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पाक जेल से लौटा यूपी का बेटा, खुशी में रोने लगे लोग

Thu, 29 May 2014 11:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बहरियाबाद, गाजीपुर, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, बहरियाबाद, गाजीपुर, वाराणसी Updated Thu, 29 May 2014 11:20 AM IST
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dinesh vishwakarma returned home from pak jail

पिछले कई दिनों से परिवार के साथ ही पूरे बहरियाबाद कसबे के लोगों की निगाहें पाकिस्तान की जेल से छूटकर आने वाले दिनेश विश्वकर्मा की राह तक रही थीं। बुधवार की दोपहर वह जैसे ही कसबे में पहुंचा, लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। हर किसी ने दिनेश पर पुष्प बरसाए और उसे हाथों-हाथ लिया।

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दिनेश तीन साल पहले राजस्थान में रहने के दौरान गलती से पाकिस्तान की सीमा में घुस गया था, जिस पर उसे पाक सैनिकों ने पकड़कर जेल में डाल दिया था।

पाकिस्तान के कराची के मलीर जेल से तीन वर्षों बाद रिहा होने पर दिनेश विश्वकर्मा दिल्ली से सुबह साढ़े वाराणसी पहुंचा।

मां-बेटे को रोते देख लोगों की आंखों में आंसू

dinesh vishwakarma returned home from pak jail

यहां से निजी वाहन से आधा दर्जन वाहनों के काफिले के साथ दोपहर में उदंती नदी के तट पर स्थित शिव मंदिर पहुंचा। यहां पूजा करने के बाद वह खुली जीप में जुलूस की शक्ल में निकला।

दिनेश का काफिला जिधर से गुजर रहा था, लोग उस पर फूलों का वर्षा कर रहे थे। वह लगभग एक बजे अपने घर पहुंचा। जीप से जैसे ही दिनेश नीचे उतरा मां कौशल्या देवी ने उसे सीने से लगा लिया। इस बीच मां-बेटे की आंखों से आंसुओं की धार निकल पड़ी।

यह दृश्य देख वहां मौजूद लोगों की आंखें भी डबडबा गई। पांचों बहनें भाई से लिपट गई। पत्नी रुक्मिणी देवी ने आंखों में खुशी के आंसू लिए पति के पैर छुए और आरती उतारी।

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तीन साल बिना सब्जी खाए रहा दिनेश

dinesh vishwakarma returned home from pak jail

इसके पहले, सुबह शिवगंगा एक्सप्रेस से कैंट स्टेशन पहुंचने पर उत्तर प्रदेश प्रदेश विश्वकर्मा महासभा के पदाधिकारी अशोक विश्वकर्मा के नेतृत्व में बैंड बाजे के साथ दिनेश को फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया।

इस मौके पर आदर्श भारतीय संघ के संजय चौबे, काशी विद्यापीठ के पूर्व उपाध्यक्ष विश्वनाथ कुंवर, निषाद राज सेवा समिति के विनोद कुमार निषाद, जिला धोबी घाट बचाओ संघर्ष समिति के रमेश चौधरी समेत तमाम लोग मौजूद थे।

दिनेश ने बताया कि वह साढ़े तीन साल तक बिना सब्जी खाए रहा। क्योंकि पाक जेल में केवल पानी की तरह दाल और रोटी ही मिलती थी। उसने कहा कि इन दिनों में वह रोज अपने घर और परिवार को याद करता रहा।

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