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130 लोगों ने कराया एक्यूप्रेशर से उपचार
ब्यूरो अमर उजाला, एटा
Updated Fri, 04 Dec 2015 11:08 PM IST
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श्री मारवाड़ी माहेश्वरी संघ के आठ दिवसीय मेगा एक्यूप्रेशर प्रशिक्षण एवं उपचार शिविर का मारवाड़ी धर्मशाला में शुक्रवार को समापन हुआ। समापन के मौके पर लोगों को इस चिकित्सा पद्यति की जानकारी दी। 130 मरीजों ने उपचार कराया।
चिकित्सक डा. दुर्गेश वैष्णव ने कहा कि एक्यूप्रेशर से बिना दवा के रोग का उपचार हो जाता है। अपनी दिनचर्या में परिवर्तन कर शरीर को निरोगी बनाया जा सकता है। सूर्योदय से पूर्व उठें। उठते ही एक या दो गिलास पानी घूंट-घूंट कर पीेने से अम्लीयता कम होती है। मोटापा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, एसीडीटी, सिरदर्द, ज्वाइंट पेन, घुटनों का दर्द, कमर दर्द, अस्थमा, आंख, नाक, कान की समस्या, चिकिनगुनिया आदि का उपचार संभव है। किसी कारण से शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में रक्त प्रवाह नहीं कम होने पर उस भाग में दर्द होना शुरू हो जाता है। इस पद्यति से इस प्रवाह को शरीर के प्रभावित हिस्से में पहुंचाया जाता है। हथेली एवं पैर के तलवों के विभिन्न स्थानों पर दबाव देकर उपचार किया जाता है। इसमें किसी भी प्रकार की औषधि नहीं दी जाती। इसका कोई दुष्प्रभाव भी शरीर पर नहीं पड़ता। लगातार इस पद्यति का उपचार करने से रोगी पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है।
इस दौरान कौशल किशोर पल्तानी, सुरेंद्र किशोर, राकेश बिड़ला, चंद्र शेखर चांडक, संजीव पल्तानी, राजेश भट्टर, गोपाल माहेश्वरी, संजीव केला, सुनील दरगढ़, राजकुमार जाखेटिया, महेंद्र पाल चांड़क, सतीश चंद्र फोफलिया, शशि काबरा, बबिता भट्टर, प्रमिला राठी, प्रतिमा रेदड़, रश्मि आदि मौजूद रहे।
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चिकित्सक डा. दुर्गेश वैष्णव ने कहा कि एक्यूप्रेशर से बिना दवा के रोग का उपचार हो जाता है। अपनी दिनचर्या में परिवर्तन कर शरीर को निरोगी बनाया जा सकता है। सूर्योदय से पूर्व उठें। उठते ही एक या दो गिलास पानी घूंट-घूंट कर पीेने से अम्लीयता कम होती है। मोटापा, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, एसीडीटी, सिरदर्द, ज्वाइंट पेन, घुटनों का दर्द, कमर दर्द, अस्थमा, आंख, नाक, कान की समस्या, चिकिनगुनिया आदि का उपचार संभव है। किसी कारण से शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में रक्त प्रवाह नहीं कम होने पर उस भाग में दर्द होना शुरू हो जाता है। इस पद्यति से इस प्रवाह को शरीर के प्रभावित हिस्से में पहुंचाया जाता है। हथेली एवं पैर के तलवों के विभिन्न स्थानों पर दबाव देकर उपचार किया जाता है। इसमें किसी भी प्रकार की औषधि नहीं दी जाती। इसका कोई दुष्प्रभाव भी शरीर पर नहीं पड़ता। लगातार इस पद्यति का उपचार करने से रोगी पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है।
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इस दौरान कौशल किशोर पल्तानी, सुरेंद्र किशोर, राकेश बिड़ला, चंद्र शेखर चांडक, संजीव पल्तानी, राजेश भट्टर, गोपाल माहेश्वरी, संजीव केला, सुनील दरगढ़, राजकुमार जाखेटिया, महेंद्र पाल चांड़क, सतीश चंद्र फोफलिया, शशि काबरा, बबिता भट्टर, प्रमिला राठी, प्रतिमा रेदड़, रश्मि आदि मौजूद रहे।
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