह एक वैकल्पिक मंच है और लोक अदालत में वादों के निस्तारण संबंधी आदेश के विरुद्ध कोई भी अपील नहीं है। इस दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार कंज ने भी विचार व्यक्त किए।
इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज सीनियर डिवीजन हुसैन अहमद अंसारी, डीएस श्रीवास्तव, शशिभूषण पांडेय, रविंद्र सिंह, मानवेंद्र सिंह, प्रतिभा सक्सैना, काशीनाथ, कल्पना द्वितीय, टीएन पासवान, रिचा वालिया आदि न्यायिक अधिकारी के अलावा एसएसपी सुरेंद्र कुमार वर्मा, सीओ सिटी करन सिंह मौजूद थे।
जिला न्यायालय की वेबसाइट भी लांच
एटा। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने इस मौके पर न्यायालय की वेबसाइट व एसएमएस सिस्टम का भी शुभारंभ किया। इसके लांच होने के बाद अब लोग घर बैठे ही नेट पर सर्च कर देख सकेंगे कि उनके केस की कब तारीख है और क्या स्थिति है। उसे न्यायालय व अधिवक्ता के पास बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एसएमएस के जरिये भी उसे यह जानकारी मिलेगी।
कम है न्यायिक अधिकारी
एटा। कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक यहां भी न्यायिक अधिकारियों की कमी चल रही है। कई कोर्ट ऐसी हैं जहां न्यायिक अधिकारी नहीं हैं। दूसरी कोट में इनके मामले निस्तारण किए जा रहे हैं। उच्चाधिकारियों को इस कमी से अवगत कराया जा चुका है।
1994 तक के केसों का निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत में वर्ष 1994 तक के केसों का निस्तारण हुआ। लंबे समय से परेशान चल रहे लोगों के जब केसों का निस्तारण हुआ तो उनके चेहरे पर खुशी नजर आई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव हुसैन अहमद अंसारी ने बताया कि लोक अदालत में 3800 मामले प्रिलिटीगेशन स्तर पर नियत किए गए। इनके जरिये बैंकों के ऋण वसूली से संबंधित उन मामलों का निस्तारण किया गया जो अभी तक न्यायालय में आए ही नहीं हैं। इससे न्यायालयों में वादों की संख्या कम होती है। लोक अदालत में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक, बिजली विभाग आदि ने भी अपने कैंप लगाए।
विज्ञापन
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण व उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में सुबह आठ बजे से ही न्यायालय परिसर में लोगों का आना शुरू हो गया। संबंधित कक्षों में जाकर लोगाें ने अपने वादों के निस्तारण की पहल खुद की तो कुछ ने वकीलों की मदद ली। सबसे ज्यादा छोटे अपराधों से जुड़े मामले सामने ज्यादा आए। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर लोक अदालत का शुभारंभ किया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सुलह समझौते के आधार पर विवादों का लोक अदालत के माध्यम से निस्तारण पक्षों के मध्य रंजिशों को सदैव के लिए समाप्त कर दिया जाता है। सुलह समझौतों के आधार पर वादों के निस्तारण से न्यायालयों में त्वरित वादों की संख्या भी कम होती है और लोगों को त्वरित न्याय मिलता है।
विज्ञापन
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष व जिला जज केके शर्मा ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से पक्षों के मध्य विवादों का निपटारा एक सशक्त तकनीक है। नियमित रूप से वादों की सुनवाई के अलावा यह एक वैकल्पिक मंच है और लोक अदालत में वादों के निस्तारण संबंधी आदेश के विरुद्ध कोई भी अपील नहीं है। इस दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश कुमार कंज ने भी विचार व्यक्त किए।
इस मौके पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज सीनियर डिवीजन हुसैन अहमद अंसारी, डीएस श्रीवास्तव, शशिभूषण पांडेय, रविंद्र सिंह, मानवेंद्र सिंह, प्रतिभा सक्सैना, काशीनाथ, कल्पना द्वितीय, टीएन पासवान, रिचा वालिया आदि न्यायिक अधिकारी के अलावा एसएसपी सुरेंद्र कुमार वर्मा, सीओ सिटी करन सिंह मौजूद थे।
जिला न्यायालय की वेबसाइट भी लांच
एटा। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति अनिल कुमार ने इस मौके पर न्यायालय की वेबसाइट व एसएमएस सिस्टम का भी शुभारंभ किया। इसके लांच होने के बाद अब लोग घर बैठे ही नेट पर सर्च कर देख सकेंगे कि उनके केस की कब तारीख है और क्या स्थिति है। उसे न्यायालय व अधिवक्ता के पास बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एसएमएस के जरिये भी उसे यह जानकारी मिलेगी।
कम है न्यायिक अधिकारी
एटा। कोर्ट के सूत्रों के मुताबिक यहां भी न्यायिक अधिकारियों की कमी चल रही है। कई कोर्ट ऐसी हैं जहां न्यायिक अधिकारी नहीं हैं। दूसरी कोट में इनके मामले निस्तारण किए जा रहे हैं। उच्चाधिकारियों को इस कमी से अवगत कराया जा चुका है।
1994 तक के केसों का निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत में वर्ष 1994 तक के केसों का निस्तारण हुआ। लंबे समय से परेशान चल रहे लोगों के जब केसों का निस्तारण हुआ तो उनके चेहरे पर खुशी नजर आई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव हुसैन अहमद अंसारी ने बताया कि लोक अदालत में 3800 मामले प्रिलिटीगेशन स्तर पर नियत किए गए। इनके जरिये बैंकों के ऋण वसूली से संबंधित उन मामलों का निस्तारण किया गया जो अभी तक न्यायालय में आए ही नहीं हैं। इससे न्यायालयों में वादों की संख्या कम होती है। लोक अदालत में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक, बिजली विभाग आदि ने भी अपने कैंप लगाए।