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यूपी के इन 24 गांवों पर से मिटेंगे ‘नक्सल’ के दाग

Wed, 29 May 2013 01:56 AM IST
देवरिया/अरुण चन्द
देवरिया/अरुण चन्द Updated Wed, 29 May 2013 01:56 AM IST
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Disappear from 'Maoist' stain the 24 villages of UP

बिहार सीमा से सटे देवरिया के 24 गांवों पर करीब दो दशक पूर्व लगा ‘नक्सल’ का दाग जल्द ही साफ हो जाएगा। प्रशासन, नक्सल प्रभावित गांवों की सूची से इन सभी के नाम हटाने जा रहा है। इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है।

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इन गांवों के बारे में प्रशासन ने जो सूचनाएं जुटाई हैं, उनके मुताबिक लंबे समय से इन गांवों में किसी भी प्रकार की नक्सली गतिविधि नहीं हुई। इस बीच कुछ गांवों में घटनाएं जरूर हुईं लेकिन सभी आपसी रंजिश का परिणाम थी।
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इसे नक्सली घटनाएं नहीं कहा जा सकता। अलबत्ता अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए कुछ अराजकतत्वों ने इन घटनाओं से नक्सलियों के नाम जोड़कर लोगों को भयभीत करने की कोशिश जरूर की। लेकिन वे भी कामयाब नहीं रहे। गांव वाले अब सब समझ गए हैं।
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नाम न छापने की शर्त पर यहां मंडल के बड़े पद पर काबिज रहे चुके एक अफसर ने बताया कि उन्होंने सच्चाई जानने के लिए सभी नक्सल प्रभावित गांवों का सर्वे कराया था जिसमें कोई भी गांव नक्सल प्रभावित नहीं पाया गया था।

नक्सल प्रभावित सूची से इन गांवों के नाम बाहर करने की कार्रवाई भी शुरू की लेकिन इसी बीच तबादला हो गया। उनका यह भी कहना है कि भारत सरकार से नक्सल प्रभावित गांवों के विकास के लिए मोटी रकम आती है।

इसी बहाने इन गांवों का विकास हो जाए, यही सोचकर इन गांवों से नक्सल का ठप्पा हटाने को कभी सक्रियता नहीं दिखाई गई।

प्रशासन और पुलिस के अफसर भी यह जानते हैं। यही वजह है कि नक्सल प्रभावित होने के बाद भी कभी इन गांवों में सर्च या यहां रहने वालों की पहचान के लिए लंबे समय से कोई विशेष अभियान नहीं चलाया गया।

दूसरे प्रांत में भी कहीं कोई नक्सली घटना हुई तो यहां सिर्फ कागजों में ही एलर्ट घोषित किया गया। गांव वालों का भी कहना है कि पुलिस या प्रशासन का कोई भी अफसर कभी गांव में पूछताछ करने के उद्देश्य से नहीं आया।  

बता दें कि दो दशक पहले जिले के बनकटा ब्लाक के जैतपुरा गांव में इंडियन प्यूपल फ्रंट के सक्रिय सदस्य उमेश पासवान उर्फ शर्मा जी ने सामंती व्यवस्था का विरोध शुरू किया था।

जैतपुरा एवं उसके आस-पास के गांवों में भूमिहार और क्षत्रिय सबसे संपन्न और शक्तिशाली माने जाते थे। गरीबों को उत्पीड़न से निजात दिलाने के नाम पर शर्मा जैतपुरा और उसके आसपास के गरीबों को इनके खिलाफ लामबंद कर रहा था।

इसी बीच वर्ष 1998-99 में एक घटना हुई। बताया जाता है कि शर्मा ने बिहार के डुमहर गांव के मुखिया राजेन्द्र राय की फावड़े से काटकर हत्या कर दी। इसके बाद से ही जैतपुरा व उसके आस-पास के इलाकों में दहशत फैल गई।

सवर्ण जाति के लोग सर्वाधिक भयभीत हुए। हालांकि इसके करीब चार साल बाद 2003 में ही चुनावी रंजिश को लेकर गोपालगंज के कुटिया गांव में शर्मा की भी हत्या हो गई। इसके बाद धीरे-धीरे सब कुछ शांत हो गया।

बिहार ने दिया कलंक
1998 में जैतपुरा व 2003 में बिहार के कुटिया गांव में हुई वारदात के बाद भी जिले की सीमा से सटे बिहार प्रांत के कुछ गांवों में नक्सली घटनाएं बदस्तूर जारी रहने की वजह से देवरिया के 24 जिलों पर नक्सल प्रभावित होने का कलंक लगा।

सूत्रों का कहना है कि जिले के ये गांव बिहार के सीवान जिले के जगदीशपुर कोठी, कैथोली, परसिया, बड़गांव, करजइया, मैदनिया, डोमडीह, मठिया, सिरकलपुर, बकुलाड़ी, बेलउर, गुथनी और गोपालगंज के अहियापुर व कुटिया आदि गांवों से सटे हैं और वहां 1998 और 2003 की घटना के बाद भी नक्सली गतिविधियां संचालित हो रहीं थी।

इसे देखते हुए ही प्रशासन ने एहतियातन देवरिया के इन गांवों को नक्सल प्रभावित गांव की सूची में डाल दिया और आज भी ये गांव इस अभिशाप को ढोने को मजबूर हैं।  

कोई गांव नक्सली प्रभावित नहीं: डीएम
देवरिया के डीएम विवेक ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि जिले का कोई गांव अब नक्सल प्रभावित नहीं रह गया है। सभी 24 गांवों को बेवजह नक्सल प्रभावित गांवों की सूची में रखा गया है।

इन गांवों की सही स्थिति जानने के लिए सूचनाएं एकत्रित की गईं थीं, इन सूचनाओं से कहीं ऐसा नहीं प्रतीत हुआ कि वहां बीते दो दशक के बीच कोई नक्सली मूवमेंट कभी चला हो।

उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित गांवों की सूची से इन सभी गांवों के नाम जल्द काट दिये जाएंगे।

मैं अभी जिले से बाहर हूं, पहुंचते ही इसकी कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद नाम हटा दिए जाएंगे।    

दो दशक से नहीं हुआ कोई मूवमेंट : डीआईजी
डीआईजी नवीन अरोरा का कहना है कि कतिपय कारणों से देवरिया के इन गांवों को नक्सल प्रभावित सूची में डाला गया था लेकिन करीब दो दशक से इनमें से किसी भी गांव में नक्सलियों का कोई मूवमेंट नहीं हुआ।

इन गांवों का सर्वे कराया जा रहा है। मैनें आईबी से सूचना मांगी है कि यहां की स्थानीय पुलिस को छोड़कर कहीं से भी यहां के किसी क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां होने की कोई सूचना हो तो, हमे भी बताया जाए।

नक्सल के नाम पर हो रही लूट: प्रेमलता
भाकपा माले की राज्य कमेटी की सदस्य प्रेमलता पाण्डेय का कहना है कि प्रशासन ने जिले के जिन गांवों को नक्सल प्रभावित घोषित किया है, उनमें से किसी भी गांव लंबे समय से किसी भी प्रकार की नक्सली घटना नहीं हुई।


प्रशासन इन गांवों पर नक्सल होने का ठप्पा लगाकर वहां के विकास के लिए मिलने वाला फंड लूटने का काम कर रहा है।

जुर्म के खिलाफ गरीबों की गोलबंदी न हो, इसे रोकने के लिए प्रशासन और पुलिस उन्हें नक्सली और आतंकवादी का नाम देकर उन्हें दबाने की कोशिश करती है।

ये हैं नक्सल प्रभावित गांव
ब्लाक.............................गांव
देवरिया सदर.............करौदी, सरौरा, बरैठा
पथरदेवा...............विशुनपुरा बाजार, लोहरौली
भाटपाररानी..........तिलौली, टोला अहिबरनराय, कटघरा
लार................मंझरिया, अमरीचक, महुजा, मेहरौना, चुरिया, बनकटा अमेठिया
भटनी.................बलुआ अफगान, रायबारी
बनकटा.............कोरयाकटहरिया, छपरा दुबौली, राजपुर, सिरसिया पवार, बासदेव उफ्र गोबरही, बासदेव उर्फ गोबरही,
                     रामपुर बुजुर्ग, विशुनपुरा, रामपुर कोठी

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